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Charanjit Channi: चरणजीत सिंह चन्नी के नाम की जरा नहीं थी चर्चा, फिर कैसे चुने गए पंजाब के सीएम- INSIDE STORY

Punjab Assembly Election 2022: चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi), पंजाब के अगले मुख्यमंत्री (Punjab Chief Minister) होंगे, लेकिन वे ना तो कांग्रेस आलाकमान (Congress) की पहली पसंद थे और ना ही कांग्रेस विधायक दल ने उनके नाम पर सर्वसम्मति जाहिर की थी.

Punjab Assembly Election 2022: चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi), पंजाब के अगले मुख्यमंत्री (Punjab Chief Minister) होंगे, लेकिन वे ना तो कांग्रेस आलाकमान (Congress) की पहली पसंद थे और ना ही कांग्रेस विधायक दल ने उनके नाम पर सर्वसम्मति जाहिर की थी.

Punjab Assembly Election 2022: चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi), पंजाब के अगले मुख्यमंत्री (Punjab Chief Minister) होंगे, लेकिन वे ना तो कांग्रेस आलाकमान (Congress) की पहली पसंद थे और ना ही कांग्रेस विधायक दल ने उनके नाम पर सर्वसम्मति जाहिर की थी.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़. चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi), पंजाब (Punjab) के अगले मुख्यमंत्री (Chief Minister) होंगे, लेकिन वे ना तो कांग्रेस आलाकमान (Congress) की पहली पसंद थे और ना ही कांग्रेस विधायक दल (CLP) ने उनके नाम पर सर्वसम्मति जाहिर की थी. पंजाब के पहले दलित सीएम के रूप में उनका उभार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा सिख बनाम हिंदू सीएम की लॉबिंग के बीच दिन भर चली उठापटक और हताशा का परिणाम था. हालांकि फैसले के बाद कई नेताओं ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि लगभग 32 प्रतिशत दलित आबादी वाले राज्य में एक दलित की मुख्यमंत्री के तौर पर नियुक्ति एक ‘ठोस राजनीतिक निर्णय’ है- जबकि सभी विपक्षी दल समुदाय को लुभाने की कोशिश करते रहे हैं. राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए अकाली दल (Akali Dal) ने बसपा (BSP) के साथ गठबंधन किया है और ऐलान किया था कि सत्ता में आए तो दलित को उपमुख्यमंत्री बनाएंगे. वहीं आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) को भी दलित वोटबैंक (Dalit Votebank) का सहारा है. बीजेपी (BJP) ने भी राज्य में सत्ता मिलने पर दलित को मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया है.

    पंजाब के एक कांग्रेस नेता ने कहा, ‘संदेश साफ है कि जहां अन्य सभी दल घोषणा कर रहे हैं कि 2022 में सरकार बनाने पर दलितों को महत्वपूर्ण पद दिए जाएंगे, हम पहले ही ऐसा कर चुके हैं.’ चन्नी को मुख्यमंत्री पद देने के साथ कांग्रेस आलाकमान ने यह भी सुनिश्चित किया है कि राज्य कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को पार्टी के जाट चेहरे के रूप में उभरने की अनुमति देते हुए उन्हें नियंत्रण में रखा जाए. पार्टी को उम्मीद है कि एक दलित को मुख्यमंत्री बनाए जाने के फैसले को पार्टी के भीतर गुटों में बंटे नेताओं द्वारा चैलेंज नहीं किया जाएगा, जिनकी नजरें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर थीं.

    राहुल गांधी की पसंद थे सुनील जाखड़
    इससे पहले जब मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया चल रही थी, पंजाब में थोड़ी सी भी राजनीतिक कद रखने वाला नेता अपने नाम के लिए पूरे दिन लॉबिंग करता रहा. सूत्रों ने कहा कि सिख बनाम हिंदू का समीकरण सामने आने से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की शुरुआती पसंद पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ थे. हालांकि सिद्धू जाखड़ को शीर्ष पद देने के लिए राजी नहीं थे, शायद इस डर से कि वे एक नए शक्ति केंद्र के रूप में उभरेंगे. जाखड़ के नाम का दिग्गज नेता अंबिका सोनी ने भी कड़ा विरोध किया था. सूत्रों ने कहा कि उन्होंने शुक्रवार को ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपनी आपत्ति से अवगत करा दिया था.

    ऐसे में एक समझौते के तहत आलाकमान ने अंबिका सोनी से संपर्क किया, जिन्होंने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया. वास्तव में, 79 वर्षीय राज्यसभा सांसद, गांधी परिवार की पुरानी वफादार और तेज राजनीतिक कौशल की धनी अंबिका सोनी ने अपने फैसले को सार्वजनिक करके आलाकमान को भी चौंका दिया. राहुल गांधी के मुलाकात के बाद अंबिका सोनी ने कहा, ‘मैंने मना कर दिया है. चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने की प्रक्रिया चल रही है. महासचिव वहां हैं. दो पर्यवेक्षक भी हैं. वे एक दूसरे से बात कर रहे हैं. सभी विधायकों से बात कर रहे हैं और लिखित में उनके विचार ले रहे हैं.’

