#UPvotes: सिर्फ अखलाक ही नहीं ये भी है बिसाहड़ा का दर्द, इसलिए नेताओं से हुई 'नफरत'

#UPvotes: सिर्फ अखलाक ही नहीं ये भी है बिसाहड़ा का दर्द, इसलिए नेताओं से हुई 'नफरत'
अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर चर्चा में आए गौतमबुद्ध नगर के बिसाहड़ा गांव के जख्‍म को सत्‍ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी तरह से बेचा. न जाने कितने लोगों ने अवार्ड लौटाए. लेकिन कभी उन मसलों की ओर ध्‍यान नहीं दिया जिनका सरोकार यहां के आम लोगों की जिंदगी से है.

अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर चर्चा में आए गौतमबुद्ध नगर के बिसाहड़ा गांव के जख्‍म को सत्‍ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी तरह से बेचा. न जाने कितने लोगों ने अवार्ड लौटाए. लेकिन कभी उन मसलों की ओर ध्‍यान नहीं दिया जिनका सरोकार यहां के आम लोगों की जिंदगी से है.

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’टूटी सड़कें, बजबजाती नालियां, कूड़े का अंबार और युवाओं की बेरोजगारी भी बिसाहड़ा गांव का दर्द है. हम उस बिसाहड़ा की बात कर रहे हैं जहां 28 सितंबर 2015 को अखलाक नामक व्‍यक्‍ति की हत्‍या के बाद राजनीतिक तवे पर रोटियां सेंकने राहुल गांधी से लेकर अरविंद केजरीवाल और महेश शर्मा, संगीत सोम से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक आए थे.

अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर चर्चा में आए गौतमबुद्ध नगर के बिसाहड़ा गांव के जख्‍म को सत्‍ता और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी तरह से बेचा. न जाने कितने लोगों ने अवार्ड लौटाए. लेकिन कभी उन मसलों की ओर ध्‍यान नहीं दिया जिनका सरोकार यहां के आम लोगों की जिंदगी से है. न्‍यूज18हिंदी डॉटकॉम की टीम जब इस गांव में पहुंची तो इस लोगों का दर्द छलक पड़ा.

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निजी कंपनी में काम करने वाले संजय कुमार कहते हैं कि उनका हाथ खराब सड़क में गिरने से टूट गया है. नेताओं ने गांव की एक घटना को अपना औजार बनाया, लेकिन इसकी किसी भी समस्‍या का समाधान नहीं किया. किसी ने मुड़कर नहीं देखा कि यहां की सड़कें इतनी खराब हैं कि लोग गिरकर घायल हो रहे हैं. नेताओं ने तो सिर्फ इस गांव में नफरत बोई और कोई काम नहीं किया. इसलिए यहां ज्‍यादातर लोगों का नेताओं के लिए यही संदेश है कि वह यहां विकास का वादा करें तो ही हम उन्‍हें वोट देंगे.
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इसी गांव के जोगेंद्र शर्मा कहते हैं कि यहां करीब 15 हजार की आबादी है लेकिन एक भी प्राथमिक चिकित्‍सा केंद्र नहीं है. डिलीवरी के लिए ऊबड़-खाबड़ सड़क से महिलाओं को ले जाना पड़ता है. सब इस गांव के अखलाक हत्‍याकांड की चर्चा दिल्‍ली में बैठकर तो करते हैं लेकिन यहां की जन समस्‍याओं के समाधान के लिए न तो सांसद ने काम किया, न ही विधायक ने. किसी ने अपना अवार्ड भी नहीं लौटाया.

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गांव के पूर्व प्रधान भाग सिंह कहते हैं कि सच तो यह है कि इस गांव के लोग नेताओं से खिन्‍न हैं. वह उन्‍हें इस चुनाव में सबक सिखाना चाहते हैं. कुछ लोग कह रहे हैं चुनाव का बहिष्‍कार होगा. लेकिन अभी हम मिल बैठकर तय करेंगे कि उन्‍हें कैसे जवाब देना है.

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मुस्‍लिम मोहल्‍ले में रहने वाले सिराजुददीन कहते हैं वह चुनाव का बहिष्‍कार करेंगे क्‍योंकि नेताओं ने सिर्फ इस गांव को लेकर सियासत की है, लोगों को लड़या है, दिलों में दूरियां पैदा की है..
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