कैप्टन और सिद्धू के बीच कलह तेज, पंजाब कांग्रेस चीफ सुनील जाखड़ ने बुलाई पार्टी विधायकों की बैठक

पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनाव चल रहा है.

Punjab Congress Crisis: जाखड़ ने कहा कि सभी विधायकों और जिलाध्यक्षों की होने वाली बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाएगा, फिर इसे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा जाएगा.

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    चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और बागी विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के बीच कलह तेज होने के साथ ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने सोमवार को चंडीगढ़ में राज्य इकाई मुख्यालय में 80 विधायकों और दो दर्जन से अधिक जिलाध्यक्षों की बैठक बुलाई है. दिलचस्प बात यह है कि 2017 के राज्य विधानसभा चुनाव में हारने वालों को भी बैठक के लिए बुलाया गया है.


    जाखड़ ने यह बैठक राज्य इकाई में फेरबदल से पहले बुलाई है. रविवार को जारी बयान में जाखड़ ने कहा कि सभी विधायकों और जिलाध्यक्षों की होने वाली बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाएगा, जिसमें कहा जाएगा कि पंजाब के संदर्भ में पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया गया कोई भी फैसला पूरी राज्य इकाई को मंजूर होगा. उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा जाएगा.


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    यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जबकि पंजाब कांग्रेस के सभी गुट अपनी-अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहे थे. जब सिद्धू पंजाब कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) प्रमुख के रूप में अपनी पदोन्नति की उम्मीद में पटियाला में पार्टी के विधायकों और अन्य मंत्रियों से मिल रहे थे, उसी दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेता सुखपाल खैरा के नेतृत्व में 10 विधायकों के एक समूह ने सीएम अमरिंदर सिंह का समर्थन करते हुए एक बयान जारी किया और सिद्धू से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की.


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    राज्य इकाई के नेता मौजूदा स्थिति को लेकर चिंतित हो रहे थे और जाखड़ द्वारा बुलाई गई बैठक को पार्टी के भीतर के मूड को भांपने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के विधायकों द्वारा एक संभावित प्रस्ताव पेश किया जा सकता है जिसमें कहा गया है कि वे नए राज्य इकाई के प्रमुख के नाम पर पार्टी आलाकमान के फैसले का पालन करेंगे. सूत्रों ने कहा कि पार्टी विधायकों से यह भी उम्मीद की जाती है कि वे बिना किसी और देरी के हाईकमान से घोषणा करने का आग्रह करेंगे.


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    उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों से पंजाब कांग्रेस में खुलकर कलह देखने को मिल रही है. पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और कुछ अन्य नेताओं ने मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. पंजाब में 2015 में धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी और उसके बाद हुई पुलिस फायरिंग के मामले में सिद्धू सरेआम मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ हमला कर मामले की जांच में देरी करने का आरोप लगाते रहे हैं. पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2015 की पुलिस गोलीबारी के मामले में एक जांच को रद्द कर दिया था, इसके बाद से सिद्धू, कैप्टन के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं.




    पार्टी में कलह को दूर करने के लिए कांग्रेस आलाकमान ने राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था. इस समिति ने मुख्यमंत्री समेत पंजाब कांग्रेस के 100 से अधिक नेताओं की राय ली और फिर अपनी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी. पिछले दिनों अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. सिद्धू भी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मिले थे.

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