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किसानों को ‘अर्बन नक्सल’ कहने पर पंजाब के मुख्यमंत्री, शिअद ने बीजेपी पर हमला बोला

शिअद नेता सिकंदर सिंह मलूका ने कहा,
शिअद नेता सिकंदर सिंह मलूका ने कहा, "यह निंदनीय है कि पंजाब बीजेपी इतना नीचे गिर गई है कि किसानों को अर्बन नक्सल बता रही है." फाइल फोटो

पिछले एक महीने से केंद्र सरकार और किसानों के बीच कृषि कानून (Farm Law) को लेकर मतभेद बना हुआ है. कई दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति न बन पाने के बाद 29 दिसंबर को एक बार फिर बातचीत शुरू होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 27, 2020, 11:13 PM IST
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चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने प्रदर्शन कर रहे किसानों के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने को लेकर रविवार को बीजेपी पर हमला बोला. सिंह ने बीजेपी से कहा कि वह न्याय के लिए लड़ाई लड़ रहे किसानों की छवि खराब करना और उनके लिए ‘अर्बन नक्सल, खालिस्तानी, गुंडा आदि’ कहना बंद करे. मुख्यमंत्री ने एक बयान में कहा, ‘‘अगर बीजेपी अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे नागरिकों और आतंकवादियों, उग्रवादियों और गुंडों में फर्क नहीं कर सकती है तो उसे जनता की पार्टी होने का ढोंग छोड़ देना चाहिए.’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी पार्टी जो प्रदर्शन करने के लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग कर रहे नागरिकों को नक्सल और आतंकवादी कहती है, उसने उस जनता पर शासन करने का हक खो दिया है.’’ शिरोमणि अकाली दल ने भी पंजाब के किसानों को कथित रूप से अर्बन नक्सल बताने पर बीजेपी पर निशाना साधा. शिअद के वरिष्ठ नेता और पार्टी की किसान शाखा के प्रमुख सिकंदर सिंह मलूका ने यहां एक बयान में कहा, ‘‘यह निंदनीय है कि पंजाब बीजेपी इतना नीचे गिर गई है कि वह पंजाब के किसानों को अर्बन नक्सल बता रही है. यह अपमान बर्दाश्त के लायक नहीं है और मै पंजाब बीजेपी को सलाह देना चाहता हूं कि वह अन्नदाताओं के लिए बोले गए शब्द तुरंत वापस ले और इसके लिए माफी मांगे.’’

उन्होंने कहा कि पंजाब बीजेपी को राज्य के परिश्रमी किसानों पर सिर्फ इसलिए गलत ठप्पा नहीं लगाना चाहिए क्योंकि उन्होंने उसके नेताओं के किसान विरोधी बयानों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. पिछले एक महीने से केंद्र सरकार और किसानों के बीच कृषि कानून को लेकर मतभेद बना हुआ है. कई दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों के बीच सहमति न बन पाने के बाद 29 दिसंबर को एक बार फिर बातचीत शुरू होगी. दिल्ली के गाजीपुर और सिंघु बॉर्डर पर किसान कड़ाके की ठंड में भी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. दो दर्जन से ज्यादा किसानों की प्रदर्शन स्थल पर मौत हो चुकी है.

देखना ये है कि नए दौर की बातचीत के बाद समाधान का रास्ता कहां से निकलता है. किसान कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं.
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