Punjab Budget: सदन में गूंजा किसानों की आत्महत्या का मामला, सुसाइड नोट लेकर पहुंचे SAD MLA मजीठिया

मजीठिया ने सदन में दोनों के आत्महत्या के मामले में पंजाब कांग्रेस के प्रधान और सहकारिता मंत्री पर केस दर्ज किए जाने की भी मांग की.

मजीठिया ने सदन में दोनों के आत्महत्या के मामले में पंजाब कांग्रेस के प्रधान और सहकारिता मंत्री पर केस दर्ज किए जाने की भी मांग की.

शिअद के विधायक व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया (SAD MLA and former minister Bikram Singh Majithia) ने पंजाब में किसान पिता और पुत्र के आत्महत्या के मामले को उठाया.

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चंडीगढ़. पंजाब विधानसभा के बजट सत्र (Punjab Budget 2021 Session) के दूसरे दिन मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) ने किसानों की आत्महत्या के मामले को प्रमुखता से उठाया. शिअद के विधायक व पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया (SAD MLA and former minister Bikram Singh Majithia) ने पंजाब में किसान पिता और पुत्र के आत्महत्या के मामले को उठाया. उन्होंने दोनों के सुसाइड नोट का भी सदन में जिक्र किया.

उन्होंने कहा कि आत्महत्या करने वाले सीमांत किसान थे और उन पर सोसाइटी का कर्ज था. मजीठिया ने सदन में दोनों के आत्महत्या के मामले में पंजाब कांग्रेस के प्रधान और सहकारिता मंत्री पर केस दर्ज किए जाने की भी मांग की. मजीठिया ने सदन में कहा कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों के कर्जे माफ करने की बात कही थी, लेकिन वह अपने वादे को पूरा नहीं कर पाए जिसके चलते किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि पिछले 4 सालों में करीब 15 किसानों ने आत्महत्या की है.

स्पीकर को घेरने की कोशिश
सत्र के दौरान विधायकों ने अपने राजनीतिक दलों को छोड़कर गए विधायकों द्वारा अलग पार्टी में जाने और नई पार्टी बनाने को लेकर भी स्पीकर को घेरने की कोशिश की. इस पर स्पीकर राणा केपी सिंह ने कहा कि इस मामले में यदि किसी विधायक या पार्टी को ऐतराज है वे अदालत का रुख कर सकते हैं. विपक्ष के नेता हरपाल चीमा ने कहा कि उन्होंने बीते साल पार्टी से बागी हुए विधायकों पर कार्रवाई करने की लिखित शिकायत की थी, लेकिन स्पीकर महोदय ने उन्हें किसी न किसी बहाने छूट देने की कोशिश की.
बैंस ने कहा राज्यपाल का विरोध स्वाभाविक


लोक इंसाफ पार्टी के नेता सिमरजीत बैंस ने बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल का विरोध किए जाने का तर्क देते हुए कहा कि पंजाब विधानसभा में खेती कानूनों में संशोधन करने के बाद राज्यपाल को भेजा गया था. जिन्हें राज्यपाल ने आगे राष्ट्रपति को भेजा ही नहीं. इसलिए उनका विरोध करना स्वाभाविक था. गौरतलब है कि बीते सोमवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर जमकर हंगामा हुआ था और उनके अभिभाषण की प्रतियों को सदन में ही फाड़ दिया गया था. अकाली विधायकों ने राज्यपाल गो बैक नारे लगाकर उनके स्वागत के लिए बिछाए गए रेड कारपेट को हटा दिया था.
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