पाकिस्तान के अड़ियल रवैये की वजह से करतारपुर कॉरिडोर प्रोजेक्ट में हो रही है देरी

भारत का दावा है कि अब तक 45 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से तय समझौते के मुताबिक दी गई डेडलाइन पर काम चल नहीं चल रहा है.

अमित पांडेय
Updated: June 23, 2019, 6:44 AM IST
पाकिस्तान के अड़ियल रवैये की वजह से करतारपुर कॉरिडोर प्रोजेक्ट में हो रही है देरी
फाइल फोटो
अमित पांडेय
अमित पांडेय
Updated: June 23, 2019, 6:44 AM IST
भारत पाकिस्तान सीमा पर बन रहे करतारपुर कॉरिडोर के जरिए भारत से श्रद्धालु पाकिस्तान में करतारपुर साहिब का दर्शन कर सकेंगे. वहां पर भारत ने पिछले कुछ महीनों से लगातार काम जारी रखा, चाहे पुलवामा हमला हो या फिर ऑपरेशन ऑल आउट. भारत पाकिस्तान के रिश्तों में लगातार कड़वाहट आती रही, बावजूद इसके इस प्रोजेक्ट के काम में कोई असर नहीं पड़ा. पिछले एक साल में इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत पाकिस्तान के बीच चार बैठकें हो चुकी हैं. तीन तकनीकी बैठक और एक द्विपक्षीय बैठक और समझौता ये हुआ है कि अंतरराष्ट्रीय परियोजना मापदंडों के मुताबिक ही दोनों तरफ सड़क बनेगी. भारत की तरफ 4.2 किलोमीटर जबकि पाकिस्तान की तरफ 4 किलोमीटर लेकिन अब पाकिस्तान की तरफ से समझौते के कई बिंदुओं से मुकरने की बात सामने आ रही है.

भारत का दावा है कि अब तक 45 फीसदी काम पूरा किया जा चुका है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से तय समझौते के मुताबिक दी गई डेडलाइन पर काम चल नहीं चल  रहा है. उसकी ओर से प्रोजेक्ट को लटकाने की कोशिश की जा रही है. भारत सरकार की इस प्रोजेक्ट को तीस सितंबर तक पूरा करने की योजना है जबकि अब तक पाकिस्तान ने कोई ऐसी बात नहीं कही है कि ये प्रोजेक्ट कब पूरा होगा. भारत चाहता है कि पाकिस्तान अपने हिस्से में मौजूद ऑल वेदर रोड बनाए जैसा कि भारत अपने हिस्से में बना रहा है और समझौते में भी इस बात  का जिक्र था लेकिन पाकिस्तान सिर्फ सीजनल रोड बना रहा है. भारत ने इसको लेकर पाकिस्तान के सामने एतराज भी जाहिर किया है.

इस ऑल वेदर रोड पर धूप, बरसात और अन्य कठिन प्राकृतिक परिस्थितियों का असर नहीं पड़ता है और यह बेहद मजबूत होती है. ऑल वेदर रोड पर बन रहे ब्रिज को भारत अपनी तरफ से तय डेडलाइन पर पूरा काम कर रहा है पर पाकिस्तान अपनी तरफ ब्रिज बनाने को तैयार नहीं है. भारत को लगता है कि ये ब्रिज अगर नहीं बनेगा तो पंजाब के कई इलाकों में बाढ़ के हालात पैदा हो जाएंगे. भारत चाहता है कि इस ब्रिज पर जल्द पाकिस्तान अपना काम पूरा करे. दरअसल भारत के हिस्से में पड़ने वाली सड़क थोड़ी नीची है और बरसात के मौसम में और सीमा पर बह रही रावी नदी का पानी भारत की सीमा में आने का खतरा है. पाकिस्तान इस नदी पर बांध बनाने पर आमादा है जिससे खतरा यह है की नदी का पानी भारत की सीमा में आ सकता है और यहां पर रह रहे लोगों को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है. भारत के मुताबिक इसका सबसे बेहतर उपाय है कि भारत अपने हिस्से का पुल बनाएं और पाकिस्तान अपने हिस्से का पुल बनाए जिससे नदी में बिना छेड़छाड़ किए एक अच्छा रास्ता बन जाएगा और यात्री उस पर से आ जा सकेंगे. इस बात का भी जिक्र समझौते में है लेकिन इस बात पर भी पाकिस्तान खामोश है.

