ईसाई धर्मगुरु बोले-'मैं जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए शर्मसार हूं, माफी मांगता हूं'

ब्रिटिश ईसाई धर्मगुरु आर्कबिशप ऑफ कैंटरबरी (Archbishop of Canterbury) जस्टिन वेलबी (Justin Welby) मंगलवार को जलियांवाला बाग मेमोरियल गए. वहां पर धर्मगुरु ने सिर झुकाकर भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि दी.

News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 7:35 PM IST
ईसाई धर्मगुरु बोले-'मैं जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए शर्मसार हूं, माफी मांगता हूं'
जस्टिन वेलबी कहा कि यहां पर जो अपराध हुआ था उसके लिए मैं शर्मसार हूं और माफी मांगता हूं.
News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 7:35 PM IST
अमृतसर. ब्रिटिश ईसाई धर्मगुरु आर्कबिशप ऑफ कैंटरबरी (Archbishop of Canterbury) जस्टिन वेलबी (Justin Welby) मंगलवार को जलियांवाला बाग मेमोरियल गए. वहां पर धर्मगुरु ने सिर झुकाकर भारतीय शहीदों को श्रद्धांजलि दी. इसके बाद उन्होंने कहा कि यहां पर जो अपराध हुआ था उसके लिए मैं शर्मसार हूं और माफी मांगता हूं. एक धर्मगुरु होने के नाते मैं इस त्रासदी पर बेहद दुखी हूं.

उन्होंने कहा कि मैं ब्रिटिश सरकार की तरफ से नहीं बोल सकता क्योंकि मैं कोई सरकारी अधिकारी नहीं हूं. लेकिन प्रभु यीशु की तरफ से जरूर बोल सकता हूं. उन्होंने लोगों को धन्यवाद दिया कि आपने लोगों ने शहीदों को याद रखा है. उन्होंने शहीदों की आत्मा की शांति के लिए संग्रहालय में प्रार्थना भी की.



विजिटर बुक में  जस्टिन वेलबी ने लिखा-इस जगह पर सौ साल पहले जो अत्याचार हुए वो बेहद शर्मसार कर देने वाले हैं. मैं शहीदों के रिश्तेदारों और उनके वंशजों के लिए प्रार्थना करता हूं. साथ ही इस बात के लिए भी भारत के उम्दा लोगों के साथ हमारे संबंध बेहतर हों. लेकिन यह प्रार्थना मुझे यह भी बताती है कि हमें इतिहास से सीखना होगा. अपने भीतर की नफरत को समाप्त करना होगा. वैश्विक शांति के लिए काम करना होगा.
Loading...

भारत यात्रा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह यात्रा मेरे लिए बेहद शिक्षा देने वाली है. मैं इसे कभी नहीं भूलूंगा. इस देश के लोगों ने दुनिया को जो कुछ दिया है मैं उसके लिए धन्यवाद देता हूं.

ये था जलियांवाला बाग कांड
साल 1919 में, भारत में ब्रिटिश हुकूमत ने क्रांतिकारी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए रोलेट ऐक्ट लेकर आने का फैसला किया था. ऐक्ट के मुताबिक, ब्रिटिश सरकार के पास शक्ति थी कि वह बिना ट्रायल चलाए किसी भी संदिग्ध को गिरफ्तार कर सकती थी या उसे जेल में डाल सकती थी. पंजाब में, दो मशहूर नेताओं डॉक्टर सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू को रोलेट ऐक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया. इस गिरफ्तारी के विरोध में कई प्रदर्शन हुए, रैलियां निकाली गईं. ब्रिटिश सरकार ने अमृतसर में मार्शल लॉ लागू कर दिया और सभी सार्वजनिक सभाओं, रैलियों पर रोक लगा दी.

13 अप्रैल 1919 के दिन, अमृतसर के जलियांवाला बाग में सिख बैसाखी पर्व पर इसके विरोध में एकत्र हुए थे. इस भीड़ में महिलाएं और बच्चे भी थे. जलियांवाला बाग की चारों तरफ बड़ी बड़ी दीवारें तब भी बनी हुई थी और तब वहां बाहर जाने के लिए सिर्फ एक मुख्य द्वार था और दो-तीन छोटी लेन ही थी. ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड एडवार्ड हैरी डायर यहां 50 बंदूकधारी सिपाहियों के साथ पहुंचे और बिना किसी पूर्व सूचना के गोली चलाने का आदेश दे दिया. यह फायरिंग 10 मिनट तक चलती रही. इसमें कई बेगुनाहों की जानें गई. लोग जान बचाने के लिए कुएं में कूद गए. मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी थे. लगभग 1650 राउंड की फायरिंग की गई थी. सरकारी आंकड़े में 379 मौत बताई गई जबकि कुछ निजी आंकड़ों में 1 हजार से भी अधिक मौतों की जानकारी दी गई.

इस हत्याकांड से देश और दुनिया में भूचाल आ गया. आक्रोश में आए देशवासियों ने बढ़ चढ़कर स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लिया. रबींद्रनाथ टैगोर ने विरोधस्वरूप अपनी उपाधि लौटा दी. इस घटना की जांच के लिए हंटर कमीशन बनाया गया.
ये भी पढ़ें:

अकाल तख्त को कमजोर बनाने की कोशिश कर रही है पंजाब सरकार: हरसिमरत कौर

प्रेमी के साथ भागी थी दो बच्चों की मां, अब खेत में लटके मिले दोनों के शव

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Amritsar से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 10, 2019, 6:10 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...