पंजाब में 70 हजार फर्जी पेंशनधारक घोटाला मामले में सियासत तेज
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पंजाब में 70 हजार फर्जी पेंशनधारक घोटाला मामले में सियासत तेज
अमरिंदर सरकार पर विपक्ष का निशाना.

पंजाब सरकार (Punjab Government) ने ऐसे लोगों से 162.35 करोड़ रुपये वसूलने का आदेश दिया था जिसका इस्तेमाल असली लाभार्थियों को वित्तीय सहायता देने के लिए किया जाएगा.

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नई दिल्‍ली. पंजाब (Punjab) में फर्जी पेंशन लाभार्थियों (Fake Pension Scam) का मामला सामने आने के बाद सियासत तेज हो गई है. 162 करोड़ रुपये के इस घोटाले पर अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने कैप्‍टन अमरिंदर की कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है. अफसरों के अनुसार इस घोटाले की शुरुआत 2015 में हुई थी. उस समय हजारों की संख्‍या में फर्जी कागजात के लिए जरिये वृद्धावस्‍था पेंशन के लिए लोगों ने अप्‍लाई किया था. इसके साथ ही दिव्‍यांग और अन्‍य श्रेणी में भी आवेदन आए थे. सबसे अधिक फर्जी लाभार्थी संगरूर, बठिंडा, अमृतसर, मुक्‍तसर और मानसा में हैं.

इस फर्जी पेंशन घोटाले पर अकाली दल के प्रवक्‍ता डॉ. दलजीत चीमा ने कांग्रेस पर निशाना साधा. उन्‍होंने कहा इससे यह बात साफ कि अब 70 हजार परिवार बिना पेंशन के रहेंगे. यह कांग्रेस के उस दावे से अलग है, जिसमें उसकी योजना हर महीने 2500 रुपये पेंशन देने की थी. उन्‍होंने कहा कि सरकार इस घोटाले को पकड़ने में कामयाब रही, जो कि अकाली दल सरकार के समय में हुआ था. यही समय है जब दोषी अफसरों से भी इसकी वसूली हो.

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने शनिवार को कहा था कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे से 70,000 लाभार्थियों को बाहर किया गया है जो धोखे से वास्तविक लोगों के नाम पर फायदा उठा रहे थे. उन्‍होंने कहा था कि उन्होंने ऐसे लोगों से 162.35 करोड़ रुपये वसूलने का आदेश दिया था जिसका इस्तेमाल असली लाभार्थियों को वित्तीय सहायता देने के लिए किया जाएगा.



उन्होंने कहा था कि शिरोमणि अकाली दल-भाजपा की पूर्ववर्ती सरकार के समय धोखेबाजों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल रहा था, लेकिन वास्तव में उनकी (सिंह) सरकार आने के बाद अयोग्य व्यक्तियों को सूची से बाहर किया गया और छह लाख असली लाभार्थियों को सूची में जोड़ा गया.

सीएम ने कहा, 'ऐसा तब होता है जब राजनीतिक दल स्वार्थी हो जाते हैं और अपने हित साधने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल करते हैं.' उन्होंने कहा कि केवल अयोग्य लोगों को लाभार्थियों की सूची से बाहर किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन वर्षों में लाभार्थियों की संख्या 19 लाख से बढ़कर 25 लाख हो गई है.
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