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Exclusive: पंजाब के सियासी मैदान से हटे कैप्टन अमरिंदर, लेकिन नहीं छोड़ा 'खेल'

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है. (फाइल फोटो)

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया है. (फाइल फोटो)

पंजाब के कार्यवाहक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अकाली दल के साथ होने की कथित अफवाहों के बारे में बात की और तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा पर झूठ बोलने का आरोप लगाया.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़/नई दिल्ली. पंजाब के कार्यवाहक मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Amarinder Singh) ने कहा है कि वह पीछे नहीं हटेंगे और अपने सहयोगियों के साथ राजनीति में भविष्य के विकल्प तलाशेंगे. राज्य के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ घंटों बाद CNN-News18 से खास बातचीत में सिंह ने कहा कि बीते 3 महीनों से विधायकों को दिल्ली बुलाना यह दिखाता है कि मुझ पर विश्वास नहीं था. अगर विश्वास नहीं है, तो मेरा यहां (पद पर) बने रहना उचित नहीं था. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह हमेशा एक ‘फौजी’ रहे हैं और सुरक्षाबलों की तरह ही उन्होंने टास्क पूरा किया है और मुख्यमंत्री पद पर साढ़े 9 साल बाद, वह दूसरों के साथ सलाह-मशविरे के बाद अगला फैसला लेंगे. यहां पढ़ें कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह से हुई बातचीत के अंश

  • इतने बड़े कदम के पीछे क्या वजह थी? पंजाब विधानसभा चुनाव 2017 में आप सबसे ज्यादा अंतर से जीते लेकिन कांग्रेस आलाकमान को आप पर भरोसा नहीं था? क्या कारण है कि पिछले छह महीनों में कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं है?

    उन्हें मुझ पर विश्वास क्यों नहीं हुआ या क्या हुआ, यह उनसे पूछा जाना चाहिए. मैं केवल अपनी बात कर सकता हूं. तीन महीने पहले, विधायकों को तीन बार दिल्ली बुलाया गया. साथ ही सीएलपी की बैठक भी हुई. यह विश्वास की कमी दिखाता है. अगर विश्वास नहीं है, तो मेरे वहां (पद पर) रहने का कोई कारण नहीं है. इसलिए मैंने कांग्रेस अध्यक्ष (अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी) से बात की और उनसे कहा कि मैं आपको अपना इस्तीफा भेज रहा हूं, जिसे आप चाहते हैं उसे मुख्यमंत्री बनाएं जिस पर विश्वास हो.
  • लेकिन क्या कारण था? पार्टी ने 2016 में आप पर भरोसा किया था और एक साल बाद आपने 77 सीटें जीती थीं.

    क्या कारण है कि वह ( पंजाब कांग्रेस के नेता ) दिल्ली क्यों जा रहे हैं. बहुत सारे लोग अनुमान लगाते हुए अपनी बात कहते हैं. मैं इसके बारे में नहीं जानता लेकिन मैं निश्चित रूप से यह जानता हूं कि मैंने अपना कर्तव्य निभाया. यह पंजाब मेरा है और मैं साढ़े नौ साल से मुख्यमंत्री पद पर रहा. पहले के कार्यकाल में पांच साल और अब साढ़े चार साल. मैंने राज्य और पंजाबियों के लिए पूरी क्षमता से काम किया और मैं इससे बहुत खुश हूं. राजनीति में एक मंत्री को सीएम बना दिया जाता है या पद से हट जाता है. मैं इस क्षेत्र में 52 साल से हूं. इसलिए मुझे इन बातों की कोई परवाह नहीं है. मैं राजनीति में हूं और रहूंगा.
  • इस्तीफा देने के बाद अब आप क्या करेंगे?

    मैंने आज ही (शनिवार को) इस्तीफा दिया है, लेकिन राजनीति में विकल्प हमेशा होते हैं. असीमित विकल्प हैं और हम आगे देखेंगे कि क्या होगा. राजनीति में मेरे 52 साल के लंबे कार्यकाल में मेरे सहयोगी हैं. मैं संसद, विधानसभा और पार्टी दोनों में अपने सहयोगियों के साथ चर्चा करूंगा.
  • लेकिन ये विकल्प क्या हैं? क्या आप बीजेपी में शामिल होंगे? आगे का रास्ता क्या है?

    मैं इन सवालों का जवाब नहीं देना चाहता, लेकिन सच्चाई यह है कि विकल्प मौजूद हैं. मेरी उम्र 80 साल के करीब हो सकती है लेकिन मैं एक बाघ की तरह फिट हूं और मैं लड़ना जारी रखूंगा. मैं ऐसा नहीं हूं जो पीछे हट जाए. मैं फौजी हूं और रहूंगा. आर्मी में टास्क दिए जाते हैं. मैंने अपना काम पूरा कर लिया है और अब मैं दूसरा काम करूंगा. राजनीति बहुत तेज चलने वाला खेल है.
  • आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों को देखें तो आपके पास कुछ और महीने थे. क्या आपके पास भविष्य की योजनाएं हैं?

