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चन्नी VS सिद्धू: क्या पंजाब कांग्रेस में सुलगने लगी है एक नए संघर्ष की चिंगारी?

नवजोत सिंह सिद्धू और चरनजीत सिंह चन्नी. (तस्वीर-PTI)

नवजोत सिंह सिद्धू और चरनजीत सिंह चन्नी. (तस्वीर-PTI)

पंजाब कांग्रेस (Punjab Congress) में लंबे गतिरोध के बाद राज्य के मुख्यमंत्री तो बदल गए लेकिन अभी पार्टी के भीतर विवाद कम होता नहीं दिख रहा है. क्या नए सीएम चरनजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) और राज्य पार्टी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Siddhu) के बीच नया संघर्ष पनप सकता है?

  • News18Hindi
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नई दिल्ली. पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election) में अब चार महीने का ही वक्त बचा है लेकिन हाल में हुए बड़े परिवर्तन के बावजूद पार्टी में परेशानियां कम होती नहीं दिख रही हैं. माना जा रहा है चुनाव में टिकट वितरण के दौरान भी नाराजगी पनप सकती है. इसके अलावा नई कैबिनेट में मंत्रालय बंटवारे को लेकर कुछ नाराजगी पहले से दिखने लगी है.

रविवार को नए मंत्रियों के शपथग्रहण से कुछ ही घंटे पहले कुछ विधायकों ने राज्य कांग्रेस के मुखिया नवजोत सिंह सिद्धू को खत लिखा है. विधायकों का कहना है राना गुरजीत सिंह को मंत्री नहीं बनाया जाना चाहिए क्योंकि उन पर बालू खनन घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. गुरजीत सिंह को कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार से भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद कैबिनेट से हटा दिया गया था.

माना जा रहा है कि कुछ अन्य नेताओं को भी नए सीएम द्वारा मंत्री पद दिए जाने से सिद्धू परेशान हैं. इनमें अरुणा चौधरी शामिल हैं. दरअसल अरुणा चौधरी वर्तमान सीएम चरनजीत सिंह चन्नी की रिश्तेदार हैं और उनकी विधानसभा सीट पर उनके खिलाफ सत्ताविरोधी लहर भी चल रही है. सिद्धू चाहते थे कि पंजाब कांग्रेस कमेटी (SC) के अध्यक्ष राज छब्बेवाल को जगह मिले.

‘जातीय समीकरण का खयाल नहीं रखा गया’
कहा जा रहा है कि कैबिनेट में जातीय समीकरण का खयाल नहीं रखा गया है. इसमें मजहबी सिख समुदाय को पर्याप्त भागीदारी नहीं मिली है. ये समुदाय राज्य में अनुसूचित जाति का 30 प्रतिशत हिस्सा है. वर्तमान विधानसभा में इस समुदाय से 9 विधायक हैं. सूत्रों के मुताबिक चन्नी अपने समुदाय को लेकर प्रयासरत थे और उन्होंने मजहबी सिख समुदाय पर ध्यान नहीं दिया.

आरोप खारिज कर रहे हैं सीएम के नजदीकी
हालांकि मुख्यमंत्री के नजदीकी के लोग ऐसे पक्षपातपूर्ण आरोपों को खारिज कर रहे हैं. उनका कहना है कि कैबिनेट में हर नाम राहुल गांधी और पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सिद्धू की सहमति से पास हुआ है.

‘ऐसा आदमी मंत्री है जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं’
हालांकि कांग्रेसी खेमे में अविश्वास की भावना पनपती दिखने लगी है. सिद्धू के एक करीबी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा- ‘हम कैप्टन अमरिंदर सरकार से अलग दिखना चाहते थे. हम दिखाना चाहते थे कि हम भ्रष्टाचार से ऊपर हैं. अब एक ऐसा आदमी मंत्री है जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं. ये हमारी लड़ाई को कमजोर करेगा.’

तात्कालिक तौर पर कांग्रेस के लिए सबसे जरूरी ये है कि पार्टी में शांति कायम हो और चन्नी-सिद्धू खेमे में एकता रहे. दिलचस्प ये है कि राज्य में सुखजिंदर सिंह रंधावा की बजाए दलित मुख्यमंत्री बनाने की मांग सिद्धू ने ही की थी.

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