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पंजाब के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की कमी, फिर पावरकट का करना पड़ सकता है सामना

कॉरपोरेशन के एक अधिकारी ने कहा है कि कोयले की कमी के कारण हमने कोयले के संरक्षण के लिए पीएसपीसीएल द्वारा संचालित बिजली संयंत्र को पहले ही बंद कर दिया है (फ़ाइल फोटो)

Punjab Thermal Power plants: बिजली खरीद समझौते (पीपीए) (Power Purchase Agreement) के अनुसार, बिजली उत्पादन कंपनियों दोनों सरकारी और निजी को कम से कम 28 दिनों के लिए स्टॉक बनाए रखना होता है.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़. पंजाब में थर्मल पावर प्लांट (Thermal power plants) कोयले की भारी कमी से जूझ रहे हैं. अधिकांश के पास ईंधन का कुछ दिनों या सप्ताह भर का ही भंडार बचा है. अधिकारियों का कहना है कि पंजाब में थर्मल प्लांट को कोयले की आपूर्ति करने वाले पूर्वी राज्यों में भारी बाढ़ के कारण स्टॉक घट गया है. जल्द ही कोयले की आपूर्ति नहीं की गई तो पंजाब को फिर से पावरकट का सामना करना पड़ेगा.

    बताया जा रहा है कि बिजली खरीद समझौते (पीपीए) (Power Purchase Agreement) के अनुसार, बिजली उत्पादन कंपनियों दोनों सरकारी और निजी को कम से कम 28 दिनों के लिए स्टॉक बनाए रखना होता है. लेकिन पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ढिलाई के कारण स्टॉक की न्यूनतम निर्धारित मात्रा का रखरखाव कभी नहीं किया जाता है.

    हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक जीवीके इंडस्ट्रीज द्वारा संचालित 540 मेगावाट (मेगावाट) गोइंदवाल साहिब संयंत्र की स्थिति सबसे खतरनाक है क्योंकि वहां केवल 3 दिनों के लिए ईंधन आरक्षित है. बठिंडा में लहरा मोहब्बत में सरकार द्वारा संचालित 920 मेगावाट के गुरु हरगोबिंद थर्मल प्लांट और रोपड़ में 840 मेगावाट के प्लांट में केवल 4 और 8 दिनों का स्टॉक बचा है. इसके अलावा, तलवंडी साबो में वेदांता के 1,980 मेगावाट के संयंत्र और नाभा में एल एंड टी द्वारा संचालित 1,400 मेगावाट के बिजली संयंत्र की स्थिति भी बेहतर नहीं है क्योंकि दोनों के पास क्रमशः 9 और 11 दिनों के लिए कोयला भंडार बचा है.

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    कॉरपोरेशन के एक अधिकारी ने कहा है कि कोयले की कमी के कारण हमने कोयले के संरक्षण के लिए पीएसपीसीएल द्वारा संचालित बिजली संयंत्र को पहले ही बंद कर दिया है. हमने निजी कंपनियों से पीपीए के मुताबिक अपना कोयला स्टॉक बढ़ाने को कहा है. अधिकारी ने बताया कि कॉरपोरेशन सितंबर और अक्टूबर में ग्रिड को बिजली बेचता था, जब बिजली की कीमतें अधिक रहती थीं. निगम लाभ कमाने के मौके से चूक रहा है क्योंकि सरकारी और निजी दोनों संयंत्रों के पास अपर्याप्त कोयला भंडार है. कभी-कभी, बिजली की कीमतें 10 रुपए प्रति यूनिट से अधिक हो जाती हैं और यह हमारे लिए राजस्व उत्पन्न करने का एक अच्छा अवसर था. अधिकारी ने कहा कि पीएसपीसीएल ने पिछले वर्षों में बिजली बेचकर लगभग 300 करोड़ रुपए का लाभ कमाया था.

    पीएसपीसीएल के अध्यक्ष-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) ए वेणु प्रसाद ने स्वीकार किया कि जीवीके संचालित संयंत्र की स्थिति चिंताजनक थी. उन्होंने कहा कि हम सभी संभावित साधनों की खोज करके प्रबंधन कर रहे हैं. अगले सप्ताह तक स्थिति में सुधार होने की संभावना है क्योंकि हमें और आपूर्ति आने की उम्मीद है.

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