भावना पर भारी कोरोना! अंतिम संस्कार तो दूर, मां की लाश लेने से भी कर दिया मना
Chandigarh-Punjab News in Hindi

भावना पर भारी कोरोना! अंतिम संस्कार तो दूर, मां की लाश लेने से भी कर दिया मना
लोगों में इस वायरस का डर इस कदर है कि वो अपने परिवार के किसी संक्रमित का शव लेने से भी मना कर दे रहे हैं.

लुधियाना में 69 साल की महिला कुछ दिन पहले ही कोरोना (COVID-19) टेस्ट में पॉजिटिव पाई गई थी. रविवार दोपहर 2:30 बजे उसकी मौत हो गई. अस्पताल प्रशासन ने जब परिवार से लाश लेने को कहा, तो परिवार ने मना कर दिया.

  • Share this:
लुधियाना. भारत में हर दिन कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले बढ़ते जा रहे हैं. लोगों में इस वायरस का डर इस कदर है कि वो अपने परिवार के किसी संक्रमित का शव लेने से भी मना कर दे रहे हैं. पंजाब के लुधियाना में रविवार को कोरोना की वजह से हुई बुजुर्ग महिला की मौत के बाद उसके परिवार ने शव लेने से इनकार कर दिया, जिसके बाद श्मशान के सेवादारों ने महिला का अंतिम संस्कार किया. महिला के परिवार ने 100 मीटर से भी ज्यादा दूर से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखी.

69 साल की महिला कुछ दिन पहले ही कोरोना टेस्ट में पॉजिटिव पाई गई थी, जिसके बाद उसे फॉर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रविवार दोपहर 2:30 बजे उसकी मौत हो गई. अस्पताल प्रशासन ने जब परिवार से लाश लेने को कहा, तो परिवार ने मना कर दिया. ऐसे में जिला प्रशासन ने शव लिया और सेवादारों की मदद से अंतिम संस्कार कर दिया गया.

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात तहसीलदार (सब रजिस्ट्रार) जगसीर सिंह ने महिला की लाश ली. सारी कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद शव को पास के श्मशान घाट लाया गया, जहां सेवादारों ने पूरी तरह से खुद को कवर करते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया निभाई. जगसीर बताते हैं, 'फोन पर कई बार गुजारिश करने के बाद महिला के परिवार से बेटी, दामाद और बेटा ही श्मशान घाट आए थे. हालांकि, वो लोग कार से उतरे भी नहीं, अंदर से ही अंतिम संस्कार खत्म होने का इंतजार करते रहे.'



तहसीलदार जगसीर सिंह बताते हैं, 'हमारी लिए सबसे हैरानी और दुख वाली बात ये थी कि कई बार गुजारिश करने के बाद भी परिवार से कोई भी लाश देखने के लिए नहीं आना चाहता था. परिवार का कोई भी महिला की लाश लेने के लिए फॉर्टिस अस्पताल नहीं आया. हम घंटों इंतजार करते रहे. महिला के इलाज में 3.5 लाख रुपये खर्च हुए थे. जब ये बताया गया तो परिवार ने साफ कह दिया कि वो इसका पेमेंट नहीं करेंगे. हम इसके लिए भी राजी हो गए थे.'




सिंह आगे बताते हैं, 'डिप्टी कमिश्नर ने कहा कि बिल हॉस्पिटल भर देगा, लेकिन कम से कम परिवार के लोग लाश तो ले जाएं, ताकि अंतिम संस्कार हो सके. हैरानी की बात है कि परिवार इसके लिए भी राजी नहीं हुआ... घंटों इंतजार करने के बाद आखिरकार मैं प्रशासन की ओर से शव लेने अस्पताल पहुंचा.'

लाश को पूरी तरह से कवर करने के बाद शिमलापुरी इलाके के पास वाले श्मशान घाट लाया गया था. इसके बाद परिवार को दोबारा फोन किया गया. कई बार कॉल गई, मगर किसी ने फोन नहीं उठाया. जगसीर सिंह बताते हैं, 'हम इंतजार कर रहे थे. हमने यहां तक कि डॉक्टर को भी कहा कि वो परिवार को एक बार समझाए, लेकिन परिवारवाले कुछ सुनना ही नहीं चाह रहे थे.'

सिंह बताते हैं, 'इंतजार करते करते रात के 8:30 बज गए थे. आखिरकार महिला के परिवार से तीन लोग श्मशान पहुंचे. लेकिन, वो कार से उतरे ही नहीं. हमने उनसे कहा कि सभी अधिकारी, पुलिस और यहां तक कि श्मशान के सेवादार भी यहां हैं, कोई खतरे वाली बात नहीं है. क्योंकि लाश अच्छी तरह से पैक है, लेकिन उन लोगों ने हमारी बात नहीं सुनी और कार के अंदर ही बैठे रहे.'

तहसीलदार जगसीर सिंह के मुताबिक, महिला के परिवार वाले लाश को ऐसे देख रहे थे, जैसे वह उनकी मां की नहीं, किसी और की लाश हो. जिसे वो पहली बार देख रहे हैं. परिवार के लोगों ने साफ कह दिया कि जब प्रशासन ने लाश ली है, तो उनकी जिम्मेदारी है. अंतिम संस्कार होता है या नहीं, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. ऐसे में आखिरकार जब परिवार को समझाने की सारी कोशिशें नाकाम हुई, तो रात के 10 बजे महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया.


जगसीर सिंह कहते हैं, 'बेशक परिवार ने महिला का अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया हो, लेकिन श्मशान के सेवादार ने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की. जब मैंने उससे कहा कि ये कोरोना वायरस का केस है, तब भी वह अंतिम संस्कार करने के लिए राजी हो गया. इसके बाद हमने उसे सेफ्टी सूट दिए. सेवादार ने बस इतना कहा कि हम लाश के नजदीक नहीं जाएंगे, उसे चिता पर रखने की जिम्मेदारी प्रशासन की है. इसके बाद दो हेल्थ वर्करों ने ही लाश को चिता पर रखा.'

अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त (सामान्य) इकबाल सिंह संधू ने बताया कि उन्हें समझाया कि उन्हें सुरक्षा से जुड़ी वस्तुएं मुहैया कराई जाएंगी, जो संक्रमण से उन्हें बचाएंगी, फिर भी वह शव लेने के लिए तैयार नहीं हुआ. ये हमारे लिए बहुत दुख की बात थी.

बता दें कि 69 साल की महिला शिमलापुरी में अपने बेटे के साथ रहती थी. दूसरा बेटा कनाडा में रहता है. महिला की एक बेटी भी है. बताया जा रहा है कि महिला हाल ही में अपनी भतीजी से मिले मोहाली गई थी, जहां उसे बुखार आया और हालत खराब होने पर उसे 30 मार्च को लुधियाना के फॉर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रविवार को कार्डिएक अरेस्ट से उसकी मौत हो गई थी.

ये भी पढ़ें: कोरोना वायरस: ट्रंप ने दी चेतावनी- भारत ने अगर नहीं भेजी दवा तो उसे अमेरिका का बदला झेलना होगा

सावधान! भारत में कोरोना वायरस से होने वाली 63% मौतें 60 साल से ऊपर के बुजुर्गों की

 
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading