तितलियों को भा गया चंडीगढ़, मॉनसून में हर जगह छा गईं
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तितलियों को भा गया चंडीगढ़, मॉनसून में हर जगह छा गईं
सांकेतिक तस्वीर

चंडीगढ़ (Chandigarh) में मॉनसून (Monsoon) के बादल अभी तक पूरी तरह से मेहरबान भी नहीं हुए हैं कि तितलियों (Butterflies) ने शहर को अपने घर बना लिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों चंडीगढ़ में तितली की गतिविधियां जोरों पर हैं.

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चंडीगढ़. चंडीगढ़ (Chandigarh) में मॉनसून (Monsoon) के बादल अभी तक पूरी तरह से मेहरबान भी नहीं हुए हैं कि तितलियों (Butterflies) ने शहर को अपने घर बना लिया है. विशेषज्ञों का कहना है कि इन दिनों चंडीगढ़ में तितली की गतिविधियां जोरों पर हैं. ये गतिविधियां, सार्वजनिक पार्कों में गीले मैदानों के आस-पास के सूखे मैदानों पर कीचड़-पोखर और ताज़े पत्तों पर अंडे देना के आधार पर विशेषज्ञों ने यह बात कही.

पिछले दिनों विशेषज्ञों ने कहा कि मड पुडलिंग से तात्पर्य है कि सोडियम फॉर्म कीचड़ को इकट्ठा करने के लिए नर तितलियों द्वारा एक समूह गतिविधि, जिसे बाद में प्रजनन क्षमता के लिए मादाओं को हस्तांतरित किया जाता है. इन दिनों अंडे देने वाली प्रजातियों में कॉमन मॉर्मन, कॉमन इमीग्रेंट, मोटलड इमीग्रेंट शामिल हैं. वर्तमान में शहर में 128 तरह की तितलियां पाई जाती हैं. 2007 में जब विशेषज्ञों ने शहर में तितलियों की पहचान करना शुरू की थी, तब महज 35 की ही पहचान हो पाई थी.


शहर में क्यों पाई जाती हैं इतनी तितलियां?
विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में काफी संख्या में पेड़ हैं. खासकर सड़क के दोनों किनारों पर पेड़ और पौधों की संख्या अधिक होने से तितलियों को अच्छा बसेरा मिल जाता है और वह यहां पर पूरे साल सक्रिय रहती हैं. लेकिन मॉनसून के महीनों के दौरान तितलियों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं. अंडे की छंटाई और कीचड़-पुदलिंग ताजा उगाए गए हरे पत्तों पर आम दर्शनीय स्थल हैं. कैटोप्सिलिया पोमोना-पोमोना, कैटोसपिलिया क्रोकेल, कैटोसल्पिलिया फ्लोरेला फ्लोरेला और कैटोसपिसिलिया पायरेथ जैसी प्रजातियां इन दिनों मेजबान पौधों पर अंडे देने में सक्रिय हैं.



चंडीगढ़ वन विभाग के अनुसार, चंडीगढ़ तितलियों की 70 से अधिक प्रजातियों का घर है और कुछ दुर्लभ प्रजातियों को समय-समय पर शहर के आसपास के क्षेत्रों में भी देखा जाता है. “इस समय के दौरान नर तितलियों की ओर से कीचड़ फैलाने वाली गतिविधियां बढ़ जाती हैं. नेचुरल बायोडायवर्सिटी ग्रुप के संरक्षक अरुण गुप्ता ने कहा कि हम इन दिनों चंडीगढ़ के आसपास के रिवरबेड्स और पब्लिक पार्कों में भी सूखे पैच देख सकते हैं.
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