महिलाओं को नौकरियों में आरक्षण देने में आतुर क्यों दिखते हैं राज्य? पीछे है बड़ा खेल

राज्य मंत्रिमंडल ने पंजाब सिविल सेवा नियम, 2020 में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की हैं.
राज्य मंत्रिमंडल ने पंजाब सिविल सेवा नियम, 2020 में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की हैं.

पंजाब में भी महिलाओं को राज्य सिविल सेवाओं में आरक्षण दिया जाएगा. बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल ने महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की हैं. राजनीतिक जानकार सरकार के इस कदम को वोटबैंक आकर्षित करने वाली राजनीति बता रहे हैं. खास बात है कि 2007 से ही पंजाब में महिलाओं के वोट प्रतिशत में लगातार इजाफा हुआ है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 11:26 AM IST
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नई दिल्ली. पंजाब (Punjab) में कैप्टन अमरिंदर (Captain Amarinder) की अगुआई में कांग्रेस (Congress) की सरकार है. पंजाब राज्य सिविल सेवाओं (Civil Services) में महिलाओं (Women) को आरक्षण (Reservation) प्रदान करने वाला नवीनतम राज्य बन गया है. बुधवार को राज्य मंत्रिमंडल ने पंजाब सिविल सेवा नियम, 2020 में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित की हैं.

महिलाओं को यह आरक्षण सभी सरकारी पदों के साथ राज्य के बोर्डों और निगमों में ग्रुप ए, बी, सी और डी पोस्ट पर सीधी भर्ती के लिए अनुमोदित किया गया है. राज्य सरकार के इस फैसले से आम चुनाव 2019 में राहुल गांधी के महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने के वादे को पूरा किया है.

महिला वोट के सहारे राजनीतिक दल
पंजाब में दो साल बाद 2022 में विधानसभा चुनाव होना है. वहीं, बिहार में इस महीने विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं. ऐसे में पंजाब में महिलाओं के लिए उठाया गया कांग्रेस का यह कदम चुनावों में कितना असरदार साबित होगा यह तो समय ही बताएगा, लेकिन देशभर के इन आंकड़ों पर नजर डालें तो पंजाब में कांग्रेस सरकार की एक बार फिर बल्ले-बल्ले हो सकती है.
बता दें कि पंजाब से पहले देश के कई राज्यों में महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकारों ने उन्हें नौकरियों में आरक्षण दिया हुआ है जिसका परिणाम सकारात्मक रहा है. वहीं, इन राज्यों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का वोट प्रतिशत भी बढ़ा है.



बिहार में नीतीश का महिला वोट बैंक
बता दें कि पंजाब से पहले जनवरी, 2016 में नीतीश कुमार ने महिलाओं के लिए सभी स्तर पर सरकारी नौकरियों में 35 फीसदी आरक्षण का ऐलान किया था. बिहार के पिछले चुनाव में नीतीश कुमार के लिए उनका यह फैसला मील का पत्थर साबित हुआ. इससे पहले, नीतीश सरकार ने 2006 में पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों में भी महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण प्रदान किया था.

अर्धसैनिक बलों में महिलाओं को आरक्षण
गुजरात और मध्य प्रदेश ने पहले ही क्रमश: 2014 और 2015 में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 30 फीसदी आरक्षण को मंजूरी दी हुई है. इसके अलावा, राजस्थान में भी महिलाओं को 30 फीसदी श्रेणी-वार आरक्षण मिल चुका है. वहीं, केंद्र सरकार ने भी सीआरपीएफ और सीआईएसएफ में महिलाओं के लिए 33 फीसदी कांस्टेबल रैंक पदों को आरक्षित किया है और एसएसबी, आईटीबीपी और बीएसएफ में भी 15 फीसदी आरक्षण दिया है.

पंजाब में पुरुषों से ज्यादा मतदान करती हैं महिलाएं
महिलाओं को आरक्षण देने पर राजनीतिक विशेषज्ञों ने इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण महिला वोटबैंक को माना है. उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पंजाब में पिछले तीन विधानसभा चुनावों में मतदाताओं में लिंग-अंतर के कारण बड़ा फेरबदल देखने को मिला है. जबकि साल 2007 के बाद से ही अन्य राज्यों की तुलना में पंजाब के विधानसभा चुनावों में महिला का वोट प्रतिशत बढ़ता ही रहा है. पंजाब में महिला मतदाताओं ने मतदान करने में पुरुष मतदाताओं को पीछे छोड़ दिया है.

अन्य राज्यों में महिला-पुरुष का वोट प्रतिशत
बता दें कि साल 2017 के विधानसभा चुनावों में 75.88 फीसदी पुरुष मतदाताओं के मुकाबले 77.90 फीसदी महिला मतदाताओं ने मतदान किया था. वहीं, साल 2012 के चुनावों में महिला का वोट प्रतिशत 78.90 फीसदी था जबकि 77.56 फीसदी पुरुष मतदाताओं ने ही मतदान किया था. साल 2015 में बिहार में चुनावों में महिलाओं और पुरुषों के बीच मतदान में 7.16 फीसदी का अंतर रहा. इस दौरान केवल 53.32 फीसदी पुरुष मतदाता वोट डालने घर से बाहर निकले थे तो वहीं महिला मतदाताओं का वोट प्रतिशत 60.48 फीसदी रहा था.

राष्ट्रीय स्तर पर पुरुष-महिला का वोट प्रतिशत
राष्ट्रीय स्तर पर महिला वोट प्रतिशत की बात करें तो बीते आम चुनाव में 67.01 फीसदी पुरुष मतदाता की तुलना में 67.18 फीसदी महिलाओं ने वोट डाला था. बता दें कि देश के अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल और ओडिसा में महिलाओं का वोट प्रतिशत अधिक रहा है.
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