भारत का दावा है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत अपनी तरफ 30 सितंबर तक काम पूरा कर लेगा पर पाकिस्तान कोई डेडलाइन नहीं दे रहा है. इसके अलावा भारत सरकार ने इस यात्रा के दौरान खालिस्तान समर्थित गतिविधियों के बारे में अपनी चिंता जाहिर की है. लेकिन उसकी ओर से अभी तक इस मामले में कोई ठोस जवाब नहीं मिला है कि वह क्या कार्रवाई करेगा. भारत का दावा है  कि 5000 श्रद्धालु रोजाना करतारपुर साहिब के दर्शन करेंगे और किसी खास दिन बैसाखी, गुरुपूर्णिमा के समय 10000 यात्री प्रतिदिन दर्शन करेंगे. लेकिन पाकिस्तान का कहना है कि रोजाना सिर्फ 700 श्रद्धालु दर्शन करेंगे. ये भारत के हिसाब से बहुत कम है.

भारत ने मांग की है कि सभी भारतीय नागरिक और ओसीआई कार्डधारक करतारपुर साहिब के दर्शन करने जाएं. पाकिस्तान का कहना है कि केवल सिख ही वहां पर दर्शन करने जाएंगे. भारत का पाकिस्तान से कहना है कि एक परिवार या फिर एक ग्रुप चाहे जितनी संख्या का हो उसको करतारपुर के दर्शन करने के लिए पाक इजाजत दे. लेकिन पाक भारत की बात नहीं मान रहा है और कहा है कि केवल 15 श्रद्धालुओं का ग्रुप ही एक बार मे भारत से दर्शन करने जा सकता है. भारत इसको लेकर ऐतराज जता रहा है. भारत का कहना है कि इस यात्रा के दौरान कोई वीजा फीस नहीं होगी जबकि पाकिस्तान परमिट की एवज में शुल्क वसूलना चाह रहा है.

भारत का मानना है कि सातों दिन इस यात्रा को जारी रहना चाहिए जबकि पाकिस्तान का कहना है कि विशेष दिनों में इस यात्रा को होना चाहिए. गुरु नानक देव के 550 जन्म तिथि समारोह को भारत सरकार ने बेहद भव्य तरीके से मनाने का फैसला किया है और इसको लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में कई कार्यक्रम रखे गए हैं. इसके अलावा कई परियोजनाओं को भी पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह तारीख नवंबर के महीने में है और करतारपुर कॉरिडोर परियोजना इन कई परियोजनाओं में से एक थी. सरकार का लक्ष्य था कि दोनों देशों के सहयोग से इस कॉरिडोर के काम को इस तिथि से पहले पूरा किया जा सके और दोनों देश के श्रद्धालु इस रास्ते के जरिए आ जा सके और पवित्र स्थल का दर्शन कर सकें. लेकिन एक बार फिर पाकिस्तान के तय की गई बातों का पालन न करने से उसका अड़ियल रवैया जाहिर हो रहा है.

ये भी पढ़ें- 
Loading...

करतारपुर साहिब गुरुद्वारा: सिख श्रद्धालुओं से 100 डॉलर वसूलने की तैयारी में पाकिस्तान

आतंकवाद फैलाने के लिए ISI ने खुलवाया करतारपुर गलियारा: कैप्टन अमरिंदर सिंह

सिखों के वो मशहूर तीर्थस्थान, जो पाकिस्तान में मौजूद हैं

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए चंडीगढ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: June 23, 2019, 6:40 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...