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पंजाब: कैप्टन के मंत्रियों ने किया मीटिंग का बायकॉट, कहा- जब तक ‘वो’ है तब तक हम नहीं...
Chandigarh-Punjab News in Hindi

News18Hindi
Updated: May 11, 2020, 10:56 PM IST
पंजाब: कैप्टन के मंत्रियों ने किया मीटिंग का बायकॉट, कहा- जब तक ‘वो’ है तब तक हम नहीं...
कैप्टन अमरिंदर सिंह देश के पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने लॉकडाउन के दौरान शराब बेचने की इजाजत मांगी थी.

जब भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ रही है, तब पंजाब (Punjab) में अलग तरह की लड़ाई छिड़ गई है. राज्य के मंत्रियों और मुख्य सचिव की यह लड़ाई नाक का सवाल बन गई है.

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नई दिल्ली. पंजाब में मंत्रियों और मुख्य सचिव करन अवतार सिंह के बीच हुई बहस नाक का सवाल बन गई है. दो दिन पहले हुई बहस के बाद मंत्री प्री-कैबिनेट मीटिंग छोड़कर बाहर चले गए थे. यह मीटिंग सोमवार को होनी थी, लेकिन हो नहीं सकी. मंत्रियों ने राज्य के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) से मुख्य सचिव को हटाने की मांग की. उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि जब तक करन अवतार सिंह (Karan Avtar Singh) मुख्य सचिव के पद पर रहेंगे, तब तक मंत्री मीटिंग में नहीं आएंगे.

भारत समेत जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस (Coronavirus) से लड़ रही है, तब पंजाब (Punjab) में अलग तरह की लड़ाई छिड़ गई है. पंजाब में शनिवार को एक्साइज पॉलिसी (आबकारी नीति) को लेकर प्री-कैबिनेट मीटिंग हुई. मंत्रियों ने मीटिंग में कुछ प्रस्ताव रखे. मुख्य सचिव ने प्रस्ताव खारिज कर दिए. यह विवाद इतना बढ़ा कि पहले वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल (Manpreet Singh Badal) मीटिंग छोड़कर गए और उनके पीछे बाकी मंत्री भी निकल गए.

हिंदस्तान टाइम्स के मुताबकि सोमवार को कैबिनेट मीटिंग से पहले मंत्रियों ने अनौपचारिक बैठक की. इसमें तय किया गया कि यदि मुख्य सचिव कैबिनेट मीटिंग में रहते हैं तो वे सब वॉकआउट करेंगे. इसके बाद मुख्य सचिव करन अवतार सिंह को सोमवार की कैबिनेट मीटिंग से बाहर रहने को कहा गया. करन अवतार सिंह की जगह एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) सतीश चंद्र ने मीटिंग में कोआर्डिनेशन का काम संभाला.



जैसे ही कैबिनेट की मीटिंग शुरू हुई, मंत्रियों ने मुख्यमंत्री अमरिंदर से मांग की कि करन अवतार सिंह को मुख्य सचिव पद से हटा दिया जाए.  जेल मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने बताया, ‘मुख्य मंत्री ने हमारी मांग मान ली है. बताया जाता है कि करन अवतार सिंह माफी मांगकर सारे विवाद को खत्म करना चाहते हैं. कई मंत्री भी इसके लिए तैयार हैं. लेकिन वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल इसके लिए तैयार नहीं हैं.



माना जा रहा है कि मंत्रियों और मुख्य सचिव का यह विवाद संवैधानिक रूप से परेशानी खड़ा कर सकता है. नियमों के मुताबिक राज्य का मुख्य सचिव ही कैबिनेट सचिव भी होता है. कैबिनेट की मीटिंग बुलाना और कोऑर्डिेनशन करना उसी का काम है. यहां तक कि आधिकारिक रिकॉर्ड पर दस्तखत भी कैबिनेट सचिव के ही होते हैं. ऐसे में किसी और अधिकारी को बुलाकर बार-बार कैबिनेट की बैठक नहीं हो सकती है.

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First published: May 11, 2020, 8:43 PM IST
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