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पंजाब में अकाली दल के लिए मुसीबत बने बाग़ी, माघी मेला में ढींढसा पर जमकर बरसे बादल

News18Hindi
Updated: January 15, 2020, 1:36 PM IST
पंजाब में अकाली दल के लिए मुसीबत बने बाग़ी, माघी मेला में ढींढसा पर जमकर बरसे बादल
शिरोमणि अकाली दल (SAD) के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल

शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने मुक्तसर में ये रैली आयोजित की थी. सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) ने रैली में सुखदेव सिंह ढींढसा पर तंज कसते हुए कहा कि ये लोग पार्टी से सब कुछ हासिल करने के बाद उसकी पीठ में छुरा घोपते हैं.

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  • Last Updated: January 15, 2020, 1:36 PM IST
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चंडीगढ़. मेला माघी के मौके पर मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने मुक्तसर में राजनीतिक समागम का आयोजन किया. हालांकि, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) ने ऐसे समागम से दूरी बनाना बेहतर ही समझा. दोनों पार्टियों ने धर्म को राजनीति के साथ मिलाने के खिलाफ 'अकाल तख्त' के आह्वान का पालन करने का दावा किया है. अकाली दल के राजनीतिक समागम में सुखबीर सिंह बादल ने असंतुष्‍ट नेता सुखदेव सिंह ढींढसा और उनके बेटे परमिंदर सिंह ढींढसा पर ताबड़तोड़ निशाने साधे.

अकाली दल ने मुक्तसर में ये रैली (राजनीतिक समागम) इसलिए आयोजित की थी, ताकि वह अपनी पार्टी का शक्ति प्रदर्शन कर सके. इस रैली के जरिये बादल ने ये जाहिर करने की कोशिश है कि अकाली दल एक पंथिक पार्टी है. सुखबीर सिंह बादल ने रैली में सुखदेव सिंह ढींढसा पर तंज कसते हुए कहा, 'ये लोग पार्टी से सब कुछ हासिल करने के बाद उसकी पीठ में छुरा घोपते हैं. सुखदेव सिंह ढींढसा ने सिर्फ एक चुनाव जीता, फिर भी पार्टी ने उनको सब कुछ दिया. आज इनकी भाषा बदल गई है.'

सुखबीर सिंह बादल ने रैली में कहा, 'पहले गुरु धामों पर महंतों का कब्जा था. 1920 में शिरोमणि अकाली दल बना. ये देश की दूसरी सबसे पुरानी पार्टी है. हमें किसी से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है. लोगों को शिरोमणि अकाली दल पर यकीन है. ये पार्टी बादल परिवार की जायदाद नहीं है. मुझसे पहले भी बहुत प्रधान हुए हैं और बाद भी होंगे.'


शिरोमणि अकाली दल ने शनिवार असंतुष्‍ट नेता सुखदेव सिंह ढींढसा और उनके बेटे परमिंदर सिंह ढींढसा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. सुखदेव सिंह ढींढसा ने 2017 विधानसभा चुनाव में अकाली दल के खराब प्रदर्शन के बाद सुखबीर सिंह बादल से शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की मांग की थी. हालांकि, उनकी मांग को तवज्जो नहीं मिली.

बता दें कि हाल के दिनों में अकाली दल कई मुसीबतों का सामना कर रहा है. पार्टी ने बीते साल दिसंबर में अपना 99वां स्थापना दिवस मनाया, लेकिन इस मौके पर पार्टी के जाने-माने नेता गैरहाजिर थे. इसे पार्टी में अंदरूनी कलह के तौर पर देखा जा रहा है.

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First published: January 15, 2020, 12:34 PM IST
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