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बागी बिगाड़ सकते हैं चुनावी खेल, 7 प्रतिशत वोट से बने-बिगड़ेंगे समीकरण

बागी बिगाड़ सकते हैं चुनावी खेल, 7 प्रतिशत वोट से बने-बिगड़ेंगे समीकरण

यूपी और उत्‍तराखण्‍ड में बागी सुर बड़ी राजनीतिक पार्टियों के खेल बिगाड़ सकते हैं. अलग-अलग पार्टियों के ये बागी कभी अपनी पार्टियों के खैरख्‍वाह हुआ करते थे. लेकिन आज सियासी मैदान में आमने-सामने आकर ताल ठोंक रहे हैं. कल तक हाथ और कमल का प्रचार कर रहे थे तो आज निर्दलीय होकर अपने नाम और चेहरे पर वोट मांग रहे हैं.

यूपी और उत्‍तराखण्‍ड में बागी सुर बड़ी राजनीतिक पार्टियों के खेल बिगाड़ सकते हैं. अलग-अलग पार्टियों के ये बागी कभी अपनी पार्टियों के खैरख्‍वाह हुआ करते थे. लेकिन आज सियासी मैदान में आमने-सामने आकर ताल ठोंक रहे हैं. कल तक हाथ और कमल का प्रचार कर रहे थे तो आज निर्दलीय होकर अपने नाम और चेहरे पर वोट मांग रहे हैं.

यूपी और उत्‍तराखण्‍ड में बागी सुर बड़ी राजनीतिक पार्टियों के खेल बिगाड़ सकते हैं. अलग-अलग पार्टियों के ये बागी कभी अपनी पार्टियों के खैरख्‍वाह हुआ करते थे. लेकिन आज सियासी मैदान में आमने-सामने आकर ताल ठोंक रहे हैं. कल तक हाथ और कमल का प्रचार कर रहे थे तो आज निर्दलीय होकर अपने नाम और चेहरे पर वोट मांग रहे हैं.

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यूपी और उत्‍तराखण्‍ड में बागी सुर बड़ी राजनीतिक पार्टियों के खेल बिगाड़ सकते हैं. अलग-अलग पार्टियों के ये बागी कभी अपनी पार्टियों के खैरख्‍वाह हुआ करते थे. लेकिन आज सियासी मैदान में आमने-सामने आकर ताल ठोंक रहे हैं. कल तक हाथ और कमल का प्रचार कर रहे थे तो आज निर्दलीय होकर अपने नाम और चेहरे पर वोट मांग रहे हैं. सियासी जानकार भी मानते हैं कि ऐसे बागी उम्‍मीदवार सात से आठ प्रतिशत तक वोट को प्रभावित करते हैं.

उत्तराखंड में बागियों को खूब बंटे टिकट

उत्‍तराखण्‍ड में बागी होकर टिकट पाने वालों की सबसे बड़ी सूची भाजपा की है. वहीं यूपी में भी ये नम्‍बर छोटा नहीं है. बात सबसे पहले उत्‍तराखण्‍ड की करते हैं. यहां कांग्रेस ने भाजपा के सात बागियों को टिकट दिया है. वहीं कांग्रेस से बगावत करके आए 14 लोगों को भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा है. यहां तक कि सुबह कांग्रेस छोड़ भाजपा का झंडा थामने वाले यशपाल आर्य को शाम होते-होते बाजपुर और उनके बेटे संजीव आर्य को नैनीताल से टिकट दे दिया गया है. सियासी जानकार बताते हैं कि आर्य कुमाऊं में कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं. कुमाऊं आर्य का गढ़ बताया जाता है.

हालांकि चुनावों से पहले हुई तख्‍तापलट की कोशिश के दौरान आर्य सीएम हरीश रावत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हुए थे, लेकिन एक परिवार से एक टिकट की हरीश रावत की मंशा को भांपकर आर्य ने ये दांव खेल दिया. ऐसे ही भाजपा ने कांग्रेस के बागी हरक सिंह रावत को कोटद्वार से टिकट दिया है. कांग्रेस ने यहां सुरेन्‍द्र नेगी को टिकट दिया है. इसी सीट पर कांग्रेस के सुरेन्‍द्र नेगी ने भाजपा के भुवन चंद खंडूरी को शिकस्‍त दी थी, लेकिन अब उनका मुकाबला कभी अपने रहे हरक सिंह से होगा.