    मैंने आपको बताया है, मेरे 50 साल के कार्यकाल में बहुत सारे दोस्त हैं. मैं उनके साथ सलाह-मशविरा करूंगा.
  • क्या आप किसानों से बात करेंगे?

    मैं पहले दिन से कांग्रेस के साथ हूं. कौन उनसे बात कर रहा है, वे कहां जा रहे हैं. वे किन कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं. मृतकों को 5 लाख रुपये देना, उनके परिजनों को नौकरी देना, यह सब मेरी योजनाएं थीं. हमने किसानों के लिए बहुत कुछ किया क्योंकि किसानों के मुद्दे सही हैं.
  • किसान नेताओं के राजनीति में आने की बात हुई है, क्या आपने उनसे इस बारे में चर्चा की है?

    नहीं, उनके साथ राजनीति को लेकर कोई बातचीत नहीं हुई है.
  • क्या नवजोत सिंह सिद्धू के पंजाब की राजनीति में आने के बाद से ही दिक्कतें बढ़ीं?

    मैंने कांग्रेस अध्यक्ष को आज नहीं बल्कि तीन महीने पहले जब मैं उनसे मिला तो मैंने कांग्रेस महासचिव हरीश रावत की मौजूदगी में बैठक के दौरान उन्हें अपना फैसला सुनाया था. मैंने कहा, ‘मैडम, जब सिद्धू दाएं चलें और मैं बाएं तो ऐसी परिस्थिति में मैं काम नहीं कर सकता.’ उन्होंने मुझसे कहा, ‘नहीं, मैं चाहती हूं कि आप जारी रखो.’ अब मुझे नहीं पता कि उन्होंने ऐसा फैसला क्यों दिया.
  • तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने आप पर अकाली दल के साथ काम करने का आरोप लगाया है. इस आरोप पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

    अकाली दल वही बयान देता है जो उसके अनुकूल हो. 13 साल से अकाली दल लगातार मेरे खिलाफ केस कर रहा है. उन्होंने मुझे विधानसभा से हटा दिया और एक समिति का गठन किया जहां 7-0 के फैसले से मैं वापस आया. मेरी उनसे दुश्मनी है, मैं उनके साथ कैसे जुड़ सकता हूँ? तृप्त बाजवा या तो राजनीति नहीं जानते या झूठ बोल रहे हैं.
  • जो कांग्रेस के खिलाफ थे, उन पर मुकदमे चल रहे हैं और आप बादल के प्रति नरम हैं. क्या ये सच है?

    जवाहर कला हो, कोटकपुरा, बरगारी, सभी की एसआईटी चल रही हैं. जांच पूरी करने वाली एसआईटी को मामलों में तब्दील कर दिया गया है जहां गिरफ्तारी भी हुई है. पूर्व डीजीपी जमानत पर बाहर, आईजीपी परमराज सिंह जमानत पर बाहर सभी जांच जारी है. क्या मैं देश के कानून तोड़ रहा हूं? अकाली दल ने इस तरह से दावे किए उनमें से किसी को पद मिल गया. दिल्ली में और यहां पंजाब में भी यही खेल है.
  • क्या आप नवजोत सिंह सिद्धू के मुख्यमंत्री बनने के लिए राजी होंगे?

    मैं मुख्यमंत्री के तौर पर नवजोत सिंह सिद्धू के नाम से सहमत नहीं हूं. वह आपदा हैं. वह मंत्री थे और एक मंत्रालय भी नहीं संभाल सके. राज्य कैसे चलाएंगे? मैंने कांग्रेस अध्यक्ष से इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा था, फिर सीएलपी की जरूरत क्यों पड़ी? मुझे नहीं पता कि सीएम पद के लिए किस पर विचार किया जा रहा है, लेकिन मैं सिद्धू को कभी स्वीकार नहीं करूंगा क्योंकि मैं उनकी क्षमता को जानता हूं और वह अयोग्य हैं.'
  • क्या आप कांग्रेस आलाकमान और नेताओं को कुछ बताना चाहेंगे?

    मेरे पास बताने के लिए कुछ नहीं है. सोनिया जी मुझे पिछले पचास सालों से जानती हैं, बच्चों को मैं बचपन से जानता हूं. उनके पिता मेरे साथ स्कूल में पढ़ते थे. वे मेरे अपने बच्चों की तरह हैं. मुझे राहुल गांधी से कोई शिकायत नहीं है.
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