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Punjab Election Result: पंजाब में बसपा का 25 साल बाद खाता खुलने के आसार, एक सीट पर जीत की ओर पार्टी

पंजाब में मायावती की पार्टी बसपा इस बार शिअद के साथ गठबंधन करके मैदान में उतरी थी.

पंजाब में मायावती की पार्टी बसपा इस बार शिअद के साथ गठबंधन करके मैदान में उतरी थी.

Punjab assembly elections: पंजाब में इस बार मायावती की पार्टी बसपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन किया है. दोनों दलों ने 26 साल बाद हाथ मिलाया है. इससे पहले दोनों प‍ार्टियों ने 1996 में साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था. उस समय गठबंधन ने राज्‍य की 13 लोकसभा सीटों में से 11 पर जीत दर्ज की थी. विधानसभा चुनावों की बात करें तो पंजाब में बसपा को 1997 के बाद से उसे कोई जीत नहीं मिली है. इस बार पंजाब विधानसभा चुनाव में बसपा ने 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे.

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Punjab elections 2022: 2022 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में करारी हार का सामना कर रही बहुजन समाज पार्टी पंजाब में अपने लिए थोड़ा सुकून देख सकती है. पंजाब की एक सीट नवां शहर बसपा के खाते में आती दिख रही है. अगर बसपा को ये जीत मिली तो 25 साल के बाद ये पहली जीत होगी. चुनाव आयोग के मुताबिक, दोपहर बाद 3.30 बजे तक के चुनावी नतीजों में नवां शहर में बसपा के प्रत्याशी डॉ. नक्षत्र पाल अपने प्रतिद्वंदी से 4970 वोटों से आगे चल रहे थे. उन्हें 35823 वोट मिल चुके थे. पूरे राज्य में बसपा के खाते में 1.83 प्रतिशत वोट आए हैं. 2017 की बात करें तो उस चुनाव में बसपा को पंजाब में 1.5% वोट मिले थे.

पंजाब में इस बार मायावती की पार्टी बसपा ने शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन किया है. दोनों दलों ने 25 साल बाद हाथ मिलाया है. इससे पहले दोनों प‍ार्टियों ने 1996 में साथ मिलकर लोकसभा का चुनाव लड़ा था. उस समय गठबंधन ने राज्‍य की 13 लोकसभा सीटों में से 11 पर जीत दर्ज की थी. इस बार 117 सदस्यीय पंजाब विधानसभा में बसपा ने 20 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे. बाकी 97 सीटों पर शिअद ने अपने प्रत्याशी खड़े किए. शिअद ने चुनाव के दौरान दावा किया था कि उनका गठबंधन राज्य में कम से कम 80 सीटें जीतने जा रहा है. उसे भरोसा था कि पंजाब में अनुसूचित जाति की करीब 32 फीसद आबादी उसकी चुनावी नैया पार लगा देंगे. लेकिन नतीजे कुछ अलग कहानी दिखा रहे हैं.

वोटों की गिनती में बसपा ही नहीं, शिअद भी पिछड़ गई है. 3 बजे तक के चुनाव नतीजों में शिरोमणि अकाली दल को महज एक सीट पर जीत नसीब हुई थी, और 4 सीटों पर वह आगे थी. वोट प्रतिशत के लिहाज से देखें तो 18.24 फीसदी वोट उसके खाते में आए थे. 2017 के चुनाव में शिअद को 15 सीटें मिली थीं जबकि 2012 की बात करें तो 56 सीटों पर उसने कब्जा जमाया था. बसपा को बाकी सीटों पर हार की मुंह देखना पड़ रहा है. खासकर करतारपुर, आदमपुर और फिल्लौर में उसे भारी निराशा मिली है. इन सीटों पर गठबंधन उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन चुनावी नतीजे इसके उलट आ रहे हैं.

पंजाब में वैसे तो बसपा अच्छा प्रदर्शन करने के लिए लंबे समय से तरस रही है. 1997 के बाद से उसे राज्य में कोई सीट नहीं मिली है. 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने 11 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन एक को छोड़कर बाकी कोई भी जमानत तक नहीं बचा पाया था. सिर्फ बसपा के प्रदेश अध्यक्ष अवतार सिंह करीमपुरी फिल्लौर सुरक्षित सीट पर अपनी जमानत बचाने में कामयाब हो पाए थे. 2012 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो बसपा ने 109 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे लेकिन कोई भी जमानत तक नहीं बचा पाया था.

बाकी जगहों की तरह पंजाब में बीएसपी का दलित कार्ड कामयाब नहीं हो पाया है. इसकी वजह बताते हुए पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एम. राजीव लोचन कहते हैं कि पंजाब में दलितों का अपना अलग मूवमेंट रहा है. अगर कोई खुद को दलित पार्टी की तरह यहां पर पेश करती है, तो उसका यहां कोई भविष्य नहीं हो सकता. लेकिन यह समझना होगा कि बसपा यूपी के बाहर जगह बनाने में अभी तक नाकाम साबित रही है.

एक वक्त था, जब बसपा का दलित वोटों के दम पर यूपी की राजनीति में दबदबा रहता था. लेकिन 2022 के यूपी चुनाव में भी उसे बुरी तरह झटका लगा है. दोपहर 3 बजे तक के नतीजे/रुझानों में बसपा यूपी में सिर्फ एक सीट पर आगे चल रही थी. उसे 18 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है.

Tags: Punjab elections, Punjab Elections 2022

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