लाइव टीवी

अमृतसर रेल हादसे में दो बेटियों को खोने वाला महेन्द्र क्यों आज भी रोज शाम उसी रेल लाइन पर आकर बैठता है

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: October 8, 2019, 7:07 PM IST
अमृतसर रेल हादसे में दो बेटियों को खोने वाला महेन्द्र क्यों आज भी रोज शाम उसी रेल लाइन पर आकर बैठता है
ये ही वो ट्रेन थी जिसकी चपेट में आकर 61 लोगों की मौत हो गई थी. (File Photo)

महेन्द्र आज रेलवे लाइन (Railway Track) के किनारे इसलिए आकर बैठता कि उसकी बेटियों (daughters) के साथ जो हुआ वो अब उस इलाके के किसी और बच्चे के साथ न हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 8, 2019, 7:07 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. 5 और 8 साल की दो बेटियों को गवांने के बाद आज भी महेन्द्र, अमृतसर (Amritsar) को नहीं छोड़ पा रहा है. बच्चों के बिना पति-पत्नी को किराए का घर अब काटने को दौड़ता है. वैसे तो पत्नी शीला की निगाह पति पर ही रहती है कि वो रेल लाइन (Railway Track) के किनारे न जाए, लेकिन पत्नी की निगाह बचाकर महेन्द्र पहुंच ही जाता है. अब तो पत्नी भी सिर्फ दिखावे के लिए ही टोकती है. क्योंकि महेन्द्र जो कर रहा है उससे कहीं न कहीं अब पत्नी भी खुश है. हाल ही में न्यूज18 हिन्दी ने महेन्द्र से बात कर उनके दर्द को साझा करने की एक कोशिश की.

महेंद्र ने कहा, 'मैं पिछले 11 साल से अमृतसर में रहकर सुपरवाइजर की प्राइवेट नौकरी कर रहा हूं. मेरी दोनो बेटियों तान्या और कोमल का जन्म मेरे इसी किराए के मकान (मकान की तरफ इशारा करते हुए) में हुआ था. उस दिन मैं भी दोनों बेटियों को जलता हुआ रावण दिखाने के लिए ले गया था, लेकिन खाली हाथ घर लौटा था. बेटियां लाश के उन लोथड़ों में गुम हो गईं थी.'

महेंद्र ने आगे बताया, "10-15 दिन तक क्या हुआ और क्या नहीं हम पति-पत्नी को कोई होश नहीं रहा. एक महीने तक तो काम में भी मन नहीं लगा. जाता था और 2-3 घंटे बाद ही लौट आता था. रेलवे ने भी घटना से सबक लेते हुए उस एरिया में कोई इंतजाम नहीं किए हैं. पास के मकानों में रहने वाले बच्चे आज भी रेलवे लाइन के किनारे ही खेलते हैं. इस लाइन पर शाम के वक्त ही ट्रेन ज्यादा निकलती हैं.

ट्रेन की इस बोगी ये हालत बता रही है कि हादसा कितना वीभत्स था. (File Photo)


इसलिए फैक्ट्री से आने के बाद रेलवे लाइन के किनारे आकर बैठ जाता हूं. वहां खेलने वाले बच्चों पर निगाह रखता हूं. अगर कोई पटरियों पर आने की कोशिश करता है तो उसे भगा देता हूं. बच्चों के घर वाले भी बेफिक्र हो गए हैं कि चलो महेन्द्र भाई हैं तो कोई डर नहीं है. अब तो ये रोज का ही नियम हो गया है. लेकिन शुरु में जानने वालों को लगा कि मैं पागल हो गया हूं. उन्होंने 5 महीने बाद वो घर बदलवा दिया. वहां से 8-10 किमी दूर दिला दिया. लेकिन दिल तो वहीं लगा रहता था.

डर लगता कि कहीं खेलते हुए फिर किसी बच्चे को कुछ न हो जाए. फिर भी मैं बीच-बीच में पत्नी से बचकर आ जाता था. एक बार तो रेलवे पुलिस ने पकड़ लिया. उन्हें लगा कि शायद मैं आत्महत्या करने आया हूं. लेकिन जब मैंने पूरी बात बताई तो छोड़ दिया. सही बताऊं तो मेरा मन, नए मकान में कभी लगा ही नहीं.

15-20 दिन बाद ही मैं पुराने मकान मालिक के पास पहुंच गया. मैंने मकान मालिक से विनती की तो दोबारा से मकान किराए पर मिल गया, लेकिन मेरी पत्नी ज़िद करके आज उस रेलवे लाइन से दूर अपने जीजा के घर ले आई है.”
Loading...

ये भी पढ़ें-

दुश्मन के खिलाफ देश के इन 22 नेशनल हाइवे का इस्तेमाल करेगी Indian Air Force

Air Force पानी के रास्ते ‘surgical strike’ करने के लिए आर्मी को ऐसे बना रही ताकतवर

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Amritsar से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 8, 2019, 5:34 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...