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Punjab Election Results 2022 : जनता ने तोड़ा 3 पूर्व मुख्यमंत्रियों का भ्रम, दो का सियासी सफर लगभग खत्म

पंजाब चुनाव में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा.

पंजाब चुनाव में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा.

Punjab Election Results 2022: पंजाब चुनाव में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा. इनमें प्रकाश सिंह बादल ...अधिक पढ़ें

    चंडीगढ़. (Punjab Election Results 2022) पंजाब की सियासत (Punjab Politics) में चुनाव प्रचार में बड़े-बड़े राजनीतिक दलों द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, लेकिन बदलाव की आंधी में सब कुछ उल्टा हो गया. चुनाव में तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को हार का सामना करना पड़ा. इनमें प्रकाश सिंह बादल, कैप्टन अमरिंदर सिंह और चरणजीत सिंह चन्नी (Parkash Singh Badal, Captain Amarinder Singh and Charanjit Singh Channi) शामिल हैं. पांच बार मुख्यमंत्री रहे प्रकाश बादल जो दावे कर रहे थे कि मेरे मुकाबले में कोई नहीं हैं 94 साल की उम्र में उनका भी भ्रम टूट गया. इनमें से कैप्टन और बादल का सियासी सफर लगभग अब अंतिम पड़ाव पर ही है.

    सन् 1947 से भारतीय राजनीति में सक्रिय, देश के सबसे उम्रदराज मुख्‍यमंत्री, पंजाब में भाजपा-अकाली दल (BJP-Akali Dal) का प्रमुख चेहरा प्रकाश सिंह बादल अकेले नेता हैं, जो पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री बने है. उन्होंने 1969-1970 तक सामुदायिक विकास, पंचायती राज, पशुपालन, डेयरी आदि से संबंधित मंत्रालयों में कार्यकारी मंत्री के रूप में कार्य किया. वे पंजाब, पंजाबियत और पंजाबियों की रक्षा और उनके हितों के लिए आवाज उठाने के चलते अपने जीवन के लगभग सत्रह वर्ष जेल में बिता चुके हैं. वे भ्रष्टाचार के विरोध में भी आवाज उठाते रहे हैं. प्रकाश सिंह बादल 2002 में पंजाब के मुख्यमंत्री और 1972, 1980 और 2002 में नेता विपक्ष रह चुके हैं. वह केन्द्रीय मंत्री के तौर पर कृषि और सिंचाई मंत्रालय का उत्तरदायित्व भी संभाल चुके हैं.

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    कैप्टन की एंट्री राजनीति में 1980 लोकसभा के चुनाव से हुई थी, लेकिन अमृतसर (Amritsar) में स्वर्ण मंदिर पर सैन्य कार्रवाई ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star) होने पर उन्होंने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. बाद में वे शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में शामिल हो गए तथा तलवंडी साबो हलके से चुनाव जीत कर विधायक बने तथा कृषि एवं पंचायत मंत्री रहे. वर्ष 1992 में उन्होंने शिअद भी छोड़ दिया और अलग से शिरोमणि अकाली दल (पंथिक) का गठन किया, लेकिन वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी शिकस्त तथा स्वयं भी पटियाला से चुनाव हारने पर उन्होंने पार्टी का 1998 में कांग्रेस में विलय कर दिया था. वह वर्ष 1999 से 2002 तथा 2010 से 2013 तक पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तथा वर्ष 2002 से 2007 तक राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे. वर्ष 2014 के आम चुनावों में कैप्टन सिंह ने अमृतसर लोकसभा सीट से अरुण जेटली को एक लाख से अधिक मतों से पराजित किया था. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्हें 16 मार्च को उन्हें राज्य के 26वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी. बीते सितंबर माह में उनकी जगह चरणजीत चन्नी को सीएम बनाया गया.

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    चन्नी के राजनीतिक करियर की बात करें तो 2007 में वे विधानसभा के सदस्य बने थे. बाद में 2015 से 2016 तक वे विपक्ष के नेता भी रहे हैं. इसके बाद 47 की उम्र में कैप्टन सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था. अमरिंदर सिंह मंत्रालय में तकनीकी शिक्षा और प्रशिक्षण मंत्री थे. सितंबर माह में उन्हें कैप्टन की जगह सीएम बनाया गया था.

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