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Punjab Political Crisis: नवजोत सिंह सिद्धू से बैठक के लिए प्रियंका गांधी के मनाने पर राजी हुए राहुल गांधी?

नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रियंका गांधी से बुधवार को मुलाकात की थी. (फाइल फोटो)

नवजोत सिंह सिद्धू ने प्रियंका गांधी से बुधवार को मुलाकात की थी. (फाइल फोटो)

Punjab Assembly Election 2022 से पहले कांग्रेस में संघर्ष के बीच महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) से मिलने के लिए कथित तौर पर राजी किया था.

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    चंडीगढ़. पंजाब में विधानसभा चुनाव (Punjab Assembly Election 2022) से पहले राज्य की कांग्रेस (Punjab Congress) इकाई में सत्ता संघर्ष जारी है. इस बीच खबर है कि पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) से मिलने के लिए कथित तौर पर राजी किया था. समाचार एजेंसी एएनआई ने शीर्ष सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि सिद्धू और राहुल गांधी के बीच बैठक पर तब तक अंतिम फैसला नहीं हुआ जब तक प्रियंका ने पहल नहीं की और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष को सिद्धू से मिलने के लिए मना नहीं लिया. अगले साल होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की पंजाब इकाई में चल रही तनातनी के बीच सिद्धू ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात की.

    सूत्रों के मुताबिक सिद्धू और राहुल गांधी के बीच 45 मिनट से अधिक समय तक चली बैठक को पंजाब कांग्रेस में 'सुलह की बैठक' के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले दिन में सिद्धू ने प्रियंका से उनके आवास पर मुलाकात की. इसके बाद वह राहुल गांधी और पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने के लिए उनके आवास पर गईं. इस बीच सिद्धू, प्रियंका के लौटने तक उनके आवास पर इंतजार करते रहे.

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    सूत्रों की माने तो सिद्धू का राहुल गांधी से मिलने का मतलब यह है कि वह सुलह के लिए राजी हो गए हैं और आलाकमान का प्रस्ताव उन्हें मंजूर है. हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है. इस बात को लेकर भी असमंजस है कि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह इसके लिए राजी होंगे या नहीं.

    सोनिया गांधी ने उच्च स्तरीय कमेटी बनाई
    इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के खिलाफ नेताओं का पक्ष को सुनने के लिए सोनिया गांधी ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जिसने सिद्धू समेत पंजाब के सभी विधायकों, सांसदों से राय मांगी. सीएम अमरिंदर सिंह दो बार कमेटी के सामने पेश हो चुके हैं. समिति पहले ही अपनी रिपोर्ट सोनिया गांधी को सौंप चुकी है.

    तमाम कवायद के बाद कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री को गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले समेत कुल 18 मुद्दों पर तय समय सीमा के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया. सूत्रों के मुताबिक, चुनाव में चंद महीने बचे हैं, ऐसे में कैप्टन अमरिंदर खुद सिद्धू से टकराव नहीं चाहते लेकिन उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी देने के खिलाफ भी हैं.

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    प्रदेश कांग्रेस के नेता भी सिद्धू को अमरिंदर सिंह का विकल्प बनाने के समर्थन में नहीं हैं. ऐसे में ऐसा लगता है कि सिद्धू के पास कांग्रेस में बने रहने और सीएम के साथ अपने मसले सुलझाने के अलावा और कोई चारा नहीं है.

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