हरक सिंह कहते हैं कि वह उत्‍तराखण्‍ड में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कराकर सीएम हरीश रावत का अहंकार तोड़ेंगे। भाजपा के लिए भी बागियों की बनाई राह आसान नहीं होगी. भाजपा के बागी शैलेन्‍द्र रावत कांग्रेस से टिकट पा चुके हैं और अब भाजपा के लिए मुश्‍किल पैदा कर सकते हैं. कांग्रेस ने उन्‍हें यमकेश्‍वर सीट से टिकट दिया है. जानकार बताते हैं कि पहले कोटद्वार और यमकेश्‍वर सीट एक ही थी, लेकिन परिसीमन के बाद अलग-अलग हो गईं. लेकिन दोनों ही जगह शैलेन्‍द्र की अच्‍छी पकड़ बताई जाती है. यमकेश्‍वर में उनकी ससुराल भी है. वहीं भाजपा के लिए परेशानी ये है कि यहां से भाजपा की टिकट पर भुवन चंद खंडूरी की बेटी रीतू खंडूरी चुनाव लड़ रही हैं.

द स्‍टाडी ऑफ सोसाइटी एण्‍ड पॉलीटिक्‍स के निदेशक एके वर्मा बताते हैं कि इस तरह के उम्‍मीदवार किसी भी पार्टी को सात से आठ प्रतिशत वोट का नुकसान पहुंचाते हैं. ये वोट उम्‍मीदवारों के अपने संबंधों और चेहरे वाला वोट होता है. लेकिन ये छोटा सा दिखने वाला वोट बैंक उस वक्‍त बड़ा काम कर जाता है जब बागी उम्‍मीदवार सत्‍ता की दौड़ में शामिल पार्टी से जा मिलता है. बागी के निर्दलीय रहने पर ये वोट कोई खास असर नहीं डाल पाता है.

बागियों से यूपी में भी हाल से बेहाल हैं पार्टियां

अपनों की बगावत से यूपी भी अछूता नहीं है. उत्‍तराखण्‍ड में कांग्रेस और भाजपा के पसीने छूट रहे हैं तो यूपी में सपा भी इस फेहरिस्‍त में शामिल हो जाती है. यूपी में ऐसे भी बागी हैं जो एक साथ दो-दो पार्टियों को नुकसान पहुंचाएंगे. सियासी जानकार डॉ. मोहम्‍मद अरशद बताते हैं कि यहां कुछ ऐसे भी लोग हैं जो जिन्‍होंने अपनी पुरानी पार्टी को छोड़कर नई पार्टी में इसलिए आस्‍था जताई थी कि चुनाव में यहां से टिकट मिल जाएगा. लेकिन उनकी टिकट की मनोकामना दूसरी जगह भी पूरी नहीं हो सकी.

आगरा में उत्‍तरी सीट पर कवि गोपालदास नीरज की पुत्री कुंदनिका शर्मा ने भाजपा छोड़कर सपा से टिकट हासिल कर लिया था. सपा की पहली सूची में उनका नाम था. लेकिन ऐन वक्‍त पर सपा ने उनका टिकट काट दिया. इसी तरह से फतेहाबाद से बसपा विधायक छोटेलाल वर्मा ने भाजपा ज्‍वाइन कर ली थी. लेकिन उन्‍हें भी आखिरी मौके पर भाजपा से टिकट नहीं मिली. कांग्रेस और सपा के मामले में गठबंधन के चलते बहुत सारे नेता बागी होकर निर्दलीय ताल ठोंक रहे हैं. इसमें फिरोजाबाद की जसराना सीट से डॉ. रामगोपाल यादव के नजदीकी टिकट न मिलने की वजह से निर्दलीय लड़ रहे हैं.

कांग्रेस से भाजपा में आईं रीता बहुगुणा लखनऊ में अपनी पुरानी पार्टी को टक्‍कर देंगी. सपा के ही अंबिका चौधरी ने बसपा से टिकट हासिल कर परेशानी बढ़ा दी है. बेनी प्रसाद वर्मा भी सपा की मुश्‍किलें बढ़ा रहे हैं. नए-नए भाजपा में आए बसपा के पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक भी परेशानी का सबब बनेंगे. कभी बसपा के खासमखास रहे स्वामी प्रसाद मौर्य खुद भी बेटे संग बसपा के खिलाफ बिगुल फूंक रहे हैं. अपनी पार्टी का विलय करने के बाद भी अंसारी परिवार सपा से बड़े बेआबरू होकर निकले हैं. अब बसपा के झंडे तले उन्‍होंने सपा को सबक सिखाने का खुला ऐलान कर दिया है.

मुख्‍तार अंसारी के भाई अफजल अंसारी का कहना है कि सपा ने हमारे ही नहीं मुसलमानों के साथ भी धोखा किया है. इस बात को हम खासतौर से इस चुनाव में तो भूलने वाले नहीं हैं. अलीगढ़ में सपा के मौजूदा विधायक हाजी जमीरउल्‍लाह टिकट कटने से बागी हो गए हैं. उन्‍होंने निर्दलीय नामांकन पत्र भर दिया है.

Tags: BJP, BSP, Congress, Samajwadi party

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