Home /News /politics /

अखिलेश यादव के पास बहुमत का ये है जादुई आंकड़ा, बहुमत के बहाने पार्टी पर पकड़ का करा सकते हैं एहसास

अखिलेश यादव के पास बहुमत का ये है जादुई आंकड़ा, बहुमत के बहाने पार्टी पर पकड़ का करा सकते हैं एहसास

जिस तरह से चुनावों की तारीख का ऐलान होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, उस लिहाज से सूबे के मुखिया की कुर्सी जाने या बने रहने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। लेकिन सियासी जानकारों की मानें तो अखिलेश बहुमत साबित करने की आड़ में पार्टी पर अपनी पकड़ का एहसास करा सकते हैं।

जिस तरह से चुनावों की तारीख का ऐलान होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, उस लिहाज से सूबे के मुखिया की कुर्सी जाने या बने रहने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। लेकिन सियासी जानकारों की मानें तो अखिलेश बहुमत साबित करने की आड़ में पार्टी पर अपनी पकड़ का एहसास करा सकते हैं।

जिस तरह से चुनावों की तारीख का ऐलान होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, उस लिहाज से सूबे के मुखिया की कुर्सी जाने या बने रहने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। लेकिन सियासी जानकारों की मानें तो अखिलेश बहुमत साबित करने की आड़ में पार्टी पर अपनी पकड़ का एहसास करा सकते हैं।

अधिक पढ़ें ...
नई दिल्‍ली। जिस तरह से चुनावों की तारीख का ऐलान होने में कुछ ही दिन बाकी हैं, उस लिहाज से सूबे के मुखिया की कुर्सी जाने या बने रहने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला है। लेकिन सियासी जानकारों की मानें तो अखिलेश बहुमत साबित करने की आड़ में पार्टी पर अपनी पकड़ का एहसास करा सकते हैं। और ऐसा करना उनके लिए कोई मुश्‍किल भी नहीं दिख रहा है। अखिलेश और शिवपाल की सूची पर गौर करें तो सिटिंग एमएलए की संख्‍या में मामूली सा फेरबदल है। वहीं कांग्रेस और रालोद संग गठबंधन की चर्चाओं पर भरोसा करते हैं तो 37 और विधायकों का समर्थन भी अखिलेश को मिल सकता है।

सपा में शह-मात का खेल अब जोर-शोर से खेला जा रहा है। सियासी बिसात पर लगातार चाल चली जा रही हैं। एक बड़ी चाल चलकर सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव खेल को परिणाम की ओर ले गए हैं। सियासी जानकारों की मानें तो परिणाम तो खैर एक जनवरी को होने वाला राष्‍ट्रीय अधिवेशन तय करेगा। लेकिन परिणाम की भूमिका रचना शुरू हो गई है। इसकी शुरुआत शनिवार को सीएम अखिलेश यादव कर सकते हैं। अंदरखाने चल रही उठा-पटक पर गौर करें तो विधायकों संग बैठक करने के बाद अखिलेश राज्‍यपाल को सरकार चलाने के लिए बहुमत के संबंध में विधायकों की फेहरिस्‍त सौंप सकते हैं।

इसके लिए अखिलेश के पास विधायकों का वो जादुई आंकड़ा भी मौजूद हैं। अगर सबसे पहले हम गुरुवार को प्रदेश अध्‍यक्ष शिवपाल यादव और अखिलेश यादव की सूची पर गौर करें तो दोनों की सूची में सिटिंग विधायकों की संख्‍या में सिर्फ और सिर्फ पांच विधायकों के नाम का अंतर है। अखिलेश की सूची में जहां सिटिंग विधायकों की संख्‍या 171 है तो शिवपाल की सूची में वो संख्‍या 176 है। अभी यहां उन विधायकों की संख्‍या शामिल नहीं है जिन्‍हें अखिलेश ने सूची में जगह नहीं दी है, लेकिन वो अखिलेश के इस फैसले से नाखुश नहीं है।

अब जरा एक निगाह उन दो पार्टी के विधायकों पर भी डाल लेते हैं जिनके साथ गठबंधन की बातचीत चल रही है। सूबे में कांग्रेस के पास 28 तो रालोद के पास नौ विधायक हैं। इस लिहाज से अखिलेश बहुमत साबित करने के मामले में कहीं से भी कमजोर नजर नहीं आ रहे हैं। अब ये तो आने वाला वक्‍त ही बताएगा कि विधायकों की ये संख्‍या अखिलेश के लिए कितनी लकी साबित होती है, लेकिन सबकी निगाह एक जनवरी को होने वाले राष्‍ट्रीय अधिवेशन पर रहेगी।

Tags: Akhilesh yadav, Congress, Rld

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर