धार्मिक तनाव वाले इलाके में इन अल्पसंख्यकों पर कभी नहीं आई आंच, ये नहीं बनते चुनावी मोहरा!

धार्मिक तनाव वाले इलाके में इन अल्पसंख्यकों पर कभी नहीं आई आंच, ये नहीं बनते चुनावी मोहरा!
मुजफ्फरनगर दंगों और उसके बाद हिंदू-मुस्‍लिमों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रहे पश्‍चिमी उत्‍तर का सरधना इलाका सौहार्द की एक मिसाल पेश कर रहा है.

मुजफ्फरनगर दंगों और उसके बाद हिंदू-मुस्‍लिमों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रहे पश्‍चिमी उत्‍तर का सरधना इलाका सौहार्द की एक मिसाल पेश कर रहा है.

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सरधना। मुजफ्फरनगर दंगों और उसके बाद हिंदू-मुस्‍लिमों के बीच तनाव की वजह से सुर्खियों में रहे पश्‍चिमी उत्‍तर का सरधना इलाका सौहार्द की एक मिसाल पेश कर रहा है. इन दो धर्मों के बीच भले ही सियासत की वजह से दीवार बनाने की कोशिश की गई हो, लेकिन इसाईयों को लेकर कभी कोई तनाव नहीं हुआ.

इस वक्‍त सरधना के विधायक संगीत सोम अपने विवादित बयानों और तनाव की वीडियो की वजह से फिर चर्चा में हैं वहीं उन्‍हीं के शहर में 1822 ईस्‍वी में बने रोमन कैथोलिक चर्च और यहां के इसाईयों पर कभी कोई आंच नहीं आई. इस शहर में करीब 350 परिवार इसाईयों के बताए गए हैं.

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न्‍यूज18 इंडिया हिंदी डॉटकॉम की टीम अपने चुनावी दौरे के वक्‍त इस ऐतिहासिक चर्च पहुंची. चर्च में कार्यरत रॉकी नामक शख्‍स ने बताया कि दंगा तो मुजफ्फरनगर में हुआ था लेकिन संगीत सोम के बयानों ने इस शहर की भी इमेज नकारात्‍मक बना दी. जबकि यहां कभी भी तनाव नहीं हुआ. संगीत सोम चर्च से कुछ ही दूरी पर रहते हैं.
रॉकी कहते हैं कि दक्षिण भारत में मिशनरियों पर हमलों की घटनाएं तो होती हैं लेकिन यहां पर सैकड़ों साल से ऐसा कुछ नहीं हुआ. यहां के इसाईयों ने कभी असुरक्षा महसूस नहीं की. हालांकि राजनीतिक कारणों से इस क्षेत्र में हिंदुओं-मुस्‍लिमों के बीच तनाव का माहौल बनाने की कोशिश होती रहती है.

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रॉकी बताते हैं कि वैसे तो यहां के इसाई पारंपरिक तौर पर कांग्रेस के साथ रहते थे लेकिन 2014 में उन्‍होंने बीजेपी को सपोर्ट किया था. क्‍योंकि विकल्‍प नहीं था. यहां के ज्‍यादातर इसाई शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं. उनके दो बड़े शैक्षिक संस्‍थान सेंट जोसेफ वूमेन डिग्री कॉलेज और सेंट चार्ल्‍स ब्‍वायज कॉलेज हैं. राजनीति में उनका कोई रुझान नहीं है.

रॉकी बताते हैं कि यहां कभी धर्म परिवर्तन की कोई घटना भी सामने नहीं आई. किसी को इसाईयों के खिलाफ बोलने का कभी मौका नहीं मिला. हिंदू-मुस्‍लिम बहुल इस क्षेत्र में चर्च का निर्माण सरधना की महारानी रहीं बेगम फरजाना योहान्‍ना समरू ने करवाया था. भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण की सूची में यह चर्च संरक्षित स्‍मारक है.

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उत्‍तर भारत के सबसे बड़े कैथोलिक चर्चों में से एक है यह

इटैलियन निर्माण कला के बेहतरीन नमूने के रूप में मशहूर इस चर्च का निर्माण सन् 1809 में शुरू हुआ था और 1822 में पूरा हुआ. उस वक्‍त इस चर्च के बनने में करीब चार लाख रुपये खर्च हुए थे. इसका डिजाइन इटैलियन आर्किटैक्ट 'एंथनी रेगलिनी' ने तैयार किया था. यह कैथोलिक चर्च उत्तर भारत में स्थित सबसे बड़े चर्चों में से एक है.
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