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पंजाब चुनाव में सुखबीर बादल के सहारे विजय पताका फहराने की आस में अकाली, कहा- तीसरे नंबर पर रहेगी कांग्रेस

मालवा में अकाली के मतदाताओं का कहना है कि भाजपा से नाता तोड़ना पार्टी का सबसे अच्छा काम है,

Punjab Assembly Election: नरेश गुजराल ने कहा कि इस तरह के मुद्दों और कांग्रेस में फूट का मतलब है कि सत्ताधारी पार्टी आगामी चुनावों में तीसरे नंबर पर रहेगी. मुख्य लड़ाई अकाली-बसपा गठबंधन और आम आदमी पार्टी के बीच होगी.

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बठिंडा. पंजाब के मालवा क्षेत्र में बठिंडा और मुक्तसर शिरोमणि अकाली दल (SAD) के गढ़ रहे हैं. कहा जाता है कि पार्टी का इस इलाके में सिखों का मजबूत वोट बैंक है. इसी के बदौलात अकाली की एक दशक तक पंजाब में सरकार रही. पिछली बार यानी 2017 में अकाली को यहां करारी हार का सामना करना पड़ा. इस हार के लिए साल 2015 में फरीदकोट में बेअदबी और पुलिस फायरिंग के मामलों को जिम्मेदार ठहाराया गया. अब चुनाव से ठीक पहले एक विशेष जांच दल (SIT) ने अकाली के मुखिया 93 वर्षीय प्रकाश सिंह बादल और पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल दोनों से इस मामले में पूछताछ की है. कांग्रेस पर चुनाव से पहले अपने वादे को पूरा करने के दबाव में है. आशंका जताई जा रही है कि चुनाव से पहले इस मामले में बादल की गिरफ्तारी भी हो सकती है. अगर ऐसा हुआ तो फिर चुनाव से पहले पंजाब में ये गेमचेंजर साबित होगा. लिहाजा मालवा क्षेत्र में पार्टी अपनी पैठ मजबूत करने में लगी है.

बादल गांव के कुछ लोगों का कहना है कि राजनीतिक लाभ के लिए इस मामले में 93 वर्षीय एक कमजोर स्वास्थ्य वाले व्यक्ति से सवाल करना क्रूर है. बादल यहां से पांच बार जीत चुके हैं और ये उनका घर है. उन्होंने यहां 2017 में अमरिंदर सिंह को भी हराया था. SAD के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल ने News18 से कहा, 'ये एक राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैं. सीएम अमरिंदर सिंह मूर्खतापूर्ण आरोप लगा रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री ने सुबह 4 बजे पुलिस फायरिंग का आदेश दिया.'

सुखबीर बादल होंगे सीएम के कैंडिडेट
गुजराल ने दो अहम खुलासे भी किए. पहला, उनका कहना है कि पार्टी प्रमुख सुखबीर बादल पार्टी के मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे और उनकी नवीनतम सहयोगी मायावती ने भी यही कहा है. गुजराल का कहना है कि 5 बार के सीएम प्रकाश सिंह बादल अब 93 साल के हैं, खराब स्वास्थ्य के चलते वो पहले की तरह प्रचार नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, 'वो हमेशा हमारे संरक्षक बने रहेंगे. पंजाब में ये चुनाव सुखबीर बादल के नेतृत्व में लड़ा जाएगा.'

भाजपा के चलते हुई हार
गुजराल का कहना है कि पार्टी 2017 में बुरी तरह हार गई, क्योंकि भाजपा ने पंजाब में आप को सत्ता में आने से रोकने के लिए अपने वोट कांग्रेस को ट्रांसफर करके SAD को 'धोखा' दिया. गुजराल ने कहा 'हमने तब इस बारे में भाजपा से शिकायत की थी लेकिन उनके नेता चुप रहे. बीजेपी ने जानबूझकर ऐसा किया जिससे हमारे गठबंधन को ठेस पहुंची. भाजपा के नेता जो अब पार्टी छोड़ रहे हैं, इसकी पुष्टि कर रहे हैं.'

