बठिंडा में कृषि अध्यादेश के खिलाफ आंदोलन, 17 साल की लड़की ने संभाली ट्रैक्टर मार्च की कमान
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बठिंडा में कृषि अध्यादेश के खिलाफ आंदोलन, 17 साल की लड़की ने संभाली ट्रैक्टर मार्च की कमान
इस रैली को राज्यभर से 13 किसान यूनियनों का समर्थन हासिल था, जिसमें भारतीय किसान यूनियन (उग्रहण) और बीकेयू (दकौन्दा) शामिल हैं. (ANI)

पंजाब (Punjab) के बठिंडा के मेह्मा भगवाना गांव की रहने वाली बलदीप कौर (Baldeep Kaur) ने हाल ही में कक्षा 10 का इम्तिहान 85% अंकों से पास किया है. सोमवार को ये रैली हुई. इस दौरान बलदीप ने अपनी दादी बलदेव कौर और परिवार के अन्य सदस्यों को टैक्टर में बैठा कर रैली का नेतृत्व किया.

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बठिंडा. पंजाब में किसान मजदूर और यहां तक कि राजनीतिक दल भी सोशल मीडिया के जरिए सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, लेकिन इसका कोई खास नतीजा नहीं निकल रहा है. ऐसे में बठिंडा की एक 17 साल की लड़की बलदीप कौर ने केंद्र सरकार द्वारा किसान व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, मूल्य आश्वासन और फार्म सेवा अध्यादेश और आवश्यक वस्तु (संशोधन) अध्यादेश पर किसान (सशक्तीकरण और संरक्षण) समझौता का विरोध करने के लिए टैक्टर मार्च का नेतृत्व कर रही है.

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, बठिंडा के मेह्मा भगवाना गांव की रहने वाली बलदीप कौर ने हाल ही में कक्षा 10 का इम्तिहान 85% अंकों से पास किया है. सोमवार को ये रैली हुई. इस दौरान बलदीप ने अपनी दादी बलदेव कौर और परिवार के अन्य सदस्यों को टैक्टर में बैठा कर रैली का नेतृत्व किया. इस रैली को राज्यभर से 13 किसान यूनियनों का समर्थन हासिल था, जिसमें भारतीय किसान यूनियन (उग्रहण) और बीकेयू (दकौन्दा) शामिल हैं.

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बलदीप कौर कहती हैं, 'मेरे दादा-दादी नियमित तौर पर किसान यूनियन के धरने प्रदर्शन में हिस्सा लिया करते थे. मैं हमेशा उनसे प्रेरणा पाती रही हूं. इस बार सुना कि ट्रैक्टर रैली होने जा रही है, तो मैंने भी इसमें हिस्सा लेने का मन बना लिया. ट्रैक्टर चलाने का काम तो मैंने सैकड़ों बार अपने खेतों में किया है. यह पहली बार है जब मैंने अपने गांव से 19 किमी दूर बठिंडा तक की यात्रा ट्रैक्टर खुद से चलाकर की हो. और जब गांव के सभी बुजुर्ग आपका अनुसरण कर रहे हों, तो ये अपने आप में बड़ी बात हो जाती है.'
रिपोर्ट के मुताबिक, सूबे के तकरीबन 50 से अधिक स्थानों के 10 हजार किसान इस रैली में शामिल हुए. इसमें लुधियाना, मोंगा, मुक्तसर, फगवाडा और होशियारपुर के किसान ज्यादा की संख्या में थे. बलदीप कौर ने बताया- 'ये अध्यादेश किसान विरोधी हैं. हम पहले से ही घाटे में हैं और सरकार कल को हमसे हमारे खेती करने के अधिकार को ही छीनने और कृषि क्षेत्र में कॉर्पोरेट को लाने की तैयारी में है. डीजल-पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने पहले से ही हमें मुसीबतों से घेर रखा है.'

बलदीप आगे बताती हैं, 'स्कूल से आने के बाद मेरा काम पिता के साथ खेतों में हाथ बंटाने का होता है. अगर खेत में काम अधिक होता है तो कभी-कभी मुझे क्लास भी छोड़नी पड़ती है. धान की रोपाई के लिए मैंने धान के पौधों को तैयार करने का काम किया था. मैं पिता के साथ खेत जोतने, फसल काटने और यहां तक कि मंडी में फसल की बिक्री में मदद तक के लिए जाती हूं.'

बलदीप का कहना है, 'अपने पिता को मुश्किलों में देखते हुए मैंने मदद के बारे में ठान लिया था. मुझे मालूम है कि एक किसान को किन मुश्किलों के बीच से गुजरना होता है. चूंकि, मेरे दादा-दादी यूनियन का हिस्सा रहे हैं, इसलिए मैंने भी इसमें समर्थन देने का मन बना लिया.'

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वहीं, बलदीप के पिता जगसीर सिंह कहते हैं, 'अब बेटियों ने खेती पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. लड़कों को इनसे कुछ सबक सीखने की जरूरत है. मेरी बेटी खेती में मेरी काफी मदद करती है.' इस बीच गांव के एक किसान सुखजीवन सिंह बबली कहते हैं, 'एह साडे पिंड दी बेटी है…सानु मान है एस ते (यह हमारे गांव की बेटी है. हम सभी को इस पर गर्व है, जो नौजवान आज खेतीबाड़ी से भाग रहे हैं, उन सबके लिए यह बेटी किसी प्रेरणा से कम नहीं.'
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