कोविड से पीड़ित बच्चों के लिए घातक हो सकता है निमोनिया, पंजाब स्वास्थ्य विभाग करेगा जांच

विभाग ने इस कार्यक्रम की शुरूआत की है ताकि बच्चों को निमोनिया से प्राथमिकता के आधार पर बचाया जा सके.

विभाग ने इस कार्यक्रम की शुरूआत की है ताकि बच्चों को निमोनिया से प्राथमिकता के आधार पर बचाया जा सके.

Punjab News: स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू (Health Minister Balbir Singh Sidhu) ने कहा कि देश में बच्चों की मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण निमोनिया है और बच्चों में लगभग 15 प्रतिशत मौतें निमोनिया के कारण ही होती हैं

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चंडीगढ़. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग (Department of Health and Family Welfare) ने बच्चों की निमोनिया की समय पर जांच और इलाज के लिए सोशल अवेयरनेस एंड एक्शन टू न्यूट्रीलाइज्ड निमोनिया सक्सेसफुली (Social Awareness & Action to Neutralise Pneumonia Successfully) कार्यक्रम की शुरुआत की है. मंत्रालय का कहना है कि कोविड (Covid) से पीड़ित बच्चों को हल्का निमोनिया होने पर भी जान जा सकती है. इसलिए विभाग ने इस कार्यक्रम की शुरुआत की है ताकि बच्चों को निमोनिया से प्राथमिकता के आधार पर बचाया जा सके.

देश में 15 फीसदी मौतें निमोनिया के कारण

स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू (Health Minister Balbir Singh Sidhu) ने कहा कि देश में बच्चों की मृत्यु दर का सबसे बड़ा कारण निमोनिया है और बच्चों में लगभग 15 प्रतिशत मौतें निमोनिया के कारण ही होती हैं. उन्होने कहा कि अगर हम समय पर निमोनिया की जांच और इलाज करवा लेते हैं, तो निमोनिया के कारण हो रही मौतें रोकी जा सकती हैं. हालांकि पंजाब में बच्चों की मृत्यु दर देश के बाकी हिस्सों के मुकाबले कम हैं, लेकिन पंजाब सरकार निमोनिया से होने वाले बच्चों की मौत को काबू करने और इससे भी बढ़िया स्वास्थ्य नतीजों को सुनिश्चित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

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ये बरतें सावधानियां

बच्चों को निमोनिया से बचाने के लिए मां का दूध, पर्याप्त पूरक आहार, विटामिन-ए सप्लीमेंट, वैक्सीन कवरेज, हाथ धोना और घरों में वायु प्रदूषण घटाना, रोकथाम और समय पर इलाज की जरूरत होती है. सिद्धू ने कहा कि निमोनिया का पता लगाने और इलाज करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक मल्टी-स्टेट पायलट अध्ययन यूएसएआईडी-वृद्धि प्रोजेक्ट (USAID-augmentation project) में हिस्सा लिया है. इस पायलट अध्ययन में स्वास्थ्य एवं तंदुरुस्ती केंद्रों में कम्युनिटी हेल्थ अफसर (CHO) को मल्टी-मॉडल पल्स ऑक्सीमीटर (Multi-model pulse oximeters) प्रदान करके प्रशिक्षण दिया गया था. पंजाब में यह अभियान अप्रैल 2019 को जिला फिरोज़पुर में शुरू किया गया था.

जिला फिरोजपुर में कुल 502 बच्चों (बुखार और खांसी वाले) को मल्टी-मॉडल पल्स ऑक्सीमीटर की सहायता से जांचा गया और इनमें से 27 प्रतिशत बच्चों को निमोनिया के लिए पॉजिटिव पाया गया था जिनमें से 6 गंभीर निमोनिया के मरीज थे. आईएमएनसीआई प्रशिक्षण और मल्टी-मॉडल डिवाइस की मदद से 96 प्रतिशत स्क्रीन किए गए बच्चों की सही जांच की गई और 95 प्रतिशत ने सही इलाज भी प्राप्त किया था.

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