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कल्याण सिंह के लिए पीएम मोदी को बदलनी पड़ी अपनी ही नसीहत, जानें क्‍या है वो वजह

कल्याण सिंह के लिए पीएम मोदी को बदलनी पड़ी अपनी ही नसीहत, जानें क्‍या है वो वजह

हाल ही में कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने एक बैठक के दौरान पांच राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से संबंधित एक बड़ा ऐलान किया था। उन्‍होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को नसीहत दी थी कि वह अपने चहेतों की टिकट के लिए पार्टी पर दबाव न बनाएं।

हाल ही में कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने एक बैठक के दौरान पांच राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से संबंधित एक बड़ा ऐलान किया था। उन्‍होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को नसीहत दी थी कि वह अपने चहेतों की टिकट के लिए पार्टी पर दबाव न बनाएं।

हाल ही में कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने एक बैठक के दौरान पांच राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से संबंधित एक बड़ा ऐलान किया था। उन्‍होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को नसीहत दी थी कि वह अपने चहेतों की टिकट के लिए पार्टी पर दबाव न बनाएं।

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नई दिल्‍ली। हाल ही में कुछ दिन पहले पीएम मोदी ने एक बैठक के दौरान पांच राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनावों से संबंधित एक बड़ा ऐलान किया था। उन्‍होंने अपनी ही पार्टी के नेताओं को नसीहत दी थी कि वह अपने चहेतों की टिकट के लिए पार्टी पर दबाव न बनाएं। इसके पीछे पीएम मोदी का मकसद पार्टी में परिवारवाद को रोकना था। लेकिन अपनी ही पार्टी के एक पूर्व मुख्‍यमंत्री के लिए मोदी को अपनी नसीहत बदलनी पड़ी।

दूसरे दलों में परिवारवाद को बढ़ावा दिए जाने के चलते कई बार भाजपा ने इसे मुद्दा बनाया। जमकर उन दलों के नेताओं पर बयानों के कटीले तीर छोड़े। लेकिन जब पांच राज्‍यों में विधानसभा चुनावों की बारी आई तो भाजपा ने ऐहतियात बरतनी शुरू कर दी। कहीं ऐसा न हो कि जिसके लिए हमेशा से दूसरों को निशाना बनाते रहे उस मुद्दे पर खुद ही घिर जाएं और फिर जबाव देते भी न बने। बस इसी सोच पर काम करते हुए करीब दस दिन पहले पीएम नरेन्‍द्र मोदी एक बयान जारी किया कि जल्‍द ही विधानसभा चुनावों के लिए टिकटों का वितरण होने वाला है।

इसलिए टिकट वितरण के दौरान किसी भी तरह से पार्टी पर कोई दबाव न बनाएं। अपने परिवार में किसी भी सदस्‍य के लिए टिकट न मांगे। पीएम का ये बयान उस मौके पर आया था जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज, कल्‍याण सिंह की पुत्रवधु और उनके नाती, उप्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री रामप्रकाश गुप्‍त के बेटे को लखनऊ से और तमाम सांसदों द्वारा अपने पुत्र-पुत्री के लिए टिकट मांगे जाने की चर्चाएं जोर पकड़ रहीं थी। इस फेहरिस्‍त में वो लोग भी शामिल थे जो हाल ही में दूसरी पार्टियां छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। इसमें दो प्रमुख नाम कांग्रेस से आईं रीता बहुगुणा और बसपा से आए स्‍वामी प्रसाद मौर्य शामिल हैं।

पश्‍चिमी उप्र से जुड़ी पहली सूची जारी करते हुए पीएम को अपने ही बनाए कायदे-कानून को तोड़ना पड़ा। पूर्व मुख्‍यमंत्री कल्‍याण सिंह अलीगढ़ की अतरौली विधानसभा से अपनी पुत्रवधु के लिए और एटा की मरहरा सीट से नाती संदीप सिंह के लिए टिकट मांग रहे थे। लेकिन उन्‍हें सफलता मिली अतरौली सीट पर। जहां से उनकी पुत्रवधु की जगह पार्टी ने उनके नाती को अपना उम्‍मीदवार बनाया है।

दूसरी ओर उत्‍तराखण्‍ड की बात करें तो सोमवार को ही कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले यशपाल आर्य को टिकट देने के साथ ही उनके पुत्र संजीव आर्य को भी चंद घंटों के भीतर ही टिकट दे दिया गया।

Tags: BJP

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