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पंजाब में क्यों काटी जा रही है उद्योगों और दफ्तरों की बिजली?

पंजाब के ग्रामीण इलाकों में एक हफ्ते से भी ज्यादा वक्त से बिजली आपूर्ति बाधित है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

पंजाब के ग्रामीण इलाकों में एक हफ्ते से भी ज्यादा वक्त से बिजली आपूर्ति बाधित है. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

Power Crisis in Punjab: राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक हफ्ते से भी ज्यादा वक्त से बिजली आपूर्ति बाधित है और धान रोपाई के मौसम में किसानों को बुरे हाल से गुज़रना पड़ रहा है.

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    चंडीगढ़. पंजाब में पड़ रही भयानक गर्मी की वजह से राज्य अत्यधिक बिजली के संकट के गुजर रहा है. वहां पिछले दो दिनों से लंबे वक्त के लिए बिजली आपूर्ति काटी जा रही है.

    कितना बड़ा है ये संकट और सरकार इससे निपटने के लिए क्या कर रही है- आइए समझते हैं.

    कितना बड़ा है ये संकट
    मोहाली के कई इलाकों में पिछले 24 घंटों में 14 घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रही है, पटियाला और बठिंडा में 7 घंटे और कपूरथला के कुछ हिस्सों, तरन तारन, फिरोज़पुर, मुक्तसर और लुधियाना में 6 से 12 घंटों के बीच बिजली काटी गई है.

    टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के ग्रामीण इलाकों में एक हफ्ते से भी ज्यादा वक्त से बिजली आपूर्ति बाधित है और धान रोपाई के मौसम में किसानों को बुरे हाल से गुज़रना पड़ रहा है. इस दौरान किसानों को धान की रोपाई में पानी डालने के लिए मोटर चलानी होती है इसलिए उन्हें बगैर बाधा के आपूर्ति की ज़रूरत होती है. ईधर मानसून में देरी के चलते तापमान और उमस भी अपने तेवर दिखा रहे हैं.

    सरकार की क्या प्रतिक्रिया रही?
    पंजाब सरकार ने उद्योगों की बिजली आपूर्ति पर कुछ प्रतिबंध लगाए हैं और सरकारी दफ्तरों का समय भी बदल कर सुबह 8 से  दोपहर 2 तक कर दिया है. मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सभी सरकारी दफ्तरों से गुहार लगाई है कि बिजली का संभल कर इस्तेमाल करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि हालात बहुत विकट हैं और पंजाब में बिजली की मांग 14,500 मेगावॉट तक जा पहुंची है.

    क्या इससे जनता में बेचैनी बढ़ेगी
    जालंधर में एक घरेलू उपभोक्ता आधी रात को अपने घर से निकल कर पंजाब स्टेट पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी पीएसपीसीएल के शिकायत कार्यालय पहुंच गया और रात में दो बजे वहां धरने पर बैठ गया. हालांकि उसकी योजना शिकायत कार्यालय का घेराव करने की थी लेकिन वहां उसका दुखड़ा सुनने वाला कोई मौजूद नहीं था.

    निवासी बिजली आपूर्ति में हो रही कटौती को लेकर सोशल मीडिया पर भी भड़ास निकाल रहे हैं. शिरोमणि अकाली दल ने भी राज्य में कई जगह धरना प्रदर्शन किया. बिजली कटौती के विरोध में शिअद के कार्यकर्ताओं ने पूर्व मंत्री दलजित सिंह चीमा की अगुवाई में रोपड़ में हाथपंखे वितरित किए. जीरकपुर में भी स्थानीय एमएलए एन के शर्मा ने निवासियों के साथ बालटाना में विरोध प्रदर्शन किया.

    उधर सैकड़ों किसानों ने फगवाड़ा चीनी मिल चौक पर राष्ट्रीय हाइवे बंद कर दिया. उनका आरोप है कि जहां धान की रोपाई के दौरान 8 घंटे निर्बाधित बिजली आपूर्ति चाहिए होती है ऐसे में उन्हें 4-5 घंटे बिजली मिल रही है.

    अचानक हुए इस अभाव की जड़ कहां है
    पीएसपीएलसी के प्रवक्ता का कहना है कि अभाव के पीछे, मानसून में देरी, धान की रोपाई और बठिंडा जिला में तलवंडी साबू थर्मल पॉवर प्लांट का खराब हो जाना वजह रहा है.

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    पीएसपीएलसी डाटा के अनुसार पंजाब के थर्मल प्लांट की क्षमता 6,840 मेगावाट बिजली पैदा करने की है, लेकिन वे 5,640 मेगावॉट ही कर रहे हैं और तो और रोपण थर्मल प्लांट (210 मेगावाट) और तलवंडी साबू थर्मल प्लांट (990 मेगावाट) भी काम नहीं कर रहे हैं.

    फिर निजी थर्मल प्लांट
    पंजाब पहले से ही भटिंडा थर्मल प्लांट को बंद कर चुका है क्योंकि वह पूरी तरह से निजी प्लांट पर निर्भर था, वहीं तलवंडी साबू थर्मल प्लांट अपनी क्षमता से 50 फीसद ही बिजली पैदा कर रहा है. पीएसपीसीएल अब केवल बारिश के भरोसे है. भाखरा बेस मेनेजमेंट बोर्ड हायड्रल बिजली उत्पादने के लिए पानी की कमी से जूझ रहा है.

    क्या प्राधिकरण ने पहले से चेताया था?
    ट्रिब्यून में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक पीएसईबी इंजीनियर एसोसियेशन ने पीएसपीसीएल प्रबंधन और राज्य सरकार की आम आदमी के खिलाफ जाने की पहल की कड़ी आलोचना की थी. इंजीनियर का कहना था हमने बिजली के बढ़ते अभाव और पॉवर अथॉरिटी के गलत फैसलों को लेकर सरकार और पीएसपीसीएल को चेताया था कि आगे चलकर ये परेशानी का सबब बनेगा लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया.

    एसोसियेशन के अध्यक्ष जसवीर सिंह धीमन का कहना है कि कितनी बड़ी विडंबना है कि हम बिजली की कमी से जूझ रहे हैं और दो अच्छी भली थर्मल यूनिट बंद पड़ी हैं.

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