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in punjab 23 farmers unions protest start from today demanding bonus on wheat crop

पंजाब में 23 किसान यूनियनों का आज से हल्ला-बोल, गेहूं की फसल पर बोनस देने की कर रहे मांग

पंजाब में गेहूं की फसल पर बोनस की मांग को लेकर 23 किसान यूनियनों ने ​प्रदर्शन की चेतावनी दी है. (File Photo)

पंजाब में गेहूं की फसल पर बोनस की मांग को लेकर 23 किसान यूनियनों ने ​प्रदर्शन की चेतावनी दी है. (File Photo)

किसान संघ सूखे अनाज के कारण उपज के नुकसान की भरपाई के लिए गेहूं की फसल पर 500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा उनकी मांग है कि जोन सिस्टम को भंग किया जाए और 10 जून से धान की रोपाई की अनुमति दी जाए.

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चंडीगढ़: संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल 23 यूनियन आज से चंडीगढ़ में गेहूं की फसल पर बोनस की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन ‘पक्का मोर्चा’ शुरू करेंगे. इसके अलावा किसान संगठन 10 जून से धान की रोपाई पर अड़े हुए हैं, जबकि सरकार ने यह तिथि 18 जून निर्धारित कर रखी है. किसान संगठनों के कार्यकर्ता मोहाली में गुरुद्वारा अम्ब साहिब में इकट्ठा होंगे और अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने के लिए चंडीगढ़ कूच करेंगे. संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि यह विरोध प्रदर्शन, दिल्ली में साल भर चले आंदोलन की तर्ज पर शुरू किया जा रहा है. किसानों की पंजाब सरकार से साथ अपनी मांगों को लेकर हुई चर्चा विफल हो चुकी है.

किसान संघ सूखे अनाज के कारण उपज के नुकसान की भरपाई के लिए गेहूं की फसल पर 500 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस देने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा उनकी मांग है कि जोन सिस्टम को भंग किया जाए और 10 जून से धान की रोपाई की अनुमति दी जाए. किसानों की मांग है कि हॉर्स पावर की प्रत्येक यूनिट के लिए 4700 रुपये के वर्तमान लोड शुल्क में 1200 रुपये की कटौती की जाए और ओवरलोड फीडर सिस्टम को कम किया जाए. किसानों की 10 मई को बिजली मंत्री हरभजन सिंह के साथ एक बैठक हुई थी, जिसमें उन्होंने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया था.

पंजाब सरकार ने किसानों से चरणबद्ध रोपाई का आग्रह किया है और राज्य को चार क्षेत्रों में विभाजित किया है. इसके तहत 18 से 26 जून तक धान की रोपाई का कार्यक्रम तय किया गया है. सरकार ने यह योजना बिजली आपूर्ति के दबाव को कम करने के लिए तैयार की है. पंजाब के 14.5 लाख से अधिक ट्यूबवेल धान की रोपाई के मौसम में अरबों क्यूबिक मीटर पानी निकालते हैं, जिसके कारण भूजल स्तर तेजी से कम हो रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों का दावा है कि 1 किलोग्राम चावल के उत्पादन में 5,000 लीटर पानी लगता है.

पंजाब में 30 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की खेती होती है. इसमें लगभग 5 लाख हेक्टेयर में बासमती धान की खेती होती है, जिसमें पानी की खपत बहुत ज्यादा है. इस बार पंजाब की भगवंत मान सरकार ने कम से कम 10 लाख हेक्टेयर में धान की सीधी बुवाई का लक्ष्य रखा है. संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य दर्शन पाल सिंह ने कहा कि हमें उपज के नुकसान के लिए मुख्यमंत्री द्वारा वादा किए गए मुआवजे का एक पैसा भी नहीं मिला है. हमें कोई जोन सिस्टम नहीं चाहिए. हम चाहते हैं कि 10 जून से पूरे राज्य में धान की रोपाई की अनुमति दी जाए.

Tags: Farmers Agitation, Punjab, Samyukt Kisan Morcha

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