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सपा की तरफ आधे रास्ते जाकर रुके अजित सिंह, अब BSP से दोस्ती के मूड में, मिले ये संकेत

नासिर हुसैन | News18India.com
Updated: September 5, 2016, 7:27 AM IST
सपा की तरफ आधे रास्ते जाकर रुके अजित सिंह, अब BSP से दोस्ती के मूड में, मिले ये संकेत
File Photo

चर्चा है बसपा सुप्रीमो मायावती और रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के बीच घटती दूरियों की। चर्चाओं पर भरोसा करें तो जल्‍द ही दोनों एक मंच पर नजर आ सकते हैं।

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नई दिल्‍ली। उत्‍तर प्रदेश के सियासी गलियारों में एक नई चर्चा बहुत तेजी से जोर पकड़ रही है। अगर सब कुछ चर्चाओं के मुताबिक होता है तो आगामी विधानसभा चुनावों की सियासत नया मोड़ ले सकती है। दूसरी पार्टियों को अपनी रणनीति बदलने को मजबूर भी कर सकती है। यह चर्चा है बसपा सुप्रीमो मायावती और रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के बीच घटती दूरियों की। चर्चाओं पर भरोसा करें तो जल्‍द ही दोनों एक मंच पर नजर आ सकते हैं। आजकल बसंत कुंज नोएडा में चल रही हलचल भी कुछ ऐसा ही इशारा कर रही है।

जैसे-जैसे यूपी के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे ही उम्‍मीदवारों के साथ-साथ पार्टियों के बीच भी उठापटक शुरू हो गई है। ताजा चर्चाओं पर गौर करें तो बसपा सुप्रीमो मायावती और रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत शुरू हो गई है। दोनों मिलकर एक साथ आगामी चुनाव लड़ सकते हैं। 10 से 15 सितम्‍बर तक इसकी घोषणा भी हो सकती है। गठबंधन से जुड़ी शर्तें भी लगभग तय हो चुकी हैं। चर्चा तो यह भी है कि बसपा के एक पूर्व कैबिनेट मंत्री और चौधरी अजित सिंह के एक करीबी रिश्‍तेदार के जरिए यह बातचीत हो रही है।

यह हो सकती हैं गठबंधन की शर्तें: गठबंधन पश्‍चिमी उप्र की 140 सीट को लेकर है। शर्तों के मुताबिक रालोद पश्‍चिमी उप्र में 38 सीट पर चुनाव लड़ेगी। अभी तक रालोद करीब 40 सीट पर चुनाव लड़ती रही है। गठबंधन के तहत रालोद को आगरा की दयालबाग, एत्‍मादपुर और फतेहपुर सीकरी सीट छोड़नी पड़ सकती है। रालोद तीनों ही सीट को अपने लिए मजबूत बताती आई है। जबकि मौजूदा वक्‍त में तीनों ही सीट बसपा के कब्‍जे में हैं।

दूसरी शर्त यह कि पश्‍चिमी उप्र की जिम्‍मेदारी जयंत चौधरी के हाथों में होगी। इस शर्त पर मुहर इस तरह से भी लग जाती है कि पांच सितम्‍बर से रालोद एक अभियान शुरू करने जा रही है। अभियान के तहत पांच सितम्‍बर को जयंत बागपत में तीन जनसभाओं को संबोधित करेंगे। तीसरी शर्त यह कि प्रदेश विभाजन यानी नया राज्‍य हरित प्रदेश बनाने पर दोनों पार्टियों की एक ही राय होगी।

अभी तक रालोद से दूरी बनाती आई है बसपा: जानकारों की मानें तो गठबंधन के नाम पर अभी तक बसपा रालोद से दूरी बनाती आई है। इसके पीछे कारण जाटव और जाटों के बीच 36 के आंकड़े को बताया जाता है। लेकिन राजनीति किससे, कब और कहां, क्‍या करा दे कुछ कहा नहीं जा सकता है। कहा जाता है कि राजनीति में पावर के लिए कभी भी कुछ भी हो सकता है।

क्‍या ब्राह्मणों का विकल्‍प बन सकते हैं जाट वोटर: चर्चा तो यह भी है कि बसपा खुद भी रालोद के साथ गठबंधन के लिए ज्‍यादा दिलचस्‍पी दिखा रही है। इसके पीछे एक मात्र ठोस वजह यह बताई जा रही है कि मौजूदा वक्‍त में ब्राह्मण बसपा से नाराज चल रहा है। इसी कमी को पूरा करने के लिए बसपा रालोद की ओर उम्‍मीद भरी निगाहों से देख रही है। वहीं पश्‍चिमी उप्र में जाटों के बीच रालोद के वजूद को नकारा भी नहीं जा सकता।

सपा से नहीं मिली गठबंधन की हरी झंडी: सूत्रों की मानें तो अभी कुछ महीने पहले तक रालोद और सपा के बीच गठबंधन को लेकर चर्चाएं चल रहीं थी। खुद शिवपाल सिंह यादव और मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन में दिलचस्‍पी दिखाई थी। सभी कुछ सही तरीके से तय होने जा रहा था, लेकिन इसी बीच सीएम अखिलेश यादव और रामगोपाल की नाराजगी ने गठबंधन की कोशिशों को पीछे धकेल दिया। और उसके बाद से फिर कोई नई चर्चा सामने नहीं आई है।
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क्‍या भाजपा को नहीं रही रालोद की जरूरत: बताया जाता है कि एक वक्‍त था जब रालोद और भाजपा की अच्‍छी बनती थी। वर्ष 2009 में दोनों के बीच गठबंधन भी हुआ था। गठबंधन के तहत ही रालोद के पांच सांसद जीतकर आए थे। जबकि 2002 के यूपी विधानसभा चुनावों में 14 सीट पर जीत हासिल की थी। सूत्रों की मानें तो मुज़फ्फरनगर दंगों के बाद से जाट वोट और भाजपा के बीच की तस्‍वीर बदल चुकी है। 2014 के चुनावों में भी भाजपा बदली हुई तस्‍वीर के रंग देख चुकी है। शायद उसी चलते भाजपा को नहीं लगता कि उसे रालोद की कोई बहुत ज्‍यादा जरूरत रह गई है।

कांग्रेस भी कह चुकी है साफ-साफ दो टूक: सूत्रों की मानें तो राज्‍यसभा जाने के रास्‍ते को आसान बनाने के लिए रालोद मुखिया सोनिया गांधी से मिले थे। राज्‍यसभा भेजे जाने की शर्त पर 2017 के चुनावों में गठबंधन की बात रखी थी। लेकिन पिछले अनुभवों को देखते हुए कांग्रेस ने रालोद संग गठबंधन को दो टूक साफ-साफ बोल दिया।

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First published: September 5, 2016, 7:27 AM IST
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