पंजाबः निहंग सिखों ने अमृतसर में मनाया बंदी छोड़ दिवस, दिखाई घुड़सवारी की कला

फाइल फोटोः निहंग सिखों ने बंदी छोड़ दिवस के मौके पर घुड़सवारी की कला का प्रदर्शन किया. Punjab, Nihang Sikhs, Horse riding skills, Bandi Chhor Divas, Amritsar
फाइल फोटोः निहंग सिखों ने बंदी छोड़ दिवस के मौके पर घुड़सवारी की कला का प्रदर्शन किया. Punjab, Nihang Sikhs, Horse riding skills, Bandi Chhor Divas, Amritsar

पंजाब (Punjab) के अमृतसर में बंदी छोड़ दिवस (Bandi Chhor Divas) के मौके पर निहंग सिखों (Nihang Sikhs) ने घुड़सवारी की कला का प्रदर्शन किया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 15, 2020, 6:25 PM IST
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अमृतसर. पंजाब (Punjab) के अमृतसर में बंदी छोड़ दिवस (Bandi Chhor Divas) के मौके पर निहंग सिखों (Nihang Sikhs) ने घुड़सवारी का प्रदर्शन किया. दिवाली के अगले दिन सिख धर्म के अनुयायी बंदी छोड़ दिवस मनाते हैं.

दरअसल बंदी छोड़ दिवस मनाने का इतिहास पुराना है. जहांगीर के शासनकाल में सिख धर्म के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए बादशाह जहांगीर ने सिखों के छठवें गुरु हरगोविंद साहिब को बंदी बना लिया. गुरु हरगोविंद साहिब को ग्वालियर के किले में कैद कर दिया गया, जहां 52 हिंदू राजा पहले से ही कैद थे.


गुरु हरगोविंद साहिब को बंदी बनाने के बाद संयोग से जहांगीर बहुत बीमार पड़ गया, काफी इलाज के बाद जब जहांगीर ठीक नहीं हुआ तब बादशाह के काजी ने उसे सलाह दी कि बीमार पड़ने की वजह एक सच्चे गुरु को कैद करना है. गुरु हरगोविंद साहिब को छोड़ दिया जाए... जहांगीर ने ऐसा ही किया.



हालांकि जहांगीर के फैसले के बाद भी गुरु हरगोविंद साहिब ने ग्लावियर जेल से अकेले रिहा होने से इनकार कर दिया और बोले कि जबतक मेरे साथ बंदी सभी कैदियों को नहीं छोड़ा जाएगा, वे रिहा नहीं होंगे.

गुरु हरगोविंद साहिब की दृढ़ता के सामने जहांगीर (Jehangir) को झुकना पड़ा. लेकिन, आदेश जारी करते वक्त मुगल बादशाह ने एक शर्त रख दी. जहांगीर की शर्त थी कि सिख गुरु के साथ वहीं राजा बाहर जा सकेंगे जो सीधे गुरुजी का कोई अंग या कपड़ा पकड़े होंगे.

जहांगीर की सोच थी कि एक साथ ज्यादा राजा गुरु हरगोविंद साहिब के शरीर को छू नहीं पाएंगे और उसकी कैद में ही रह जाएंगे. लेकिन, जहांगीर की चालाकी देखते हुए हरगोविंद साहिब ने एक बड़ा कुर्ता सिलवाया और उसमें 52 कलियां लगवाईं. इस एक-एक कली पकड़ते हुए सभी कैद राजा गुरु हरगोविंद साहिब के साथ जहांगीर की कैद से आजाद हो गए...

मुगल बादशाह की कैद से रिहा होने के बाद जब गुरु हरगोविंद साहिब अमृतसर पहुंचे तो उनका दीप जलाकर स्वागत किया गया. आगे चलकर इस दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाने का फैसला लिया गया.

जहांगीर के शासन से लेकर अब तक सिख धर्म के अनुयायी दिवाली के अगले दिन को बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं.
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