RSS प्रमुख मोहन भागवत को खतरा! केंद्र ने पंजाब सरकार से सुरक्षा-समीक्षा करने को कहा

पंजाब में आरएसएस पर सबसे बड़ा हमला 1989 में मोगा में हुआ था, जिसमें 25 स्वयंसेवकों की मौत हो गई थी.

पंजाब में आरएसएस पर सबसे बड़ा हमला 1989 में मोगा में हुआ था, जिसमें 25 स्वयंसेवकों की मौत हो गई थी.

Review Security of RSS chief: निहंगों ने आरोप लगाया था कि 28 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर किसानों के धरना स्थल पर आरएसएस ने अपने कार्यकर्ताओं को भेजा था, जिससे वे किसान आंदोलन को समाप्त कर सकें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 27, 2021, 5:37 PM IST
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चंडीगढ़. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पंजाब सरकार (Punjab) को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत की सुरक्षा-समीक्षा करने को कहा है. दरअसल, आरएसएस पर किसान आंदोलन के दौरान दिल्ली धरनास्थल को खाली कराए जाने के आरोपों के बाद कुछ निहंगों ने मोहन भागवत को कथित तौर पर धमकी दी थी. गृह मंत्रालय (Home Ministry) ने इन आरोपों का हवाला देते हुए पंजाब सरकार को आरएएसएस प्रमुख मोहन भागवत की सुरक्षा-समीक्षा करने के निर्देश जारी किए हैं.

पंजाब के साथ हरियाणा और महाराष्ट्र को भी निर्देश
एक दैनिक समाचार पत्र में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया है कि सिंघु बार्डर पर 28-29 जनवरी की रात को निहंगों ने एक भड़काऊ भाषण के जरिए आरएसएस प्रमुख को सीधे तौर पर धमकियां दी थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि 28 जनवरी को सिंघु बॉर्डर पर किसानों के धरना स्थल पर आरएसएस ने अपने कार्यकर्ताओं को भेजा था, जिससे वे किसान आंदोलन को समाप्त कर सकें. इसका एक वीडियो भी मौजूद है, जिसमें प्रतिशोध लेने की भी बात कही गई है.

निहंगों ने दी चेतावनी
गृह मंत्रालय ने यह पत्र पंजाब सरकार ही नहीं, अपितु हरियाणा और महाराष्ट्र की सरकारों को भी भेजा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक निहंगों ने आरएसएस प्रमुख को चेतावनी दी थी कि किसानों के प्रदर्शन स्थल पर आरएसएस के वॉलंटियर भेजने की कोई भी कोशिश हिंसा को बढ़ावा दे सकती है. पत्र में कहा गया है कि इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए तीनों राज्यों में आरएसएस प्रमुख की सुरक्षा की समीक्षा करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए.



आरएसएस नेताओं पर हमलों का लंबा इतिहास

गौरतलब है कि पंजाब में आरएसएस के नेताओं पर हमलों का लंबा इतिहास रहा है. आतंकवाद के दौर से ही हिंदू संगठनों और आरएसएस के नेता चरमपंथियों के निशाने पर रहे हैं. पंजाब में इस वक्त आरएसएस की करीब 900 शाखएं चलती हैं, जिनमें से दो दर्जन से ज्यादा शाखाएं पाकिस्तान के सीमावर्ती जिलों में लगती हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि पंजाब में आरएसएस पर सबसे बड़ा हमला 1989 में मोगा में हुआ था, जिसमें 25 स्वयंसेवकों की मौत हो गई थी.
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