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BSP से गठबंधन का होगा फायदा
अकाली दल का कहना है कि उसका बसपा के साथ बेहतर गठबंधन है और उसने मायावती को पंजाब की 117 में से 20 सीटों पर चुनाव लड़ने की पेशकश की है. दोआबा क्षेत्र में बसपा को आठ सीटें दी गई हैं, जिसमें 42% से अधिक दलित आबादी है. इसी इलाके के होशियारपुर में कांशीराम का जन्म हुआ था. गुजराल कहते हैं, 'दोआबा में लोग उनका बहुत सम्मान करते हैं.'

क्या कहते हैं मालवा के लोग
मालवा में अकाली के मतदाताओं का कहना है कि भाजपा से नाता तोड़ना पार्टी का सबसे अच्छा काम है, खासकर किसान आंदोलन को देखते हुए. बठिंडा से सांसद हरसिमरत बादल और फिरोजपुर से सांसद सुखबीर बादल लोगों को प्रभावित कर रहे हैं कि कैसे हरसिमरत ने कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के समर्थन में आने के लिए अपनी कैबिनेट मंत्री की कुर्सी का त्याग किया. लेकिन यहां के किसान अकाली दल की कहानी को नहीं मानते और सवाल करते हैं कि अध्यादेश पहली बार लाए जाने के बाद SAD भाजपा के साथ क्यों रहा.

बीजेपी को नहीं आने देंगे
यहां कई किसान समूहों का कहना है कि वे चुनाव प्रचार के लिए SAD के लोगों को अपने गांवों में आने नहीं देगें. हालांकि, गुजराल का कहना है कि पंजाब में हाल ही में बिजली संकट लोगों को शिअद शासन के तहत अच्छे दिनों की याद दिला रहा है जब राज्य में बिजली कटौती नहीं हुई थी. News18 ने मालवा में एक दर्जन स्थानों का दौरा किया और हर जगह बिजली कटौती का पता लगाया. एक सरकारी आदेश के तहत उद्योग बंद हो गया, जो एक बड़ा मुद्दा साबित हो सकता है.

तीसरे नंबर पर रहेगी कांग्रेस
गुजराल ने कहा कि इस तरह के मुद्दों और कांग्रेस में फूट का मतलब है कि सत्ताधारी पार्टी आगामी चुनावों में तीसरे नंबर पर रहेगी. मुख्य लड़ाई SAD-बसपा गठबंधन और आप के बीच होगी. गुजराल कहते हैं, 'हताशा में, वे अब नवजोत सिंह सिद्धू को अपना चेहरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अमरिंदर सिंह ऐसा नहीं होने देंगे और वे अंततः हार जाएंगे.'

नाकाम रहे अमरिंदर
मालवा क्षेत्र के लोग अभी भी पूर्व शिअद शासन की समस्याओं के बारे में याद दिलाते हैं, जैसे ड्रग्स की व्यापक उपलब्धता, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार. मुक्तसर गांव में कंवरप्रीत सिंह, जिनका बेटा नशामुक्ति केंद्र में रहा है उन्होंने News18 को बताया, 'हालांकि, अमरिंदर सिंह ने सत्ता में आने के बाद नशीली दवाओं के मुद्दे और बेरोजगारी को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन वो नहीं कर सके. युवा बेरोजगार हैं और नशे की गिरफ्त में हैं. स्थिति SAD शासन के समान है.'

हमें बदनाम करने की साजिश
गुजराल ने आगे कहा, 'नशीले पदार्थों के मुद्दे और बेअदबी के मामलों के मुद्दे का इस्तेमाल हमारे खिलाफ 2017 में हमें बदनाम करने और हमें सत्ता से बाहर करने के लिए किया गया था. लेकिन पिछले पांच सालों में हमारे नेताओं के खिलाफ एक भी सबूत सामने नहीं आया है. अब हम भी भाजपा के साथ नहीं हैं और इसलिए कोई कल्पना कर सकता है कि अगर एक भी सबूत होता तो कोई हमें नहीं बख्शता. लोग मूर्ख नहीं हैं.'

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