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Analysis: कैसे सिद्धू, रावत और कैप्टन ने ट्विटर पर लड़ी पंजाब की सियासी लड़ाई?

Analysis: कैसे सिद्धू, रावत और कैप्टन ने ट्विटर पर लड़ी पंजाब की सियासी लड़ाई?

खास कर सिद्धू और कैप्टन के बीच तो जबरदस्त जंग देखने को मिली. (फ़ाइल फोटो)

खास कर सिद्धू और कैप्टन के बीच तो जबरदस्त जंग देखने को मिली. (फ़ाइल फोटो)

Punjab Political Crisis: रात 11:42 बजे पंजाब कांग्रेस प्रभारी रावत ने शनिवार को तत्काल सीएलपी की बैठक करने के फैसले के बारे में ट्वीट किया. दस मिनट बाद रात 11 बजकर 52 मिनट पर पीसीसी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने सभी विधायकों को मौजूद रहने का निर्देश दिया.

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    नई दिल्ली. पंजाब में सियासी संकट (Punjab Political Crisis) के दौरान ट्विटर पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं – नवजोत सिंह सिद्धू, कैप्टन अमरिंदर सिंह और हरीश रावत के बीच ज़ुबानी जंग देखने को मिली. जब भी मौका मिला इन तीनों ने सही वक्त पर अपनी-अपनी बातें रखीं. कई बार इन सबने एक-दूसरे पर निशाना भी साधा है. खास कर सिद्धू और कैप्टन के बीच तो जबरदस्त जंग देखने को मिली.

    सिद्धू के ट्वीट में उपभोक्ताओं के लिए बिजली की दर, बिजली खरीद समझौते (पीपीए) की समाप्ति से लेकर कैप्टन सरकार के खिलाफ खुली नाराजगी तक शामिल थी. इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी सिद्धू पर निशाना साधा. कैप्टन ने उन्हें पार्टी का नेतृत्व करने के लिए ‘अनफिट’ कहा. सिंह ने ये भी कहा है कि अगर राज्य की कमान उनके हाथों में दी गयी तो पंजाब की सुरक्षा दांव पर लग जाएगी.

    मंगलवार को सिद्धू के पंजाब कांग्रेस प्रमुख के पद से इस्तीफा देने के तुरंत बाद, सिंह ने कहा, ‘वो स्थिर व्यक्ति नहीं हैं.’ सिंह ने ट्वीट किया, ‘मैंने तुमसे ऐसा कहा था… वो स्थिर व्यक्ति नहीं है और पंजाब के सीमावर्ती राज्य के लिए फिट नहीं है.’ इस्तीफा देने के बाद सिद्धू ने एक नया वीडियो ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वह अपनी आखिरी सांस तक सच्चाई के लिए लड़ते रहेंगे. उन्होंने लिखा, ‘आखिरी सांस तक हक और सच्चाई के लिए लड़ते रहेंगे.’ दूसरी ओर, पार्टी से नाराज कैप्टन ने अपने ट्विटर बायो से “कांग्रेस” का उल्लेख हटा दिया.

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    शुक्रवार को रात 11:42 बजे पंजाब कांग्रेस प्रभारी रावत ने शनिवार को तत्काल सीएलपी की बैठक करने के फैसले के बारे में ट्वीट किया. दस मिनट बाद रात 11 बजकर 52 मिनट पर पीसीसी प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू ने सभी विधायकों को मौजूद रहने का निर्देश दिया. घोषणा अचानक लग सकती है, लेकिन इससे पहले के घटनाक्रम इस बात का संकेत हैं कि कांग्रेस आलाकमान पर कैप्टन अमरिंदर सिंह विरोधी लॉबी के दबाव में कार्रवाई करने का प्रेशर था.

    40 विधायकों ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर 18 सूत्री एजेंडे का जायजा लेने के लिए सीएलपी की मांग की थी, जिसे पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को चुनाव से पहले पूरा करने का काम सौंपा गया था. सूत्रों ने कहा कि पत्र ने आलाकमान को असमंजस में डाल दिया है. रावत ने, हालांकि कई मौकों पर दोहराया है कि सिंह को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया था, लेकिन विधायकों के एक बड़े हिस्से का पत्र राजनीतिक रूप से इतना महत्वपूर्ण था कि इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था.

    पार्टी के विश्वसनीय सूत्रों ने खुलासा किया कि विचार-विमर्श के बाद, आलाकमान ने राज्य के अधिकांश विधायकों के मूड को ‘चेंज़’ करने के लिए दो पार्टी पर्यवेक्षकों को भेजने का फैसला किया था. पंजाब कांग्रेस के भीतर की उथल-पुथल मई में एक युद्ध में बदल गई, जिसके बाद पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व हस्तक्षेप करने के लिए दौड़ पड़ा. गुटबाजी को सुलझाने के लिए 29 मई को राज्यसभा सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था

    कमेटी ने पंजाब के करीब 150 नेताओं से मुलाकात की, जिनमें से कई ने कैप्टन पर बादल के साथ हाथ मिलाने और चुनावी वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया. 18 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री की आपत्तियों को नजरअंदाज करते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने चार कार्यकारी अध्यक्षों के साथ सिद्धू को राज्य इकाई का प्रमुख नियुक्त किया.

    Tags: Navjot singh siddhu, Punjab

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