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पंजाब में प्रचंड जीत के बावजूद आसान नहीं केजरीवाल-मान की राह, ये होंगी चुनौतियां

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और सीएम उम्‍मीदवार भगवंत मान के सामने कई चुनौतियांं हैं.  (फाइल फोटो)

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और सीएम उम्‍मीदवार भगवंत मान के सामने कई चुनौतियांं हैं. (फाइल फोटो)

Aap in Punjab: पंजाब यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर आशुतोष कुमार कहते हैं क‍ि खुद केजरीवाल ही कहते रहे हैं कि उनकी पार्टी तो ...अधिक पढ़ें

नई दिल्‍ली. पंजाब में आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) ने प्रचंड जीत हासिल की है. आप संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की रणनीति और पंजाब के लोगों में अन्‍य राजनीतिक दलों के लिए व्‍याप्‍त गुस्‍से का ही असर रहा कि लगभग सभी पार्टियों के धुरंधर नेता तक इस चुनाव में अपनी सीटें नहीं बचा पाए. कुल 117 में से 92 सीटें जीतने वाली आप ने इस बार लगभग क्‍लीन स्‍वीप (AAP’s Clean Sweep) कर दिया है. हालांकि राजनीति के जानकारों की मानें तो बड़े चुनावी वादों को लेकर दिल्‍ली की तर्ज पर आगे बढ़ रहे केजरीवाल और भगवंत मान के लिए पंजाब की राह आसान नहीं है. दिल्‍ली से लगभग दोगुनी जनसंख्‍या और पूर्ण राज्‍य का दर्जा प्राप्‍त पंजाब (Punjab) में शासन करने के दौरान उन्‍हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

पंजाब यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ पॉलिटिकल साइंस में प्रोफेसर आशुतोष कुमार न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीत में कहते हैं पंजाब में चुनाव से पहले ही यहां के लोगों में कांग्रेस (Congress) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रति एक गुस्‍सा देखा जा रहा था, जिसका परिणाम यह हुआ कि यहां के आम पंजाबियों ने चुनाव में इन दोनों दलों को पूरी तरह बाहर का रास्‍ता दिखाते हुए आम आदमी पार्टी को सत्‍ता सौंप दी. दोनों पार्टियों की कार्यशैली से उकताए लोगों में बदलाव की तेज इच्‍छा का ही नतीजा रहा कि जितनी सीटें आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को मिली हैं, उतने का अनुमान भी शायद विजेता पार्टी ने नहीं लगाया होगा. लिहाजा एक तरह से क्‍लीन स्‍वीप तो हुआ है लेकिन कभी-कभी बहुत ज्‍यादा बहुमत भी कई कठिनाइयां पैदा कर देता है. हालांकि अब 5 साल आप की सरकार पंजाब में रहेगी और इसे काम करके दिखाना होगा.

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प्रोफेसर आशुतोष कहते हैं कि एक जो सबसे बड़ी बात है वह यह है कि आम आदमी पार्टी में केजरीवाल बहुत कुछ साधने का दम तो रखते हैं लेकिन जिस तरह बड़े संगठन का ढांचा और वैचारिक मजबूती बीजेपी और मोदी के पास है, वह आम आदमी पार्टी में अभी उतनी मजबूत नहीं है. खुद केजरीवाल ही कहते रहे हैं कि उनकी पार्टी तो शिवजी की बारात है और इसमें सभी तरह के लोग जुड़े हुए हैं. इसके साथ ही पंजाब में सीएम का पद भी केजरीवाल नहीं बल्कि भगवंत मान संभालेंगे. हालांकि इन सभी चीजों को को छोड़ भी दें तो कई ऐसी जमीनी चुनौतियां हैं जो पंजाब में देखने को मिल सकती हैं और आप की सरकार को इनसे न केवल निपटना होगा. दिल्‍ली में जो सवाल सिटी स्‍टेट के रूप में आप की ओर से उठाए गए अब पूर्ण राज्‍य की कमान मिलने के बाद आप के सामने पंजाब के बेहतर संचालन की तस्‍वीर पेश भी करने की मजबूरी होगी.

ये होंगी बड़ी चुनौतियां

ड्रग्‍स से लेकर माफिया राज को खत्‍म करना
प्रो. आशुतोष कहते हैं क‍ि केजरीवाल के सामने पंजाब में जो सबसे कठिन चुनौती सामने आने वाली है वह है नशे का हब बन चुके पंजाब में तमाम तरह ही ड्रग्‍स (Drugs) के इस्‍तेमाल से लेकर इसकी सप्‍लाई, कारोबार, तस्‍करी जैसी चौतरफा घेर चुकी परेशानियों से निजात दिलाना. ये बहुत गहराई तक पैठ बना चुकी दिक्‍कत है. इससे नशा लेने वाले, नशे की सप्‍लाई करने वाले और बड़े-बड़े माफिया जुड़े हुए हैं. पंजाब में गुरदासपुर में सीएम केजरीवाल (CM Arvind Kejriwal) ने कहा था कि उनकी सरकार आई तो वे 6 महीने में ही वे पंजाब से नशा खत्‍म कर देंगे. यह कह पाना जितना सरल है, कर पाना उससे कहीं ज्‍यादा मुश्किल है.

वहीं पंजाब में एक और जो कॉमन चीज है वह है माफियाराज. यहां हर क्षेत्र माफियाओं की गिरफ्त में है. पंजाब में भूमाफिया से लेकर ट्रांस्‍पोर्ट माफिया, केबल माफिया, लिकर यानि शराब माफियाओं का जाल फैला हुआ है. इस जाल को तोड़कर चीजों को सामान्‍य अवस्‍था में लाना इनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा.

कर्ज में डूबा पंजाब, आप को विरासत में मिलेगा बकाया कर्ज
प्रोफेसर आशुतोष कहते हैं कि पंजाब में कोई भी काम करने के लिए पैसा चाहिए होगा. केजरीवाल को जो सरकार मिलने जा रही है वह पहले से कर्ज में डूबी हुई है. पंजाब के कर्ज में रहने का इतिहास भी सिर्फ कुछ सालों का नहीं है, साल 1999 में पंजाब सरकार पर करीब 5 हजार से 5500 करोड़ का कर्ज था. मार्च 2017 में जब कांग्रेस सरकार ने राज्य की बागडोर संभाली, तो उसे पिछली शिअद-भाजपा गठबंधन (SAD-BJP Alliance) सरकार  से 1.82 लाख करोड़ रुपये बकाया कर्ज विरासत में मिला था. वहीं इसके बाद राज्य सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के बोझ का अनुमान लगाया, जिससे 2022 में आ रही आम आदमी पार्टी की सरकार को विरासत में 1.82 लाख करोड़ रुपये के कर्ज का बोझ बढ़कर 2.82 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

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Tags: Aam aadmi party, Arvind kejriwal, New Punjab CM

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