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कपोल कल्‍पना नहीं है 'आयाराम-गयाराम' जुमला, गयालाल ने एक दिन में बदली थीं 3 पार्टियां!

कपोल कल्‍पना नहीं है 'आयाराम-गयाराम' जुमला, गयालाल ने एक दिन में बदली थीं 3 पार्टियां!

(Getty Images)

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चुनावी समर शुरू होने के साथ ही नेताओं के आस्था बदलने यानी आयाराम-गयाराम का खेल भी शुरू हो गया है. क्याे आपको पता है कि यह कहावत कहां से और कैसे शुरू हुई थी.

पांच राज्‍यों का चुनावी समर शुरू होने के साथ ही नेताओं के आस्‍था बदलने यानी आयाराम-गयाराम का खेल भी शुरू हो गया है. दिल और दल दोनों बदल रहे हैं. कांग्रेस, सपा, बसपा और भाजपा सभी पार्टियों के नेता अपने हित साधने के लिए दूसरी पार्टियों का दामन थाम रहे हैं. इस सियासी संग्राम में आयाराम-गयाराम का दुख हर पार्टी झेल रही है. लेकिन क्‍या आपको पता है कि यह कहावत कहां से और कैसे शुरू हुई थी. दरअसल, आयाराम-गयाराम का जुमला दलबदल के पर्याय के रूप में 1967  में मशहूर हुआ. इसकी जड़ हरियाणा की राजनीति में है.  यह कपोल कल्‍पना नहीं है.

हरियाणा के हसनपुर सुरक्षित क्षेत्र से निर्दलीय विधायक गयालाल ने 1967 में एक ही दिन में तीन बार दल बदल कर रिकॉर्ड बना दिया था. इसके साथ ही भारतीय राजनीति में ‘आया राम, गया राम’ का मुहावरा मशहूर हो गया. वरिष्‍ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं कि हरियाणा के एक राज्यपाल जीडी तपासे ने एक बार कहा था कि जिस तरह हम कपड़े बदलते हैं, वैसे ही यहां के विधायक दल बदलते हैं.

बताते हैं कि हरियाणा के पहले सीएम भगवत दयाल शर्मा की सरकार गिरने के दौरान इस कहावत का जन्‍म हुआ. भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस से टूट कर आए विधायकों ने विशाल हरियाणा पार्टी नाम से नई पार्टी का गठन किया. फिर उन्‍होंने दक्षिण हरियाणा के बड़े नेता राव बिरेंद्र सिंह की रहनुमाई में नई सरकार का निर्माण किया. इसी दौरान फरीदाबाद क्षेत्र में आने वाले हसनपुर सीट के निर्दलीय विधायक गयालाल ने एक दिन में तीन पार्टियां बदल डालीं. हरियाणा के वयोवृद्ध कांग्रेस नेता बलदेव राज ओझा बताते हैं कि इसी घटना से सियासत में एक नया मुहावरा मिला था.

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वरिष्‍ठ पत्रकार हरिवंश ने अपनी पुस्‍तक झारखंड: सपने और यथार्थ में इस घटना का जिक्र किया है.  वह लिखते हैं कि ‘1967 के बाद हरियाणा से जिस आयाराम गयाराम की राजनीतिक संस्‍कृति शुरू हुई थी वह क्‍या थी? सुबह में जो एमएलए इधर होता था, दोपहर में दूसरे खेमे में. शाम में तीसरे, रात में चौथे खेमे में’. राजीव रंजन की पुस्‍तक 1000 राजनीतिक प्रश्‍नोत्‍तरी नामक किताब में तो इस घटना पर प्रश्‍नोत्‍तरी दी गई है. केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड की 11वीं कक्षा के राजनीति विज्ञान की पुस्‍तक में भी इस घटना का जिक्र किया गया है. उसमें कहा गया है ‘हरियाणा में आयाराम-गयाराम की राजनीति शुरू हुई.

 

 

Tags: हरियाणा

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