अमृतसर में सांसद श्वेत मलिक का विरोध, गाड़ी के पीछे दौड़े किसान

किसान मजदूर संगठन के नेता सकतर सिंह कोटला के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता सांसद मलिक का घेराव करने के मकसद से पहुंचे थे.

किसान मजदूर संगठन के नेता सकतर सिंह कोटला के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता सांसद मलिक का घेराव करने के मकसद से पहुंचे थे.

Punjab Latest news in Hindi: किसान मजदूर संगठन के नेता सकतर सिंह कोटला के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता सांसद मलिक का घेराव करने के मकसद से पहुंचे थे. काफी देर तक यह कार्यकर्ता पासपोर्ट कार्यालय के बाहर हंगामा करते रहे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 6:37 PM IST
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चंडीगढ़. कृषि कानूनों (agricultural laws) के चलते पंजाब में भाजपा नेताओं को लगातार विरोध का सामना करना पड़ा रहा है. गुरुवार को अमृतसर के पासपोर्ट कार्यालय (Passport Office Amritsar) में पहुंचे राज्यसभा सांसद श्वेत मलिक (Rajya Sabha MP shwait malik) को भी किसान संगठनों का आक्रोश झेलना पड़ा. मलिक पासपोर्ट कार्यालय की समीक्षा करने के लिए अमृतसर के रंजीत एवेन्यू पहुंचे थे.

उनके कार्यक्रम की भनक लगते ही किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सदस्यों ने वहां पहुंचकर उनके खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया. पासपोर्ट कार्यालय के बाहर उनके खिलाफ जबरदस्त नारेबाजी की गई. जब वह अपनी गाड़ी से वापस जाने लगे तो किसान उनकी गाड़ी के पीछे भागने लगे. इस बीच पुलिस ने उनकी गाड़ी को सुरक्षित बाहर निकाला.

भनक लगते ही एक दर्जन कार्यकर्ता पहुंचे थे विरोध करने
किसान मजदूर संगठन के नेता सकतर सिंह कोटला के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता सांसद मलिक का घेराव करने के मकसद से पहुंचे थे. काफी देर तक यह कार्यकर्ता पासपोर्ट कार्यालय के बाहर हंगामा करते रहे. एक ओर जहां हाल ही में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पीएम मोदी ने भाजपा के नेताओं को किसानों से बातचीत करने के निर्देश दे रखे हैं वहीं दूसरी ओर भाजपा को खास कर पंजाब में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. किसान नेताओं का कहना है कि वे भाजपा नेताओं की जनसभाओं का विरोध तब तक करेंगे, जब तक केंद्र सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं ले लेती.
मलिक बोले किसान नहीं कम्युनिस्ट थे


उधर इस घटना क्रम के बाद राज्यसभा सदस्य श्वेत मलिक ने कहा कि उनका घेराव किसानों ने नहीं कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने किया. मलिक ने कहा कि नारेबाजी करने वालों का किसानों के साथ कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने कहा कि यही वजह है कि जब रवनीत सिंह बिट्टू और गुरजीत सिंह औजला किसान आंदोलन में पहुंचे तो उन्होंने उनका विरोध किया था.

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हालांकि पंजाब में अब स्थानीय निकाय के चुनाव भी समाप्त हो चुके हैं लेकिन भाजपा नेताओं के विरोध का सिलसिला थम नहीं रहा है. ऐसे में देखना यह है कि कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार की अगली रणनीति क्या होगी.
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