    ‘अंबिका सोनी ने जाखड़ का पत्ता काटा’
    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को सिख होना चाहिए क्योंकि पंजाब ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां समुदाय का कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है. और ऐसे में एक बार फिर कांग्रेस में मुख्यमंत्री चुनने के लिए कसरत चलने लगी. सुबह 11 बजे होने वाली सीएलपी की बैठक रद्द कर दी गई, क्योंकि सोनी की सिख पिच ने एक नई बहस छेड़ दी. कुछ नेताओं ने दावा किया कि वह सुखजिंदर सिंह रंधावा के लिए लॉबिंग कर रही थीं. कुछ असहमत थे. एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘कांग्रेस की राजनीति में, जो हो रहा है. अक्सर वह नहीं होता, जो आप देखते या सुनते हैं. यह कभी-कभी विपरीत होता है. उन्होंने कहा कि सोनी की टिप्पणी जाखड़ को बाहर करने और सिख नेता को मुख्यमंत्री बनाने के लिए थी.

    यह भी पता चला कि नवजोत सिद्धू ने रंधावा के चुनाव का विरोध किया, लेकिन आलाकमान से कहा कि अगर कोई दलित अगला मुख्यमंत्री बन जाता है तो उन्हें कोई समस्या नहीं होगी. वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘रंधावा जाखड़ की उम्मीदवारी पर आपत्ति जता रहे थे, कह रहे थे कि एक हिंदू को सिख-बहुल राज्य का सीएम नहीं होना चाहिए. समझौते के रूप में चन्नी को मुख्यमंत्री चुन लिया गया.’ इस बीच, जुलाई में सिद्धू की पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में पदोन्नति के विरोधी और तत्कालीन सीएम अमरिंदर सिंह का समर्थन करने वाले कांग्रेस सांसदों ने राज्य के पूर्व प्रमुख प्रताप सिंह बाजवा के आवास पर बैठक की और जाखड़ का विरोध करने का फैसला किया.

    ‘मनीष तिवारी का नाम भी आया रेस में’
    बाजवा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के सवाल पर एक सांसद ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें कोई समस्या नहीं है. वहीं एक अन्य सांसद ने कहा, ‘अगर एक हिंदू को मुख्यमंत्री बनाना है तो आनंदपुर साहिब से सांसद मनीष तिवारी क्यों नहीं.’ सूत्रों ने कहा कि विधायकों के बीच भी राय बंटी हुई थी. एक ने दावा किया कि जाखड़ को 38 वोट मिले, उसके बाद रंधावा को 18 वोट मिले और अमरिंदर की सांसद पत्नी परनीत कौर को 12 और सिद्धू को पांच वोट मिले. जैसा कि यह स्पष्ट हो गया कि आलाकमान एक सिख उम्मीदवार को देख रहा था, रंधावा सबसे आगे निकल गए. इसी बीच सिद्धू ने रंधावा के खिलाफ अपनी टंगड़ी फंसा दी.

    कोई आम सहमति नहीं बनने और समय समाप्त होने के साथ- पार्टी चाहती थी कि नया मुख्यमंत्री पितृ पक्ष शुरू होने से पहले ही शपथ ग्रहण कर ले. फिर आलाकमान ने चन्नी के नाम पर विचार किया. रिपोर्ट के मुताबिक कई नेताओं ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि उनके नाम का प्रस्ताव किसने रखा था. दिन में एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘उनका सफाया सुनिश्चित करने के लिए नाम मंगाए गए हैं. यह एक क्लासिक हाईकमान ऑपरेशन है. अराजकता और भ्रम की स्थिति होगी और अंत में कांग्रेस अध्यक्ष किसी को नामित करेंगे. एक अन्य नेता ने कहा कि निवर्तमान वित्तमंत्री मनप्रीत बादल चन्नी का समर्थन करने वाले एकमात्र नेता हैं.

    चन्नी के खिलाफ अंत तक चलती रही लॉबिंग
    सूत्रों ने कहा कि लोकसभा सांसद और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अमर सिंह का नाम भी उनके खेमे द्वारा प्रस्तावित किया गया था. फतेहगढ़ साहिब से सांसद सिंह दलित हैं, जिन्हें सिद्धू ने अपने सलाहकारों में से एक के तौर पर नियुक्त किया था. अंत में, राहुल गांधी अपनी मां सोनिया गांधी के आवास पर गए और चन्नी के नाम पर उनकी स्वीकृति ले ली. इसके बाद उन्होंने एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की- और एआईसीसी महासचिव हरीश रावत को चन्नी के सीएलपी नेता चुने के फैसले का ऐलान करने को कहा.

    रावत ने मीडिया से कहा कि चन्नी के नाम पर सर्वसम्मति से फैसला लिया गया, लेकिन सूत्रों ने कहा कि चन्नी के खिलाफ आखिरी मिनट तक लॉबिंग चलती रही. पंजाब इकाई द्वारा हाई कमांड को बहुत सारे टेक्स्ट मैसेज भेजे गए थे.

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