• Home
  • »
  • News
  • »
  • punjab
  • »
  • Dalit Factor in Punjab: आखिर क्या है पंजाब में दलितों का गणित, चुनाव जीतने के लिए क्यों है ये ज़रूरी?

Dalit Factor in Punjab: आखिर क्या है पंजाब में दलितों का गणित, चुनाव जीतने के लिए क्यों है ये ज़रूरी?

सरकारी वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब की कुल आबादी का 32 फीसद दलित है (फोटो-@msgpahujaa)

सरकारी वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब की कुल आबादी का 32 फीसद दलित है (फोटो-@msgpahujaa)

Dalit Politics in Punjab: पहली बार पंजाब के शीर्ष पद पर किसी दलित को मौका मिला है. इससे ये साबित होता है कि काग्रेस राज्य में होने वाले 2022 के विधानसभा चुनाव में जाति की प्रमुखता को भुनाने वाला है.

  • News18Hindi
  • Last Updated :
  • Share this:

    चंडीगढ़. कहते हैं कि करीब से देखने पर तस्वीर का असली पक्ष साफ हो जाता है. जब रविवार को पंजाब के पहले सिख दलित मुख्यमंत्री की खबर सुर्खियों में आई तो इससे पंजाब की उस तस्वीर का रुख भी साफ हुआ जो पंजाब की अभी तक बनाई गई तस्वीर से इतर है. पंजाब में जाति की बात थोड़ा हैरानी में डालती है. खासकर अगर बात सिख धर्म की हो तो और ये हैरानी बेबुनियाद भी नही है. दरअसल सिख धर्म की स्थापना के मूल में ही मतभेदों की निंदा मौजूद रही है. लेकिन जैसा कि कहा है करीब से देखने पर तस्वीर का स्याह पक्ष भी उभर कर आता है.

    पहली बार पंजाब के शीर्ष पद पर दलित चेहरा लाना, साबित करता है कि कांग्रेस राज्य में होने वाले 2022 के विधानसभा चुनाव में जाति की प्रमुखता को भुनाने वाली है. संक्षिप्त इतिहास से समझते हैं कि किस तरह सिख धर्म में जाति ने प्रवेश किया और ये कितना गहरा है –

    क्या सिख धर्म जाति से मुक्त नहीं था?
    सिखधर्म की पवित्र पुस्तक आदिग्रंथ में जाति व्यवस्था की कठोर निंदा की गई है. यही वजह है कि लंगर में सभी को एक सीधी कतार में बैठने के लिए कहा गया है, जिससे ना तो कोई उच्च और ना ही कोई हीन नजर आए. दरअसल विशिष्ट सिख लंगर की उत्पत्ति ही जातिव्यवस्था के विरोध में हुई थी. सिख धर्म में जाति व्यवस्था को नकारा गया है कि इसका दूसरा उदाहरण कड़ा प्रसाद के वितरण में देखने को मिलता है जिसे सभी मिलकर तैयार करते हैं औऱ सभी में समानता के साथ बांटा जाता है.

    ये भी पढ़ें:- बच्चे ने देश भर में स्कूल खोलने की रखी मांग, सुप्रीम कोर्ट ने वकील को लगाई फटकार, याचिका भी रद्द

    फिर क्या हुआ?
    सिख समाज में दो क्षेत्र ऐसे हैं जहां जाति व्यवस्था देखने को मिलती है. सिखों में आमतौर पर अपनी जाति में ही शादी करने को तरजीह दी जाती है. जाट का ब्याह जाटों में, खत्रियों का खत्रियों में और दलित की शादी दलित में ही की जाती है. इसके अलावा सिखों की कुछ जातियों में वह अपनी जाति के लिए ही गुरुद्वारा स्थापित करते हैं मसलन रामगढ़िया जाति के सदस्य, अपने तरीके से गुरुद्वारा बनाते हैं (खासकर वह जो यूनाइटेड किंगडम में बस गए हैं). ऐसा ही दलितों में भी देखने को मिलता है. हाल ही में मीडिया में प्रकाशित खबरें बताती हैं कि ज्यादातर गांवों में दलितों की प्रार्थना और अंतिम संस्कार की जगह अलग होती है. वह जाट सिखों के लिए बने गुरुद्वारे में प्रार्थना तो कर सकते हैं लेकिन वे दूसरे उपासकों के साथ लंगर में, सामुदायिक रसोई जहां सभी के लिए खाना बनाया जाता है, वहां बैठ नहीं सकते हैं. यही नहीं दलितों को उन बर्तनों को छूने की भी इजाजत नहीं होती है जो गुरुद्वारे में धार्मिक समारोह में इस्तेमाल होते हैं.

    60 फीसद से ज्यादा सिख जाट जाति से संबंध रखते हैं जो एक ग्रामीण जाति है. वहीं खत्री और अरोड़ा व्यापारिक जातियां हैं जिनकी संख्या बहुत कम है लेकिन वो सिख समुदाय में अच्छा खासा प्रभाव रखती हैं. इसके अलावा सिख धर्म में कुछ और जातियां मौजूद है जिसमें एक हैं रामगढिया (कारीगर), अहलूवालिया ( पूर्व में शराब बनाने के काम से जुड़ी जाति) और दो दलित जातियां जिन्हें सिख शब्दावली में मजहबी (चुहरा) और रामदासिया (चमार) के नाम से जाना जाता है.

    पंजाब में क्या है जाति का गणित, दलित की क्या है स्थिति
    सरकारी वेबसाइट पर मौजूद आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब की कुल आबादी का 32 फीसद दलित हैं. कुल दलित आबादी का 59.9 फीसद सिख और 39.6 फीसद हिंदू हैं. उच्च जाति के जाट सिखों की संख्या कम है. लेकिन इनका राजनीति में और आर्थिक दबदबा है. जाट किसानों के पास राज्य में जमीन का बड़ा हिस्सा है वहीं दलितों के पास राज्य में महज 6.02 कृषि भूमि है. पंजाब में 523,000 परिवार गरीबी रेखा के नीचे जिंदगी गुजार रहे हैं. इनमें से 321,000 यानी करीब 61.4 फीसद दलित हैं.

    पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

    हमें FacebookTwitter, Instagram और Telegram पर फॉलो करें.

    विज्ञापन