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नेटवर्क18 एग्ज़िट पोल 2019 : फिरोज़पुर में सुखबीर सिंह बादल बचा पा रहे हैं अकाली दल की साख?

फिरोज़पुर में सुखबीर सिंह बादल बचा पा रहे हैं अकाली दल की साख?

फिरोज़पुर में सुखबीर सिंह बादल बचा पा रहे हैं अकाली दल की साख?

लोकसभा चुनावों में वोटिंग का दौर समाप्त होने के बाद जो अनुमान सामने आ रहे हैं, उनके मुताबिक पंजाब की अहम फिरोज़पुर सीट पर किसके जीतने के आसार साफ हैं? पढ़ें अनुमान और पूरा गणित.

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    फिरोज़पुर लोकसभा सीट 20 सालों से शिरोमणि अकाली दल का गढ़ रही है लेकिन अकाली दल के टिकट पर चुने गए सांसद शेरसिंह घुबाया इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मैदान में हैं. घुबाया के दल बदलने के बाद एसएडी के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल खुद बतौर प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं. क्या कांग्रेस के हाथ सेंध लगाने वाला पत्ता लगा है या घुबाया को बगावत भारी पड़ेगी? इन सवालों के बीच संपन्न हुए मतदान के बाद न्यूज़18 और इप्सॉस के एग्ज़िट पोल पर आधारित अनुमान के मुताबिक कांटे के मुकाबले में बादल का पलड़ा भारी दिख रहा है और फिरोज़पुर से वो अपनी सीट निकाल सकते हैं.

    बारी बारी जीते अकाली दल और कांग्रेस
    पंजाब का फिराेज़पुर जिला भारत-पाकिस्‍तान की सीमा पर स्थित है. वाघा बॉर्डर इसी ज़िले में पड़ता है. इसके साथ ही यहां के विधानसभा क्षेत्र फाजिल्‍का में शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के समाधि स्थल हैं, जिन्‍हें देखने दूर-दूर से लोग आते हैं. यह ज़िला तबसे है, जब भारत और पाकिस्‍तान अलग नहीं हुए थे. जहां तक राजनीति की बात करें तो फिरोज़पुर लोकसभा सीट काफी महत्‍वपूर्ण सीटों में एक है. यहां शुरू से ही शिरोमणि अकाली दल का कब्‍ज़ा रहा है, लेकिन आम आदमी पार्टी के आ जाने के बाद यहां की राजनीति में बदलाव आया और अकाली दल के लिए यहां जीत हासिल करने में क‍ठिनाई आने लगी.

    1952 के चुनावों में इस सीट पर शिरोमणि अकाली दल ने जीत दर्ज की. हालांकि उसके बाद लगातार तीन बार 1967 तक कांग्रेस ने इस सीट को अपने कब्‍ज़े में ले लिया. अकाली दल ने अपने गढ़ को पाने के लिए पुरज़ोर कोशिश की और आखिरकार 1977 तक लगातार तीन बार यह सीट फिर अकाली दल के पास रही. 1980 और 1984 में एक बार फिर यहां से कांग्रेस के उम्‍मीदवार जीते, जबकि 1989 में निर्दलीय और 1996 में बहुजन समाज पार्टी ने यहां जीत दर्ज की. 1998 के बाद से यह सीट फिर शिरोमणि अकाली दल की झोली में आ गिरी. अकाली दल के सीनियर लीडर जोरा सिंह मान यहां से 3 बार जीते.

    मुकाबला त्रिकोणीय है और दिलचस्प भी
    2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर अकाली दल के शेर सिंह घुबाया ने जीत हासिल की. हालांकि लगातार जीतने के बाद अकाली दल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उम्‍मीदवारों में फेरबदल करने का फैसला किया और अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने फिरोज़पुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया. ऐसे में इस जीत को बरकरार रखने की चुनौती बादल के कंधों पर है.

    इसके साथ ही सुखबीर सिंह बादल के सामने कांग्रेस ने अकाली दल के बागी और पूर्व सांसद शेर सिंह घुबाया को ही मैदान में उतारा है. वहीं, आम आदमी पार्टी ने हरजिंदर सिंह काका को टिकट दिया है. खास बात है कि इस सीट पर आम आदमी पार्टी का जनाधार है. वहीं सीपीआई से हंसराज गोल्‍डन भी चुनौती दे रहे हैं. पिछली बार यहां तीसरे नंबर पर रहे आप उम्‍मीदवार ने चुनावी समीकरण बिगाड़ दिए थे.

    पिछले चुनाव में थी कांटे की टक्कर
    पिछले लोकसभा चुनाव में अकाली दल के उम्‍मीदवार शेर सिंह घुबाया ने करीबी मुकाबले में कांग्रेस के प्रत्‍याशी सुनील जाखड़ को हराया था. इस दौरान शेर सिंह घुबाया को 4,87,932 वोट मिले जबकि पार्टी के कांग्रेस अध्‍यक्ष रहे सुनील जाखड़ को 4,56, 512 वोट मिले. जाखड़ को 31,420 वोट से हार मिली. इस दौरान तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के सतनाम पॉल कंबोज रहे, जिन्‍हें 1,13,412 वोट मिले. लिहाजा कहा गया कि अगर आप उम्‍मीदवार न होता तो सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना थी. इससे पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में घुबाया ने कांग्रेस के जगमीत सिंह बरां को हराया था.

    नौ विधानसभा सीटों का ताना-बाना
    फिरोज़पुर संसदीय सीट के अंतर्गत विधानसभा की 9 सीटें आती हैं. तीन ज़िलों की नौ विधानसभाओं वाली फिरोज़पुर संसदीय सीट की 3 विधानसभा सीटें एससी वर्ग के लिए आरक्षित है. विधानसभाओं में फिरोज़पुर शहर, फिरोज़पुर देहाती, गुरुहरसहाय, जलालाबाद, फाज्लिका, अबोहर और बल्लूआना शामिल हैं.

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