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कैप्टन के दिल्ली पहुंचने से पहले सिद्धू ने फिर किए कई ट्वीट, बोले- मुफ्त बिजली के खोखले वादों का कोई मतलब नहीं

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू. (पीटीआई फाइल फोटो)

कांग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू. (पीटीआई फाइल फोटो)

कांग्रेस नेता ने कहा कि और भी चिंताजनक यह है कि पीपीए के तहत पीक सीजन के दौरान इन निजी बिजली संयंत्रों से बिजली की अनिवार्य आपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं है.

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    चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Punjab Chief Minister Captain Amarinder Singh) के दिल्ली पहुंचने से पहले पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू  ( Navjot Singh Sidhu) ने एक के बाद एक ट्वीट कर फिर से अप्रत्यक्ष रूप से कैप्टन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि  मुफ्त बिजली के खोखले वादों का कोई मतलब नहीं है जब तक कि "पंजाब विधानसभा में नए विधान" के माध्यम से (Power Purchase Agreement) पीपीए को रद्द नहीं किया जाता है. उन्होंने लिखा कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली केवल एक कल्पना है, जब तक पीपीए में दोषपूर्ण खंडों से बंधा हुआ है.

    ट्वीट करते हुए सिद्धू ने कहा है कि पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) पंजाब को 100 फीसदी उत्पादन के लिए निश्चित शुल्क का भुगतान करने के लिए बाध्य करते हैं, जबकि अन्य राज्य समझौतों के मुताबिक 80 फीसदी से अधिक का भुगतान नहीं करते हैं.  यदि पीपीए के तहत निजी बिजली संयंत्रों को भुगतान किए जा रहे इन निश्चित शुल्कों का भुगतान नहीं किया जाता है, तो यह सीधे और तुरंत बिजली की लागत को प्रति यूनिट 1.20 रुपए तक कम कर देगा.

    सिद्धू ने कहा है कि  पीपीए राज्य में बिजली की मांग की गलत गणना पर आधारित हैं. पंजाब में 13,000-14,000 मेगावाट की पीक डिमांड केवल चार महीने के लिए है जबकि नॉन-पीक बिजली की मांग 5000-6000 मेगावाट तक गिरती है, लेकिन पीपीए को डिजाइन और पीक डिमांड के आधार पर ही हस्ताक्षरित किया गया है.

    न्याय के लिए हमारा एकमात्र मार्ग - नया विधान
    कांग्रेस नेता ने कहा कि और भी चिंताजनक यह है कि पीपीए के तहत पीक सीजन के दौरान इन निजी बिजली संयंत्रों से बिजली की अनिवार्य आपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं है. इस प्रकार उन्होंने इस धान-बुवाई के मौसम में दो बिजली संयंत्रों को बिना मरम्मत के बंद कर दिया है और पंजाब को अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही हैॅ.

    सिद्धू ने कहा है कि दोषपूर्ण पीपीए ने पंजाब के लोगों के हजारों करोड़ खर्च किए हैं! पंजाब ने पीपीए पर हस्ताक्षर करने से पहले बोली-पूर्व प्रश्नों के दोषपूर्ण उत्तरों के कारण कोल-वाशिंग शुल्क के रूप में 3200 करोड़ का भुगतान किया है. निजी संयंत्र मुकदमे दायर करने में खामियां ढूंढते रहते हैं, जिसकी लागत पंजाब में पहले से ही 25,000 करोड़ है.

    कांग्रेस नेता ने कहा कि ये पीपीए बादल परिवार के भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण हैं, जो पंजाबियों के कल्याण के लिए बिना किसी विचार के बादल परिवार को भ्रष्ट लाभ देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं. जिसका खामियाजा पंजाब भुगत रहा है !! "विधानसभा में पीपीए पर नया विधान और श्वेत पत्र" न्याय के लिए हमारा एकमात्र मार्ग है.

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