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पंजाब कांग्रेस में नहीं रुक रही कलह, अब सिद्धू गुट के विधायक ने कहा- कैप्टन की अगुवाई में नहीं लड़ूंगा चुनाव

 नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की फाइल फोटो

नवजोत सिंह सिद्धू और मुख्‍यमंत्री कैप्‍टन अमरिंदर सिंह की फाइल फोटो

पंजाब के अमरगढ़ (Amar Gadh Punjab) से कांग्रेस विधायक ने कह दिया है कि वह सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह (CM Captain Amarinder Singh) की अगुवाई में 2022 का चुनाव नहीं लड़ेंगे.

  • News18Hindi
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    चंडीगढ़. कांग्रेस (Congress) आलाकमान की लाख कोशिशों के बाद भी कैप्टन बनाम सिद्धू की जंग पंजाब (Punjab News) में खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. आगामी विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले यह विवाद राज्य में कांग्रेस के लिए खतरा भी है. एक ओर जहां राज्य के प्रभारी हरीश रावत (Harish Rawat) दौरे के बाद मीडिया से बातचीत में कहते हैं कि सब कुछ ठीक है और पंजाब अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू (Navjot Singh Sidhu) की टीम सब कुछ संभाल रही है तो वहीं दूसरी ओर कोई ना कोई नई कलह पार्टी के भीतर फिर जन्म ले लेती है. ताजा मामला राज्य के अमरगढ़ (Amar Gadh Punjab) से कांग्रेस विधायक का है. यहां सिद्धू गुट के विधायक ने कह दिया कि वह सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह (CM Captain Amarinder Singh) की अगुवाई में 2022 का चुनाव नहीं लड़ेंगे.

    मिली जानकारी के अनुसार विधायक सुरजीत धीमन ने कहा है कि वह कैप्टन की लीडरशिप में इलेक्शन नहीं लड़ेंगे और पार्टी को चाहिए कि वह सिद्धू को सीएम उम्मीदवार बनाए. गौरतलब है कि धीमन उन नेताओं में से एक हैं जो हाल ही में पंजाब प्रभारी से राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर मुलाकात कर चुके हैं. सिद्धू गुट के विधायक के इस बयान के पहले पार्टी हाईकमान और राज्य प्रभारी कह चुके हैं कि सीएम नहीं बदले जाएंगे. देहरादून पहुंचकर रावत से मिलने वाले नेताओं से उन्होंने स्पष्ट किया था कि  ‘आगामी विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा.’

    कृषि कानूनों पर सीएम को सिद्धू ने लिखी चिट्ठी
    उधर सिद्धू ने रविवार को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह को पत्र लिखकर किसानों की मांगों पर काम करने की मांग की, जिनमें आंदोलन के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज ‘अनुचित’ प्राथमिकी को रद्द करने की मांग शामिल है. सिद्धू ने कहा कि कांग्रेस हर स्तर पर कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन के साथ खड़ी है. उन्होंने राज्य सरकार से कहा, ‘हमें और अधिक करना चाहिए’ और ‘पंजाब में तीन काले कानूनों को किसी भी कीमत पर लागू नहीं होने देना चाहिए.’ सिद्धू ने 32 कृषि निकायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के दो दिन बाद मुख्यमंत्री को पत्र लिखा. प्रतिनिधियों ने मुलाकात के दौरान अपनी मांगों को उठाया था.

    मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में सिद्धू ने कहा, ‘आपसे अनुरोध है कि आप 32 किसान यूनियनों द्वारा बुलाई गई बैठक में उठाई गईं मांगों पर ध्यान दें और आवश्यक कार्रवाई करें.’ सिद्धू ने कहा कि किसान नेताओं ने राज्य में आंदोलन के दौरान हिंसा के मामलों के कारण किसान संघों के खिलाफ दर्ज ‘अन्यायपूर्ण और अनुचित’ प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की.’ उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राज्य सरकार ने केन्द्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों को समर्थन दिया है.

    सिद्धू ने कहा, ‘फिर भी, अप्रिय घटनाओं के कारण कुछ प्राथमिकी दर्ज की गई हैं.’ उन्होंने कहा कि सरकार अनुकंपा के आधार पर प्रत्येक मामले पर विचार करने और सभी ‘अनुचित’ मामलों को रद्द करने के लिए एक तंत्र स्थापित कर सकती है. फसल खरीद से पहले केंद्र द्वारा भूमि रिकॉर्ड के बारे में जानकारी मांगे जाने के किसानों के डर का जिक्र करते हुए, सिद्धू ने राज्य सरकार से केंद्र के ‘अन्याय’ के खिलाफ लड़ने का अनुरोध किया.

    सिद्धू ने कहा, ‘मैं व्यक्तिगत रूप से मानता हूं कि यह अनुचित है.’ उन्होंने कहा कि दशकों से राज्य के कई हिस्सों में भूमि का विभाजन नहीं हुआ है.

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