कोटकपूरा गोलीकांड में हाईकोर्ट के आदेशों पर जश्न मनाना बंद करें बादल- CM अमरिंदर

अमरिंदर सिंह ने दी प्रतिक्रिया. (File pic)

अमरिंदर सिंह ने दी प्रतिक्रिया. (File pic)

मुख्यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि अभी हाईकोर्ट के फैसले की आधिकारिक कॉपी नहीं आई है. उनकी सरकार एसआईटी की जांच को रद्द करने या इस टीम के प्रमुख कुंवर विजय प्रताप को हटाने वाले किसी भी अदालती आदेश को चुनौती देगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2021, 10:41 AM IST
  • Share this:
चंडीगढ़. पंजाब (Punjab) के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder Singh) ने कहा है कि कोटकपूरा गोलीकांड केस में हाईकोर्ट के आदेशों पर शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के प्रधान सुखबीर बादल (Sukhbir Badal) को जश्न मनाने की जरूरत नहीं है क्यों यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि इस मामले में दोषी कोई भी वह उन्हें सजा दिलाने से पीछे नहीं हटेंगे.

हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी अभी नहीं आई

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में शिअद प्रधान सुखबीर बादल अपनी बड़ी जीत बता रहे हैं. उन्होंने कहा कि अभी हाईकोर्ट (Punjab and Haryana High Court) के फैसले की आधिकारिक कॉपी नहीं आई है. उनकी सरकार एसआईटी की जांच को रद्द करने या इस टीम के प्रमुख कुंवर विजय प्रताप को हटाने वाले किसी भी अदालती आदेश को चुनौती देगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सुखबीर बादल द्वारा अपनी जीत को मनाने की जल्दी से उसकी बौखलाहट जाहिर होती है, क्योंकि उसे एस.आई.टी. की जांच की दिशा को देखते हुए दीवार पर लिखा साफ नजर आ रहा था.

6 लोगों के खिलाफ दाखिल है आरोप पत्र
एसआईटी ने अब तक मामले में कोटकपूरा के तत्कालीन अकाली विधायक और हलका इंचार्ज मनतार सिंह बराड़ समेत छह व्यक्तियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिए हैं. मनतार बराड़ के खिलाफ दायर चार्जशीट में साफ लिखा है कि कॉल डिटेल को जांचने पर यह साफ जाहिर हो जाता है कि उनकी तरफ से पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल को उनके विशेष प्रमुख सचिव गगनदीप सिंह बराड़ और मुख्यमंत्री के ओएसडी गुरचरन सिंह को फोन कॉल की गई थी.



बादल परिवार ने जांच को प्रभावित करने की कोशिश की



मुख्यमंत्री ने बताया कि बादल परिवार ने पिछले चार सालों के दौरान इस मामले की जांच में रुकावट खड़ी करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी थी. केंद्र में सत्ताधारी गठजोड़ का हिस्सा होने पर शिरोमणि अकाली दल ने जांच को किसी नतीजे पर पहुंचने से रोकने के लिए सभी तरीके अपनाए. राज्य की मौजूदा सरकार द्वारा जांच पूरी करने के लिए केंद्रीय एजेंसी ने केस वापस लेकर विशेष जांच टीम (सिट) को सौंपे जाने की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए भी दबाव बनाया.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज