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  • गुरनाम चढूनी के 'मिशन पंजाब' से किसान संगठनों में 'दरार', सिंघु बॉर्डर के लिए चला सैकड़ों कारों का काफिला

गुरनाम चढूनी के 'मिशन पंजाब' से किसान संगठनों में 'दरार', सिंघु बॉर्डर के लिए चला सैकड़ों कारों का काफिला

चढूनी के प्रस्ताव पर संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली में 13 और 14 जुलाई को अपनी मीटिंग में इस पर विस्तार से बात करेगा. फाइल फोटो

Punjab Assembly Election 2021: संयुक्त किसान मोर्चा ने जोर देकर कहा है कि किसान आंदोलन और राजनीति एक साथ नहीं चल सकती. संयुक्त किसान मोर्चा के दर्शन पाल ने कहा, 'मिशन पंजाब की चर्चा से मोर्चा में दरार पड़ रही है.'

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    गुरदासपुर. भारतीय किसान यूनियन के नेता गुरनाम सिंह चढूनी (Gurnam Singh Chaduni) ने किसान संगठनों के बीच आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव (Punjab Election 2021) लड़ने का प्रस्ताव रखा है. चुनाव लड़ने का प्रस्ताव देने के बाद चार दिन बाद गुरनाम सिंह चढूनी पंजाब के गुरदासपुर स्थित डेरा बाबा नानक (Dera Baba Nanak) से दिल्ली स्थित सिंघु बॉर्डर (Singhu Border) तक के लिए सैकड़ों कारों के काफिले की अगुवाई कर रहे हैं. इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में चढूनी ने कहा, 'मिशन पंजाब एक विचार है, जिसे मैंने लोगों के बीच रखा है. बाकी चीजें लोगों पर निर्भर करती हैं. ये अच्छी बात है कि लोग इस आइडिया को स्वीकार कर रहे हैं और सकारात्मक अंदाज में ले रहे हैं. बहुत सारे लोग हैं, जो चुनाव लड़ने के योग्य हैं. समय आ गया है कि राजनीतिक सिस्टम को बदला जाए और 'जनता द्वारा, जनता के लिए और जनता का शासन' के विचार को साकार किया जाए, जोकि बहुत सालों से 'कॉरपोरेट द्वारा, कॉरपोरेट्स के लिए और कॉरपोरेट का शासन' हो गया है.'

    चढूनी ने पिछले बुधवार को एक वीडियो बयान में मिशन पंजाब का प्रस्ताव रखा था, जिसे संयुक्त किसान मोर्चा ने खारिज कर दिया था. संयुक्त किसान मोर्चा किसान संगठनों का एक अंब्रेला संगठन है, जिसके तहत कृषि कानून के खिलाफ किसान संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. संयुक्त किसान मोर्चा ने भारतीय किसान यूनियन के नेता के बयान को निजी विचार करार दिया है. चढूनी ने कहा, 'हम कहते हैं कि हम व्यवस्था में बदलाव लाएंगे, लेकिन हम इस बारे में नहीं सोचते कि इसे साकार करने के लिए क्या करना होगा. बीजेपी और कांग्रेस व्यवस्था बदलने में नाकाम रही है और बदलाव के लिए हम किससे उम्मीद करें? अगर हम बदलाव चाहते हैं तो हमें एक प्लान बनाना होगा. और ये प्लान मिशन पंजाब होना चाहिए.'

    किसान नेता चढूनी की रैली का बटाला, धारीवाल, गुरदासपुर, मुकेरियां और किशनगढ़ में स्थानीय लोगों ने जोरदार नारों के साथ स्वागत किया. इन शहरों के अन्य हिस्सों में भी रैली और रोडशो का लोगों ने बड़े उत्साह के साथ स्वागत किया. लुधियाना में डाइंग एसोशिएसन, घुमार मंडी मार्केट एसोशिएसन, एसी मार्केट एसोशिएसन और अन्य इंडस्ट्री समूह के लोगों ने सिंघु बॉर्डर जा रहे किसानों के काफिले को अपना समर्थन दिया.

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    डेरा बाबा नानक में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए चढूनी ने कहा, "हम उन लोगों को वोट क्यों दें, जो सिर्फ 3 प्रतिशत लोगों (पूंजीवादियों) के लिए काम करते हैं. यही वजह है कि मैं लोगों से कह रहा हूं कि आप चुनाव लड़िए. मैं पंजाब के लोगों से इस अभियान में जुड़ने के लिए कह रहा हूं. हमारे बीच ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जो चुनाव लड़ सकते हैं."

    दूसरी ओर संयुक्त किसान मोर्चा ने जोर देकर कहा है कि किसान आंदोलन और राजनीति एक साथ नहीं चल सकती. संयुक्त किसान मोर्चा के दर्शन पाल ने कहा, "मिशन पंजाब की चर्चा से मोर्चा में दरार पड़ रही है. इसलिए जरूरत है कि हम कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई पर फोकस करें. लोग हमसे मिशन पंजाब के बारे में पूछ रहे हैं. चुनाव लड़ना हमारा एजेंडा नहीं रहा है और ये कभी होगा भी नहीं. चढूनी को अपने आइडिया के बारे में पहले हमसे बात करनी चाहिए थी, बाद में जनता के बीच जाना चाहिए था. हालांकि संयुक्त किसान मोर्चा दिल्ली में 13 और 14 जुलाई को अपनी मीटिंग में इस पर विस्तार से अपनी बात रखेगा."

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