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  • अगले विधानसभा चुनाव तक पूर्व डीजीपी सैनी की नहीं होगी गिरफ्तारी, हाईकोर्ट ने लगाई रोक

अगले विधानसभा चुनाव तक पूर्व डीजीपी सैनी की नहीं होगी गिरफ्तारी, हाईकोर्ट ने लगाई रोक

 पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी (फ़ाइल फोटो)

पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी (फ़ाइल फोटो)

Punjab: पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है. मामले की सुनवाई अब 13 दिसंबर को होगी.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) ने पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी (Former DGP Sumedh Singh Saini) की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है. यानी आगामी फरवरी माह में चुनाव संपन्न होने तक उनकी गिरफ्तारी पर भी साफ तौर पर रोक लगा दी गई है. हाईकोर्ट ने कहा है कि आगामी राज्य विधानसभा चुनावों (Upcoming state assembly elections) के मद्देनजर गिरफ्तारी राजनीतिक चाल हो सकती है.

    यह आदेश कम से कम अगले साल फरवरी में होने वाले चुनाव तक लागू रहेगा. न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान (Justice Arvind Singh Sangwan) ने जोर देकर कहा कि वह पंजाब पुलिस के अधिकारियों द्वारा अदालत से आगे निकलने की कोशिश में दिखाए गए साहस से अवगत हैं. अपने 46 पन्नों के फैसले में, न्यायमूर्ति सांगवान ने कहा कि यह आदेश राजनीतिक आधार पर पंजाब सरकार द्वारा याचिकाकर्ता को असाधारण परिस्थितियों और कठिनाइयों का मामला मानते हुए पारित किया जा रहा है.

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    उन्होंने कहा कि सभी लंबित मामलों में उनकी गिरफ्तारी पर स्पष्ट रोक होगी, जिनके पंजीकृत होने या पंजीकृत होने की संभावना है, साथ ही उन मामलों में भी जहां उन्हें “आईपीसी (साजिश) की धारा 120-बी में फंसाने की मांग की गई थी”. उन्होंने कहा कि यह आदेश  एकमात्र अपवाद मुल्तानी मामले को छोड़ कर सभी पर लागू होंगे. क्यों कि यह मामला सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है.

    सैनी को अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया है. मामले की सुनवाई अब 13 दिसंबर को होगी. सैनी अन्य बातों के अलावा राज्य को यह निर्देश देने की मांग कर रहे हैं कि कि जांच सीबीआई को या राज्य के बाहर किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए. उनके वकील एपीएस देओल और एचएस देओल ने दलील दी कि याचिकाकर्ता ने राज्य में सत्ता में राजनीतिक दल की ओर से द्वेष, दुर्भावना और गलत मंशा के कारण आपराधिक मामलों में झूठे निहितार्थ की आशंका जताई है.

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