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पंजाब: राजनीतिक दलों की रैलियों के बैन पर बंटे किसान नेता, बोले- अब BJP का ही करेंगे विरोध

बीते साल नवंबर से ही किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से अधिकांश किसान हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के हैं. (pic- news18)

बीते साल नवंबर से ही किसान विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इनमें से अधिकांश किसान हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के हैं. (pic- news18)

Punjab Farmers: बीकेयू उग्राहन के प्रमुख जोगिंदर सिंह उग्राहन (Joginder Singh Ugrahan) ने कहा कि हम उन लोगों का समर्थन नहीं खो सकते जो वर्तमान में बीजेपी के दुश्मन हैं.

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    चंडीगढ़. संयुक्त किसान मोर्चा यानी एसकेएम के नेता अब राजनीतिक दलों को बड़ी रैलियों के छूट के मामले में एकमत नजर नहीं आ रहे हैं. राज्य की सबसे बड़ी कृषि संस्था बीकेयू एकता उग्राहन (BKU Ekta Ugrahan) ने  एक अलग राय रखते हुए कहा कि वे बीजेपी (BJP) के अलावा किसी अन्य राजनीतिक दल की गतिविधियों का विरोध नहीं करेंगे. हालांकि 32 किसान संगठनों की राजनीतिक दलों से बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों से किसान नेताओं ने कहा था कि वे पंजाब में चुनाव की घोषणा होने तक चुनाव प्रचार जैसी प्रमुख राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहें.

    मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बीकेयू उग्राहन के प्रमुख जोगिंदर सिंह उग्राहन (Joginder Singh Ugrahan) ने कहा कि तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है. हम एक शक्तिशाली सरकार के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई में हैं. ऐसे समय में हम उन लोगों का समर्थन नहीं खो सकते जो वर्तमान में बीजेपी के दुश्मन हैं. पंजाब के हर गांव में पारंपरिक पार्टियों के अपने कैडर हैं. वे वर्तमान में हमारा समर्थन कर रहे हैं, लेकिन उनका विरोध करने से हम उनका समर्थन खो सकते हैं और गांवों में टकराव की जमीन भी तैयार कर सकते हैं. यह संघर्ष के पक्ष में नहीं होगा. उग्राहां ने कहा कि हम सिर्फ भारतीय जनता पार्टी का विरोध करेंगे.

    संयुक्त किसान मोर्चा के नेता वरिष्ठ किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल (Balbir Singh Rajewal) ने एक बार फिर से स्पष्ट किया कि किसी एक नहीं, सभी दलों का विरोध किया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘हमारा रुख स्पष्ट है कि कोई भी पार्टी चुनाव की घोषणा से पूर्व रैली या सभा न करें. मोर्चा किसी पार्टी या विशेष नेता को इसकी छूट नहीं देगा.’

    संयुक्त मोर्चे के साथ बैठक के दौरान सभी राजनीतिक दल किसान नेताओं के फरमान से सहमत हो गए थे, लेकिन अब राजनीतिक दलों का कहना है कि इससे सिर्फ को कांग्रेस को फायदा होगा. चूंकि सरकार के कार्यक्रमों पर यह फैसला लागू नहीं होगा. अकाली दल और आप ने किसानों को फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है.

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