पंजाब में जेल विभाग की भूमि पर खुलेंगे इंडियन ऑयल के आउटलेट, 400 कैदियों को मिलेगा रोजगार

सांकेतिक तस्वीर

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बोर्ड के मैंबर सचिव ए.डी.जी.पी. (जेलं) प्रवीण सिन्हा (Member Secretary ADGP Prisons, Praveen Sinha) ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए बताया कि अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को भी इन आउटलेट पर रोजगार दिया जाएगा

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  • Last Updated: April 9, 2021, 12:25 PM IST
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चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Chief Minister Captain Amarinder Singh) ने पंजाब जेल विकास बोर्ड (Punjab Prisons Development Board) द्वारा जेल विभाग की जमीन पर इंडियन ऑयल कार्पोरेशन Indian Oil Corporation के 12 रिटेल आउटलेट स्थापित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है.पी.पी.डी.बी. की पहली मीटिंग की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने इन प्रोजेक्टों के बारे बताया कि इससे जहां रिहा हुए 400 कैदियों को रोजग़ार मिलेगा वहीं 40 लाख रुपए प्रति महीना राजस्व आने की संभावना है.

रोजगार में महिला कैदियों को प्राथमिकता
बोर्ड के मैंबर सचिव ए.डी.जी.पी. (जेलं) प्रवीण सिन्हा (Member Secretary ADGP Prisons, Praveen Sinha) ने मुख्यमंत्री को जानकारी देते हुए बताया कि अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को भी इन आउटलेट पर रोजगार दिया जाएगा और महिला कैदियों को प्राथमिकता दी जाएगी.कैदियों द्वारा तैयार किए जाने वाले सभी उत्पादों का मार्केटिंग के लिए ब्रांड नाम ’ऊजाला पंजाब’ (Ujala Punjab) रखने को भी कैप्टन अमरिंदर ने मंजूरी दे दी है. जेलों में स्थापित सभी फैक्टरियां, मौजूदा समय जेलों में चल रहे प्रोजेक्टों को संभालने की भी बोर्ड को इजाजत दी गई है.

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3000-4000 कैदियों को कौशल प्रशिक्षण


बोर्ड अधीन जेलों की फैक्टरियों में बैडशीट, तौलिए, फर्नीचर, स्टेशनरी, साबुन, फिनायल और सैनीटाईजर जैसे उत्पाद तैयार किये जाएंगे. ए.डी.जी.पी. सिन्हा ने मुख्यमंत्री से अपील की कि इन उत्पादों को वित्तीय नियमों के मौजूदा प्रबंधों अनुसार अलग-अलग सरकारी विभागों द्वारा सीधा ही खरीदा जाए. उन्होंने कहा कि बोर्ड द्वारा मिल्कफैड और मार्कफैड की मांगों की पूर्ति के लिए एक नालीदार बक्सों (कोरेगेटिड बॉक्स) के निर्माण यूनिट स्थापित करने की भी योजना बनाई जा रही है. बोर्ड को जेल फैक्टरियों में बने उत्पादों की सप्लाई के लिए पंजाब सरकार के अलग-अलग विभागों के साथ सहयोग करने के लिए भी मंजूरी दे दी गई है.सिन्हा ने बताया कि इन प्रोजेक्टों को व्यापारिक तौर पर कारगर और लाभप्रद बनाने के लिए पी.पी.पी. ढंग के अंतर्गत बहुत सी इकाईयां स्थापित की जाएंगी और 3000-4000 कैदियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा जिससे रिहाई के बाद वह अलग-अलग स्थानों पर रोजगार लेने के योग्य बन सकें.
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