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CAA विरोधी प्रस्ताव पर CM अमरिंदर ने 17 जनवरी तक इंतजार करने को कहा

भाषा
Updated: January 16, 2020, 7:18 PM IST
CAA विरोधी प्रस्ताव पर CM अमरिंदर ने 17 जनवरी तक इंतजार करने को कहा
पंजाब सरकार ने मंगलवार को कहा था कि वह सीएए, एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर सदन की भावना के अनुसार आगे बढ़ेगी. (फाइल फोटो)

केरल की तरह पंजाब सरकार द्वारा सीएए के खिलाफ प्रस्ताव लाने के सवाल पर अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने 17 जनवरी तक इंतजार करने को कहा.

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चंडीगढ़. पंजाब (Punjab) के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने गुरुवार को दो दिवसीय विधानसभा सत्र के दौरान नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के खिलाफ प्रस्ताव लाने की संभावना से इनकार नहीं किया. केरल की तरह राज्य सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ प्रस्ताव लाने के सवाल पर सिंह ने 17 जनवरी तक इंतजार करने को कहा.

पंजाब की कांग्रेस सरकार ने मंगलवार को कहा था कि वह सीएए, राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के मुद्दे पर सदन की भावना के अनुसार आगे बढ़ेगी.

मुख्यमंत्री ने हाल ही में कहा था कि उनकी सरकार विभाजन करने वाले इस कानून को लागू नहीं होने देगी. सिंह ने कहा था कि यह कानून एनआरसी और एनपीआर के साथ भारतीय संविधान का उल्लंघन करता है.

बता दें कि केरल विधानसभा ने इस विवादित कानून को खत्म करने के लिए प्रस्ताव पारित किया है. ऐसा करने वाला केरल पहला राज्य है.

क्या है CAA

केंद्र सरकार नागरिकता अधिनियम, 1955 में बदलाव करने हेतु संसद में नागरिकता संशोधन बिल लेकर आई. दोनों सदनों में इस बिल के बहुमत से पास होने के बाद 12 दिसंबर को राष्ट्रपति ने इस पर अपनी मुहर लगा दी. जिसके करीब एक महीने बाद सरकार ने अधिसूचना जारी कर इसे पूरे देश में लागू कर दिया है. इस कानून के मुताबिक अब पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए हुए हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध और पारसी शरणार्थियों को भारत की नागरिकता दे दी जाएगी. कानून लागू होने से पहले इन्हें अवैध शरणार्थी माना जाता था.

क्यों हो रहा है CAA और NRC को लेकर विरोध प्रदर्शनसीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का मानना है कि यह कानून भारत के संविधान के खिलाफ है. प्रदर्शनकारियों का मानना है कि ये भारत के संविधान की सेक्युलर संरचना पर हमला करता है. लोगों का मानना है कि इस कानून के दायरे में पड़ोसी देशों में पीड़ित मुसलमानों को भी शामिल करना चाहिए. उनका यह भी आरोप है कि जब देश में एनआरसी लागू होगा तो दस्तावेजों के अभाव में लाखों लोगों को नागरिकता साबित करने में मुश्किल आएगी या फिर डिटेंशन सेंटर में जाना पड़ेगा.

(भाषा इनपुट के साथ)

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First published: January 16, 2020, 7:17 PM IST
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