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किसान आंदोलन को लेकर पंजाब BJP में असंतोष! पूर्व उपाध्यक्ष बोलीं- सरकार चाहती तो एक दिन में सुलझ जाता मुद्दा

पूर्वी दिल्‍ली और गाजियाबाद में 8 घंटे लगेगा जाम-संकेतिक फोटाेे
पूर्वी दिल्‍ली और गाजियाबाद में 8 घंटे लगेगा जाम-संकेतिक फोटाेे

Famer Protest: BJP की पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मी कांता चावला (Laxmi Kanta Chawla) ने कहा है कि इतने लंबे से तक आंदोलन को नहीं चलने देना चाहिए था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 25, 2021, 6:50 PM IST
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नई दिल्ली. नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन लगातार जारी है. अब तक सरकार और किसानों के बीच बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला है. इस बीच इस आंदोलन को लेकर पंजाब के बीजेपी नेता नाराज़गी जाहिर करने लगे हैं. BJP की पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मीकांत चावला (Laxmi Kanta Chawla) ने कहा है कि इतने लंबे से तक आंदोलन को नहीं चलने देना चाहिए था. उन्होंने ये भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते तो इस मामले को एक दिन में ही सुलझा लेते.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए 78 साल की लक्ष्मी कांता चावला ने कहा, 'मैं बीजेपी नेता होने के नाते नहीं बल्कि एक आम नागरिक के तौर पर कहना चाहती हूं कि कोई भी आंदोलन इतने लंबे वक्त तक नहीं चलना चाहिए. इसका समाधान पहले ही तलाशा जाना चाहिए था. दिसंबर के महीने में जब ठंड और आत्महत्या से 30 किसानों की मौत हो गई तो मैंने पीएम मोदी को ये कहते हुए चिट्ठी लिखी कि अगर कृषि मंत्री मामले को सुलझा नहीं पा रहे हैं तो फिर उन्हें खुद इस मुद्दे को अपने हाथ में ले लेना चाहिए.'

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'PM खुद बात करते तो बेहतर होता'
चवाला ने ये भी कहा कि किसानों ने शांतिपूर्वक तरीके से आंदोलन कर पूरी दुनिया के सामने एक नई मिसाल पेश की है. उन्होंने कहा, 'किसान सौ फीसदी गलत नहीं हैं और न ही नए कृषि कानून. प्रधानमंत्री को खुद किसानों के साथ बैठ कर बातचीत के जरिए इसका समाधान तलाशना था. मुझे लगता है कि अगर पीएम चाहते तो फिर वो एक दिन में ही इसका कोई समाधान निकाल लेते.'


नेताओं की नाराज़गी
बीजेपी के एक और नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, 'पहले कृषि अध्यादेशों को विरोध के बावजूद संसद में पारित किया गया. बाद में, पार्टी इस  बात को समझ नहीं पाई कि किसानों के बीच गुस्से के कारण अकाली दल ने हमारे साथ 27 साल पुराना गठबंधन तोड़ दिया. किसानों ने अक्टूबर में रेल रोको और अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू किया, केंद्रीय मंत्रियों के साथ पहली बैठक 13 नवंबर को आयोजित की गई थी. किसानों के दिल्ली पहुंचने के बाद से दस दौर की बैठकें हो चुकी हैं. लेकिन पंजाब में 6 जून से 26 नवंबर तक विरोध प्रदर्शन के दौरान सिर्फ एक बैठक हुई.'
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