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अमृतसर दशहरा हादसा: 7 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल, 58 लोगों की हुई थी मौत

अमृतसर दशहरा हादसा में 7 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल.

अमृतसर दशहरा हादसा में 7 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल.

19 अक्टूबर 2018 में जोड़ा फाटक पर लोगों की भीड़ को ट्रेन ने कुचल (Train Accident) दिया था, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई थी. एक जांच के बाद रेलवे पुलिस (Railway Police) ने दावा किया था कि आयोजकों ने अनिवार्य अनुमति और सुरक्षा उपायों के बिना कार्यक्रम का आयोजन किया था.

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    चंडीगढ़. करीब तीन साल पहले अमृतसर में दशहरा पर्व (Dussehra festival) पर आयोजित कार्यक्रम में 58 लोगों की मौत के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत (Court of judicial magistrate)  ने पीसीसी अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) के करीबी सौरव उर्फ मिठू मदान और आयोजन समिति के छह अन्य सदस्यों के खिलाफ आरोप तय किए हैं. 19 अक्टूबर 2018 में जोड़ा फाटक पर लोगों की भीड़ को ट्रेन ने कुचल दिया था, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई थी.

    एक जांच के बाद रेलवे पुलिस ने दावा किया था कि आयोजकों ने अनिवार्य अनुमति और सुरक्षा उपायों के बिना कार्यक्रम का आयोजन किया था. कार्यक्रम धोबी घाट पर आयोजित किया गया था, जिसमें बड़ी सभाओं के लिए जगह की कमी थी. दिलचस्प बात यह है कि जीआरपी ने गिरफ्तारी किए बिना ही अदालत में चालान पेश कर दिया था. चूंकि उसे डर था कि आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण के चलते कानून-व्यवस्था बिगड़ न जाए. जीआरपी ने 19 अक्टूबर, 2018 को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए (लापरवाही से मौत), 337 (चोट पहुंचाना) और 338 (गंभीर चोट) के तहत मामला दर्ज किया था.

    आरोप तय करते समय अदालत ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट और साथ के दस्तावेजों की जांच के बाद उक्त धाराओं के तहत मामला बनाया गया है. कोर्ट ने मुख्य गवाहों को तलब करते हुए सुनवाई की अगली तारीख 2 दिसंबर तय की है. अन्य आयोजन समिति के सदस्य जिनके खिलाफ आरोप तय किए गए हैं उनमें राहुल कल्याण, दीपक कुमार, करण भंडारी, कबल सिंह, दीपक गुप्ता और भूपिंदर सिंह शामिल हैं.

    अक्टूबर 21 रेलवे पुलिस ने अज्ञात संदिग्धों के खिलाफ मामला दर्ज किया क्योंकि राज्य सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच का आदेश दिया था. 22 अक्टूबर राज्य सरकार ने आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए जीआरपी की एसआईटी बनाई थी. 22 नवंबर तब जालंधर मंडल के आयुक्त बी पुरुषार्थ ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी, पैनल के सदस्यों ने एमसी अधिकारियों, पुलिस, रेलवे कर्मचारियों को दोषी ठहराया था. जुलाई 2020 पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी.

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