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कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने कहा-अकाली सरकार ने 122 बिजली समझौतों पर किए बेवजह हस्ताक्षर

पंजाब सरकार ने कहा है कि अकाली सरकार ने 122 बिजली समझौतों पर बेवजह हस्ताक्षर किए हैं (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

पंजाब सरकार ने कहा है कि अकाली सरकार ने 122 बिजली समझौतों पर बेवजह हस्ताक्षर किए हैं (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) ने कहा है कि अकाली-भाजपा सरकार द्वारा हस्ताक्षर किए गए 139 ऐसे समझौतों (Agreements) में से सिर्फ 17 ही राज्य की बिजली संबंधी मांग पूरी करने के लिए काफी हैं.

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    चंडीगढ़. पंजाब में बिजली संकट के चलते अब कैप्टन सरकार (Captain Government) अकाली-भाजपा सरकार (Akali-BJP government) द्वारा किये गए बिजली खरीद समझौते (Power Purchase Agreement) की समीक्षा करने में जुट गई है. सरकार का कहना है कि जिन समझौतों के कारण राज्य पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है, उनकी रोकथाम के लिए जल्द ही कानूनी रणनीति का ऐलान किया जाएगा. मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) ने कहा है कि अकाली-भाजपा सरकार द्वारा हस्ताक्षर किए गए 139 ऐसे समझौतों (Agreements) में से सिर्फ 17 ही राज्य की बिजली संबंधी मांग पूरी करने के लिए काफी हैं और 1314 मेगावाट की महंगी बिजली खरीदने के लिए बाकी के 122 समझौतों पर बिना वजह हस्ताक्षर किए गए थे जिससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है.

    कैप्टन ने कहा कि लोगों को संयम के साथ बिजली का इस्तेमाल करने और थोड़े समय के लिए पैदा हुई बिजली की कमी को पूरा करने संबंधी सरकार का साथ देना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि 13500 मेगावाट की सप्लाई की तुलना में बीते हफ़्ते मांग 16000 मेगावाट तक पहुंच गई थी. उन्होंने बताया कि पी.एस.पी.सी.एल. ने तुरंत ही राज्य के बाहर से 7400 मेगावाट बिजली की खरीद करनी शुरू कर दी है जोकि बीते वर्ष की गई खरीद की अपेक्षा 1000 मेगावाट अधिक है. यदि खरीद की मात्रा तुरंत ही बढ़ाई न जाती तो राज्य को 1000 मेगावाट बिजली की और कमी का सामना करना पड़ सकता था जिससे बिजली संकट और गहरा जाता.

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    मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा संकट 660 मेगावाट बिजली पैदा करने वाले तलवंडी साबो पावर प्लांट के एक यूनिट फेल होने के के कारण पैदा हुआ है. उन्होंने कहा कि पी.एस.पी.सी.एल. द्वारा भारी जुर्माना लगाने के लिए प्लांट को पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया है, राज्य सरकार ने भी बिजली की किल्लत से निपटने के लिए अपने स्तर पर बड़े कदम उठाए जा रहे हैं.

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    उन्होंने कहा कि इन कदमों में पहली जुलाई से 7 जुलाई तक उद्योगों सहित लोहे की शीटें बनाने वाले कारखाने और बिजली पर चलने वाली भट्टियों के लिए हफ्ते में तीन दिन छुट्टी की गई है. उन्होंने कहा कि इन नियमों से सिर्फ जरूरी सेवाओं और निरंतर प्रक्रिया वाले उद्योगों को छूट दी गई है. इसके अलावा राज्य सरकार के दफ्तरों में ए.सी. के प्रयोग पर रोक लगाने के साथ-साथ 10 जुलाई तक कार्यालयों का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया गया है.

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