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Punjab News: किसान आंदोलन में शामिल कर्मचारियों की बर्खास्तगी का विरोध, AAP ने कैप्टन के घेराव की चेतावनी

किसान आंदोलन में शामिल सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी का AAP पंजाब ने किया विरोध.
किसान आंदोलन में शामिल सरकारी कर्मचारियों की बर्खास्तगी का AAP पंजाब ने किया विरोध.

Kisan Aandolan: आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब इकाई ने कृषि कानूनों के विरोध में किसानों का समर्थन करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर कैप्टन अमरिंदर सिंह (Capt Amrinder Singh) सरकार की कार्रवाई का किया कड़ा विरोध. आंदोलन को कमजोर करने का लगाया आरोप.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 22, 2021, 11:01 AM IST
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चंडीगढ़. किसान आंदोलन में शामिल होने वाले पंजाब सरकार के कर्मचारियों को बर्खास्त किए जाने का मामला सामने आने पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder singh) सिंह पर निशाना साधा है. पार्टी हेडक्वार्टर से जारी बयान में पार्टी के विधायक और यूथ विंग के प्रधान गुरमीत सिंह मित्र ने कहा कि दिल्ली धरने में शामिल होने के कारण प्रशासन ने फाजिल्का जिले के मनरेगा कर्मचारी यूनियन के जिला महासचिव अमृतपाल सिंह को कुछ दिन पहले नौकरी से बर्खास्त कर दिया. अमृतपाल सिंह का दोष केवल यह था कि किसान परिवार के साथ संबंध के चलते वह दिल्ली बार्डर पर चल रहे किसान आंदोलन (Kisan Aandolan) में किसानों के धरने में शामिल हुए थे. AAP नेता ने कैप्टन सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि बर्खास्त किये गए कर्मचारी को प्रशासन ने जल्दी बहाल न किया तो आम आदमी पार्टी मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी.

उन्होंने कहा कि यह मामला तब सामने आया जब कर्मचारी जत्थेबंदियों के सदस्यों ने बड़ी संख्या में बर्ख़ास्तगी के विरुद्ध डीसी कार्यालय बाहर धरना प्रदर्शन किया. गुरमीत सिंह कहा कि इससे पता चलता है कि कैप्टन ने किसान आंदोलन के समर्थकों की आवाज़ दबाने के लिए अपने अधिकारियों को छूट दे दी है. सवाल करते हुए उन्होंने कहा कि आखिर किसके इशारे पर यह अधिकारी आंदोलन में शामिल होने वाले कर्मचारियों को बर्खास्त कर रहे हैं?

कर्मचारियों को डरा रही सरकार


मित्र ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करके कैप्टन सरकार को किसान आंदोलन (KISAN ANDOLAN) में शामिल होने से रोक रही है. हर तरह के सरकारी हथकंडे अपना कर कैप्टन प्रशासन सरकारी कर्मचारियों को डरा रहा है, जिससे वह आंदोलन में शामिल न हो सकें. हजारों कर्मचारी इस कड़ाके की ठंड में दिल्ली की सड़कों पर संघर्ष कर रहे अपने राज्य के किसानों का समर्थन करने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए दिल्ली धरना स्थल पर जाना चाहते हैं, परन्तु बर्खास्त के डर कारण वे दिल्ली नहीं जा रहे. कैप्टन सरकार की तरफ से लगातार की जा रही इस तरह की आंदोलन विरोधी गतिविधियों से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि कैप्टन आंदोलन को कमजोर करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. पंजाब के किसानों की आवाज को दबाने के लिए सत्ता की ताकत का प्रयोग कर रहे हैं.

सुनहरे अक्षरों से लिखा जाएगा किसान आंदोलन


उन्होंने कैप्टन पर हमला बोलते हुए कहा कि यह बर्ख़ास्तगी इस बात का सबूत है कि कैप्टन, मोदी-शाह (MODI-SHAH) के साथ मिलकर किसान आंदोलन को कुचलना चाहते हैं. कैप्टन अपने पुत्र को ईडी मामलों से बचाने के लिए ऐतिहासिक किसान आंदोलन को दबाना का प्रयत्न कर रहे हैं. उन्होंने कहा कैप्टन को यह याद रखना चाहिए कि यह आंदोलन इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा. इस आंदोलन को कुचलने वालों का साथ देने वालों का नाम इतिहास के काले पन्नों पर काले अक्षरों में लिखा जायेगा.
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